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दिल्ली हिंसा पर राज्यसभा में भारी शोरगुल

नई दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को दिल्ली हिंसा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक तथा भारी शोरगुल के कारण सदन की कार्यवाही दूसरी बार तीन बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए उप सभापति हरिवंश ने जरुरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाये और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पर आगे चर्चा के लिए अन्नाद्रमुक के ए. नवनीत कृष्णन का नाम पुकारा तो कांग्रेस समेत विपक्ष के सभी सदस्य खड़े हो गये और दिल्ली हिंसा पर चर्चा की मांग करने लगे।

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कांग्रेस के आनंद शर्मा ने व्यवस्था का प्रश्न उठाने का प्रयास किया तो उप सभापति ने कहा कि अव्यवस्था के बीच व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। नवनीतकृष्णन के सदन में मौजूद नहीं होने के कारण हरिवंश ने जनता दल यू की परवीन कहकशां को बोलने के लिए कहा और वह बोलने लगी तो विपक्ष के सदस्यों ने शोरगुल करते हुए कहा कि अव्यवस्था के बीच सदस्य को बोलने के लिए कैसे कहा जा सकता है।

इस बीच सदन के नेता थावर चंद गहलोत ने कहा कि सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार है और सभाापति इसके लिए समय तय करेंगे। सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार को दिल्ली की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सदन में सरकार हालात सामान्य होने के बाद चर्चा कराने की बात कर रही है जबकि सदन के बाहर दिल्ली में हालात सामान्य होने की बात करती है।

इस पर सत्ता पक्ष की ओर प्रथम पंक्ति में बैठे सदस्यों ने बोलने का प्रयास किया तो उपसभापति ने कहा कि वह सदन में इस मुद्दे पर बहस नहीं चाहते। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले सुबह भी सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि जो स्थिति अभी सदन में बनी है उसी के कारण वे दिल्ली हिंसा पर यहां अभी चर्चा की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसके बाद भी सदन में हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका।

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