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Vat Savitri Puja 2021 सुबह वट वृक्ष पर चढाया नारियल, शाम को उसी नारियल से फोड़ डाला पति का सर…

कानपुर | गुरुवार को वट सावित्री पूजा थी. इस पूजा के दौरान महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं, और वट वृक्ष की पूजा करती हैं. लेकिन कानपुर में त्यौहार के दिन एक दंपत्ति के साथ जो कुछ हुआ वह खुशी हरा नहीं था. एक विवाहिता ने वट सावित्री की पूजा करने के बाद अपने पति के साथ एक सेल्फी लेने की जिद कर ली. ऑफिस जाने की जल्दबाजी में होने के बावजूद पति ने पत्नी की यह इच्छा जाया नहीं जाने दी और सेल्फी लेने के लिए तैयार हो गया. पति पत्नी की सेल्फी पूरी होते ही पति काम पर चला गया. ऑफिस से लौटने के बाद जब पत्नी ने सेल्फी देखने के लिए पति का फोन लिया तो फिर बड़ा विवाद हो गया. गुस्से में आकर पत्नी ने पति से सर पर वो नारियल फेक कर मार दिया दो उसने सुबह पूजा में चढ़ाया था.

दूसरे महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में था पति

पति के ऑफिस से लौटने के बाद पत्नी ने सेल्फी देखनी चाहिए. इसके लिए ऑफिस से लौटते ही पति का मोबाइल लेकर व गैलरी चेक करने लग गई. फोटो देखने के लिए उत्सुक पत्नी ने गैलरी खोली तो उसके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई. पत्नी को तस्वीरों में उसका पति किसी और महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दिया जिसके बाद उसने जमकर बवाल किया. पहले तो पत्नी ने घर में अपनी पति की खूब पिटाई कर दी और उसके बाद पति को घंसीटते देते हुए थाने लेकर पहुंच गई.

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घसीटते हुए पति को थाने लेकर पहुंची

पति की दूसरी महिला के साथ तस्वीर देखने के बाद पत्नी आग बबूला हो गई. अपने पति को घसीटते हुए वह थाने ले आई. मामला बिगड़ते देख दोनों पक्ष के परिजन भी वहां पहुंच गए और दोनों को समझाना शुरू कर दिया. पत्नी ने अपने पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की और तलाक लेने की भी धमकी दी. काफी समझाने के बाद दोनों के बीच समझौता कराया गया. मामला शांत होने के बाद पुलिस ने दोनों को घर भेज दिया.

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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