नागरिकता विधेयक पर होगा जनांदोलन : तृणमूल

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन विधेयक को भारत तथा बंगाल विरोधी और असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि इसे लेकर देश भर में संग्राम तथा जनांदोलन किया जायेगा और इसे देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी जायेगी।

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने आज नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए खुदीराम बोस और बाघा जतिन जैसे क्रांतिकारियों की दिसम्बर में जयंती का उल्लेख किया और कहा कि यह महीना बंगालियों के लिए बड़ा पवित्र होता है।

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इस पवित्र महीने में सरकार भारत और बंगाल विरोधी विधेयक लेकर आयी है। उन्होंने कहा कि अंडमान की जेल में बंद रहे क्रांतिकारियों में से 70 फीसदी बंगाली थे इसलिए सरकार बंगाल के लोगों को राष्ट्रभक्ति न सिखाये। इस विधेयक के खिलाफ संग्राम तथा जनांदोलन होगा और इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जायेगी। नागरिकता संशोधन विधेयक की 1933 में जर्मनी में नाजी शासन के दौरान लाये गये दो विधेयकों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि देश तानाशाही की ओर अग्रसर है।

उस समय जर्मनी में यातना शिविर थे अब यहां हिरासत केन्द्र बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार झूठ पर झूठ बोलकर और यह कहकर , “ भारत खतरे में है’ , लोगों को भ्रम में डाल रही है।  सदस्य ने कहा कि ‘असत्य, झांसा और जुमला’ पर आधारित सरकार कह रही है कि घुसपैठिये लोगों का अधिकार छीन रहे हैं लेकिन वह इस बात का जवाब नहीं देती कि उसकी नीतियों के कारण देश में दो करोड़ लोगों की नौकरी चली गयी।

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उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि इस विधेयक से लाखों लोगों को नागरिकता दी जायेगी लेकिन सरकार यह नहीं बताती कि संसद की एक स्थायी समिति के समक्ष गुप्तचर ब्यूरो के महानिदेशक ने ही बताया था कि लगभग 31 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा। मोदी सरकार को वादे करने में माहिर बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उन्हें तोड़ने में और भी अधिक माहिर है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारित होने से मोहम्मद अली जिन्ना का अधूरा काम पूरा हो जायेगा।

ब्रायन ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, धारा 370 को हटाने जैसे मुद्दाें से तो देश जूझ ही रहा था अब लोगों को नागरिकता विधेयक पारित होने के बाद इसके परिणामों से भी जूझना होगा। तृणमूल नेता ने विपक्षी दलों विशेष रूप से जनता दल यू और बीजू जनता दल से विधेयक के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि आज तो आप यह विधेयक पारित करा देंगे लेकिन आने वाली पीढियों को क्या जवाब देंगे।

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