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उपराष्ट्रपति Venkaiah Naidu ने रामनवमी की शुभकामनाएं दी और कहा- आध्यात्मिकता और नैतिकता का केंद्र है राम

नई दिल्ली | उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने देशवासियों को रामनवमी (Ram Navami) की शुभकामनाएं दी है और कहा है कि श्री राम (Shri Ram) राष्ट्र की आध्यात्मिकता और नैतिकता का केंद्र (Center for Spirituality and Ethics) है।

वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने रामनवमी (Ram Navami) पर आज यहां जारी एक संदेश में कहा कि पुरुषोत्तम श्री राम (Shri Ram), भारतीय संस्कृति और साहित्य (Indian Culture and Literature) के नायक हैं, देश की नैतिक और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। श्री राम समावेशी न्यायपूर्ण समाज के प्रणेता हैं, उनके द्वारा स्थापित मर्यादाएं सार्वकालिक और शाश्वत हैं।

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नायडू ने अपने संदेश में इस चौपाई का भी उल्लेख किया-

“ जो आनंद सिंधु सुखरासी।

सीकर तें त्रेलोक सुपासी।।

सो सुखधाम राम अस नामा।

अखिल लोक दायक बिश्रामा।।

वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने कहा, देश वासियों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जन्म दिवस, (Shri Ram Birthday) राम नवमी (Ram Navami) की हार्दिक शुभकामनाएं। वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने कहा कि भगवान राम (Lord Ram) सद्गुण, अच्छाई, साहस और करूणा की प्रतिमूर्ति हैं।

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राम नवमी (Ram Navami) का पर्व मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम (Lord Ram) के आदर्श जीवन का स्मरण कराता है तथा उनके द्वारा दिखाए गए अच्छाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है। यह पर्व हम सभी को अपने परिवार, समाज और देश के प्रति हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है ।

उन्होंने कहा, मैं यह कामना करता हूं कि यह त्यौहार हमारे जीवन में खुशहाली और शांति लाए, हमें भगवान राम (Lord Ram) द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे तथा उनके द्वारा स्थापित आदर्शों से युक्त विश्व का निर्माण करे।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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