औरंगाबाद में तालाबों के माध्यम से होगी पारंपरिक सिंचाई

औरंगाबाद। बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी जल-जीव-हरियाली कार्यक्रम के तहत कृषि प्रधान औरंगाबाद जिले के गांवों में तालाबों के माध्यम से खेतों में पारंपरिक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने आज यहां बताया कि राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के तहत जिन गांवों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी वहां किसानों के निजी खेत में तालाब का निर्माण कराया जाएगा और इसके माध्यम से पारंपरिक सिंचाई की सुविधा सुलभ हो सकेगी। उन्होंने बताया कि इससे गांवों के विकसित होने में मदद मिलेगी।

महिवाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उन किसानों को विशेष रूप से लाभ पहुंचेगा जहां अभी सिंचाई की सुविधा सुलभ नहीं है। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर से कम भूमि में सिंचाई के लिए तालाब का निर्माण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराया जाएगा जबकि एक हेक्टेयर से अधिक भूमि में तालाब का निर्माण लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से होगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि इसके लिए शीघ्र ही सर्वेक्षण का काम प्रारंभ किया जा रहा है और लाभुक किसानों से आवेदन भी लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले के 24 सार्वजनिक तालाबों पर अतिक्रमणकारियों ने अतिक्रमण कर रखा है जिसे 31 दिसंबर के पूर्व अतिक्रमण मुक्त करा लिया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित अंचल अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।

इसे भी पढ़ें :- बिहार विधानमंडल: शीतकालीन सत्र आज

महिवाल ने बताया कि तालाबों के निर्माण के जरिए आसपास के खेतों की आसानी से सिंचाई हो सकेगी। जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के तहत जिले को अभी तक 20 करोड़ रूपए का आवंटन प्राप्त हो चुका है और इस कार्यक्रम को क्रियान्वित करने पर जिला प्रशासन का विशेष जोर है। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में 14000 सरकारी चापाकलों का सर्वेक्षण कराया गया है जिनमें कुछ चालू है जबकि अधिकतर खराब पड़े हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि खराब पड़े सभी सरकारी चापाकलों की विशेष रूप से मरम्मति करा कर उसे चालू किया जाएगा। इसके लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को जिम्मेवारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि पेयजल संकट वाले इलाकों में सरकारी चापाकल की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि गर्मी के दिनों में इन इलाकों में ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़े।

इसे भी पढ़ें :- बिहार में 523 चिकित्साकर्मियों की होगी बहाली

महिवाल ने बताया कि इसके अलावा पानी के पुराने परंपरागत जल स्रोत कुओं का भी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। अब तक पूरे जिले में 22 कुआं का जीर्णोद्धार कराकर उससे पेयजल की सुविधा सुलभ कराई जा रही है। उन्होंने बताया हरियाली के लिए इस कार्यक्रम के तहत पांच लाख पौधे लगाए गए हैं। दूसरी तरफ शहरी इलाके में जल संरक्षण के लिए मकान मालिकों को वर्षा के जल संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि शहरी इलाके में जलस्तर को बनाया रखा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares