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पाक-अफगान रिश्ते सुधारने को काबुल में हुई वार्ता

इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान के दो शीर्ष अधिकारियों ने अफगान अधिकारियों से

दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा करने वाली हाल की घटनाओं

पर वार्ता करने के लिए काबुल का दौरा किया। आज  यह जानकारी दी गई।

पाकिस्तान के विदेश सचिव सोहैल महमूद और इंटर-

सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद ने सोमवार को

काबुल में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब से मुलाकात की।

अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता कबीर हकमल ने काबुल में संवाददाताओं से इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने

रिश्तों को सामान्य करने के तरीकों पर बात की।

सूत्रों के अनुसार, वार्ता के एजेंडे में पेशावर में एक अफगान बाजार पर विवाद,

सीमा पर गोलीबारी की घटनाओं और एक-दूसरे के राजनयिकों

का उत्पीड़न जैसे मुद्दे रहे।

अफगान सरकार ने पिछले महीने एक संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर पेशावर में अफगान बाजार में पुलिस की छापेमारी का विरोध जताया था।

काबुल ने इसके बाद पेशावर स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया था।

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पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि मार्केट पर विवाद एक नागरिक तथा एक अफगान बैंक के बीच हुआ था

और एक कोर्ट ने 1998 में इस

संबंध में नागरिक के पक्ष में फैसला सुनाया था।

लगभग एक पखवाड़ा पहले सीमा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा चौकी बनाए जाने के विरोध में अफगान सेना ने बल प्रयोग किया था, जिसके

बाद दोनों देशों की सेनाओं में लड़ाई हुई थी।

कुछ दिनों तक चली लड़ाई में अफगानी सैनिकों ने चित्राल में पाकिस्तान के आम नागरिकों को निशाना बनाया था, जिसमें सैनिकों समेत कई

लोग घायल हो गए थे।

सबसे बाद में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अपने राजनयिकों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।

अफगान विदेश मंत्रालय ने पहले आरोप लगाया कि इस्लामाबाद में उसके राजदूत आतिफ मशाल को आईएसआई ने समन भेजा और संस्था

के कर्मियों का व्यवहार कूटनीतिक नियमों और सिद्धांतों के खिलाफ था।

पाकिस्तानी सरकार ने बाद में दावा किया कि काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों को सड़क पर रोका गया और दूतावास जा

रहे दूतावास के वाहनों को मोटरसाइकिलों से टक्कर मारी गई।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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