nayaindia इंडोनेशिया में स्थित है भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा, जिसे बनाने में लगे 28 साल, मुर्तिकार को प्राप्त है पद्मश्री पुरस्कार ..जानें इसकी खासियत - Naya India
ताजा पोस्ट | लाइफ स्टाइल | धर्म कर्म| नया इंडिया|

इंडोनेशिया में स्थित है भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा, जिसे बनाने में लगे 28 साल, मुर्तिकार को प्राप्त है पद्मश्री पुरस्कार ..जानें इसकी खासियत

इंडोनेशिया : हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार विष्णु सृष्टि रचने वाले तीन मुख्य देवों में एक हैं। पुराणों में विष्णु को विश्व या जगत का पालनहार कहा गया है। वो त्रिमूर्ति देवों में शामिल हैं। त्रिमूर्ति के अन्य दो देवता ब्रह्मा और शिव हैं। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, तो शिव को संहारक माना गया है। पूरे भारत में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और अलग-अलग रूपों में पूजा भी की जाती है।समस्त भारत में श्री हरि के अनेकों मंदिर है। जिनकी अलग-अलग मान्यता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में भगवान विष्ण की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं है। ये एक ऐसे देश में है जो मुस्लिमों की आबादी के मामले में दुनिया में नंबर एक पर है वो देश है इंडोनेशिया। इंडोनेशिया में इस विशाल मूर्ती का निर्माण करने वाले मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता को भारत में सम्मानित किया गया और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया था।

also read: कोरोना काल में संकट मोचन “हनुमान” भी आए संकट में, आर्थिक तंगी से गुज़र रहे है ..

2018 में तैयार हुई श्री हरि की प्रतिमा

विष्णु की यह मूर्ति इंडोनेशिया मे है जो करीब 122 फुट ऊंची और 64 फुट चौड़ी है। इस मूर्ति का निर्माण तांबे और पीतल से किया गया है। इसे बनाने में करीब 28 साल का समय लगा है। ये मूर्ति साल 2018 में बनकर पूरी हुई थी और पूरी दुनिया से लोग इसे देखने और दर्शन करने आते हैं। 1979 में इंडोनेशिया में रहने वाले मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता ने हिन्दू प्रतीक की विशालकाय मूर्ति बनाने का स्वप्न देखा था। स्वप्न देखना तो आसान था लेकिन एक ऐसी मूर्ति बनाना जो विश्वविख्यात हो, वाकई कठिन काम था। कहा जाता है कि इस मूर्ति को बनाने की शुरुआत करने के लिए 1980 के दशक में एक कंपनी बनाई गई थी। तय किया गया कि इसी की देख-रेख में सारा काम होगा। इस मूर्ति की संरचना पर कड़ा परिश्रम किया गया।

1994 में हुई शुरुआत

न्यूमन नुआर्ता को एक ऐसी कृति बनानी थी जो आजतक दुनिया में न बनाई गई हो। जिसे देखने वाला, बस देखता ही रह जाए। यही वजह है कि लंबी प्लानिंग और पैसे के इंतजाम के बाद इस मूर्ति को बनाने की शुरुआत 15 साल बाद करीब 1994 में हो पाई। इस मूर्ति के निर्माण में इंडोनेशिया की कई सरकारों ने मदद की। और वाकई में ऐसा ही हुआ जो सोचा वो कर दिखाया। इस मर्ति को दुनिया की सबसे ऊंची मुरत कहा जाता है।  मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता ने ऐसी प्रतिमा बना डाली। ऐसी मुर्ति श्री हरि की कहीं भी नहीं देखी जाती है। भारत में जहां देवी-देवताओं को इतना पूजा जाता है। भारत में अनेकों मंदिर तो है लेकिन ऐसी मुरत नहीं। इसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते है इसको देखते ही मंत्रमुग्ध हो जाते है।

प्रतिमा को बड़े बजट की जरूरत थी

इस मुरत को बनाने के लिए बड़े बजट की आवश्यकता थी। जितनी बड़ी प्रतिमा उतना ही बड़ा बजट। बहुत बार ऐसा भी हुआ कि पैसे ना होने के वजह से काम बंद करना पड़ा। साल 2007 से 2013 तक करीब 6 सालों तक इसका निर्माण कार्य रुका रहा था। लेकिन फिर उसके बाद काम की शुरुआत हुई और पांच साल और लग गए। बीच में एक बार इस मूर्ति के पास रहने वाले स्थानीय लोगों ने भी आवाज उठाई थी। लेकिन फिर जब उन्हें समझाया गया कि ये मूर्ति इंडोनेशिया का सबसे बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी साबित हो सकती है तो लोग मान गए थे।

सबसे पहले दर्शन इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने किया

गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु की ये मूर्ति दुनियाभर में मौजूद हिंदू भगवानों की मूर्तियों में सबसे ऊंची बताई जाती है। इसके बाद मलेशिया में बनी भगवान मुरुगन की ऊंचाई मानी जाती है। मुरुगन भी भगवान विष्णु का ही स्वरूप हैं। दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु में भगवान विष्णु की पूजा मुरुगन के नाम से ही जाती है। इस मंदिर के तैयार होने पर सबसे पहले दर्शन करने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो पहुंचे थे। इस मंदिर की ख्याति विश्व स्तर पर फैली हुई है। दुनियाभर के हिंदू श्रद्धालु यहां पहुंचते रहते हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.

one × 3 =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
ज्ञानवापी मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर तक टली
ज्ञानवापी मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर तक टली