वेंकैया ने गुरू पूर्णिमा पर आडवाणी का जताया आभार - Naya India
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वेंकैया ने गुरू पूर्णिमा पर आडवाणी का जताया आभार

नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने गुरू पूर्णिमा पर भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक एवं दिग्गज नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी समेत कई विभूतियों को गुरू रूप में स्वीकार करते हुये उनका आभार व्यक्त किया है।

नायडू ने गुरू पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर शनिवार को सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर लिखे एक लेख में अपनी जीवन यात्रा का जिक्र करते हुए उन 57 व्यक्तियों का उल्लेख किया जिन्होंने उनके जीवन विभिन्न चरणों में दिशा दी।

नायडू ने बताया कि जब वह मात्र 15 माह के थे तो उनकी माता का निधन हो गया और लालन पालन उनके दादा दादी ने किया। वहीं उनके प्रथम गुरू भी रहे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख राजनेता तेनेती विश्वनाथनम और आडवाणी का स्मरण एवं आभार व्यक्त करते कई व्यक्तियों का उल्लेख का किया और कहा कि इन्होंने उनके जीवन को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में दिशा दी।

गुरू – शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के इस युग में शिष्यों के साथ गुरूओं को व्यक्तिगत संबंध बनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट गुरु का स्थान नहीं ले सकता. इंटरनेट से केवल जानकारी और सूचना मिलती है जबकि गुरु विश्लेषण और परीक्षण करने का कौशल प्रदान करता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण में गुरू की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिष्य में नैतिक मूल्य, सदाभावना और उत्तर दायित्व की भावना का विकास केवल गुरु कर सकता है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के गुरु – शिष्य संबंध का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरु के बिना जीवन बिना रोशनी के रास्ते जैसा है

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

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