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सरकार के तानाशाहीपूर्ण चेहरे ने बढ़ाया जनता का विरोध : माकपा

नई दिल्ली। माकपा ने मोदी सरकार पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुये कहा है कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के मुद्दे पर सरकार की हठधर्मिता ने लोगों के विरोध को बढ़ा दिया है और पार्टी इसके विरोध में आठ जनवरी को देशव्यापी हड़ताल करेगी। माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के संपादकीय लेख में पार्टी ने कहा, ‘‘संसद से नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद, पिछले 15 दिन भारत के राजनीतिक इतिहास के लिये महत्वपूर्ण साबित हुये।

इस अवधि में दो परस्पर विरोधी बातें उजागर हुयीं। पहली यह कि मोदी सरकार ने पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण रवैया अपना लिया है और दूसरी बात यह साबित हुयी कि सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर उपजा देशव्यापी विरोध संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर हुये हमले के खिलाफ जनता के गुस्से का प्रतीक था।’ मुखपत्र में माकपा ने कहा कि केन्द्र और राज्यों में भाजपा की सरकारें देश के नागरिकों के एकजुट होने, विरोध करने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकारों पर हमले कर रही हैं।

चार से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाने वाली दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144, भाजपा शासित राज्यों और दिल्ली, जहां पुलिस केन्द्र सरकार के मातहत है, में लागू की गयी। पार्टी ने कहा कि सबसे बुरे हालात भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश में पैदा हुये, जहां राज्यव्यापी स्तर पर निषेधाज्ञा लागू की गयी।

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पार्टी ने सरकार पर धारा 144 जैसे उपनिवेशकालीन प्रावधानों के आधार पर संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुये कहा कि असम में नौ दिनों तक इंटरनेट बंद रहने के बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर इसे बहाल किया गया। माकपा ने कहा, ‘‘कश्मीर में साढ़े चार महीने से इंटरनेट बंद है और किसी क्षेत्र में इंटरनेट बंद होने का यह विश्व रिकॉर्ड है।’ माकपा के मुताबिक, सरकार इस सच्चाई को झुठला नहीं सकती कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर, एक दूसरे से जुड़े हैं।

पार्टी ने कहा कि सीएए और एनआरसी के पीछे भाजपा सरकार का धार्मिक एजेंडा है और हाल ही में झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार ने साबित कर दिया कि जनता ने सरकार के इस एजेंडे को नकार दिया है। पार्टी ने कहा कि देश को धर्म के आधार पर बांटने के भाजपा के एजेंडे को जनता के बीच उजागर करने के लिये माकपा ने आठ जनवरी को देशव्यापी स्तर पर हड़ताल का आह्वान किया है।

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