क्या है फ्रांस की खूनी ग्लेशियर की कहानी, आइये जानते है वैज्ञानिकों का जुबानी

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फ्रांस : क्या आपने कभी किसी ग्लेशियर को लाल होते देखा है..सभी का जवाब ना ही आएगा और काफी हद तक यह सच भी है लेकिन फ्रांस के एल्प्स की पहाड़ियों पर ग्लेशियर लाल होने लगे है। सफेद ग्लेशियर अचानक से लाल होने लगे है। इसे अलग-अलग कयास लगाए जा रहे है। कोई इसे नरसंहार की निशानी बता रहा है तो कोई इसे जीवों के कत्लेआम से जोड़ रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसी किसी भी आशंका से इनकार किया है। वैज्ञानिको द्वारा इसकी जांच की जा रही है। इसे विज्ञान की भाषा में ग्लेशियर का खून कहा जाता है और इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए एक प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है।

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वैज्ञानिकों का एल्पएल्गा प्रोजेक्ट

लिवसाइंस की रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस में अचानक से ग्लेशियर के लाल होने के बाद वैज्ञानिकों द्वारा इसकी जांच की जा रही है। फ्रांस के वैज्ञानिकों ने इसके लिए एल्पएल्गा प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। ग्लेशियर में यह खून 3,280 फीट से लेकर 9,842 फीट तक ही जमा हुआ है। इतनी ऊंचाई में जमा खीन की इस प्रोजेक्ट के द्वारा जांच की जा रही है। अभी तक जिन ग्लेशियरों की जांच की गई है, उनके नतीजे हैरान करने वाले हैं। क्योंकि जिस जीव की वजह से ग्लेशियर पर लाल धब्बे बने हैं, वह आमतौर पर सागरों, नदियों और झीलों में रहता है। अचानक उसका पानी की गहराइयों से निकलकर जमा देने वाले ग्लेशियरों पर आना कई सवाल खड़े करता है।

एल्गी के कारण हुए लाल हुए ग्लेशियर

एल्पएल्गा प्रोजेक्ट के कॉर्डिनेटर एरिक मर्शाल ने बताया कि ग्लेशियरों का लाल होना एक खास प्रकार की माइक्रोएल्गी के कारण हो रहा है जो ग्लेशियरों में पनप रही है। माइक्रोएल्गी पानी में रहती है। और जब यह पहाड़ों के सर्द मौसम से जब रिएक्ट करती है तो यह लाल रंग छोड़ती है, जिसकी वजह से कई किलोमीटर तक ग्लेशियर लाल दिखने लगता है। उन्होंने कहा कि क्योंकि ये माइक्रोएल्गी पर्यावरण परिवर्तन और प्रदूषण को बर्दाश्त नहीं कर पाती। नतीजतन इसके शरीर में  रिएक्शन होता है और बर्फ लाल रंग होने लगती है। इस एल्गी की वजह से ग्लेशियर लाल हो जाते है और इन्हें हम खूनी ग्लेशियर कहते है।

हवा के साथ Glacier पर पहुंच रहे

एरिक ने बताया कि आमतौर पर एल्गी सागरों, नदियों और झीलों में मिलती हैं, लेकिन अब माइक्रोएल्गी बर्फ और हवा के कणों के साथ उड़कर ग्लेशियरों तक जा पहुंचे हैं। कुछ तो काफी ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों तक पहुंच गए हैं। जब हमारी टीम फ्रेंच एल्प्स के ग्लेशियर पर पहुंची तो वहां का नजारा पूरा लाल हुआ पड़ा था। ये माइक्रोएल्गी बर्फ के छोटे कणों के बीच मौजूद पानी में पनप रही थी। उन पर पर्यावरण परिवर्तन और प्रदूषण का असर साफ नजर आ रहा था।

हरे रंग की होती हैं Microalgae

एरिक के अनुसार, आमतौर पर माइक्रोएल्गी की कोशिकाएं एक इंच का कुछ हजारवां हिस्सा होती हैं। लेकिन जब यह एक साथ जमा होती हैं तो पूरी कॉलोनी बना लेती हैं। या फिर सिंगल सेल के रूप में अलग-अलग जगहों पर रहती रहते हैं। ये फोटोसिंथेसिस के जरिए शुगर बनाती हैं। इस शुगर का उपयोग पूरा पारिस्थितिकी तंत्र करता है। चाहे वह सीधे तौर पर उपयोग करे या फिर अप्रत्यक्ष रूप से। उन्होंने आगे कहा कि फ्रेंच एल्प्स पहाड़ों पर मौजूद ग्लेशियरों को लाल करने वाली एल्गी टेक्नीकली हरी एल्गी है, जिसका फाइलम क्लोरोफाइटा है। लेकिन इनमें कुछ खास तरह के क्लोरोफिल होते हैं, जो नारंगी या लाल रंग का पिगमेंट बनाते हैं।

वैज्ञानिकों को भी एल्गी की बायोलॉजी का अनुमान नहीं

एरिक मर्शाल ने बताया कि जब एल्गी ब्लूम होता है यानी एल्गी तेजी से फैलती है तब उसके आसपास की बर्फ नारंगी या लाल रंग की दिखने लगती है। ऐसा कैरोटिनॉयड्स की वजह से होता है। ऐसा लगता है कि पूरे ग्लेशियर पर खूनी जंग छिड़ी हुई हो। एरिक के मुताबिक, उन्होंने आखिरी बार इस ग्लेशियरों को साल 2019 के बंसत ऋतु में देखा था। तब वहां पर कई किलोमीटर दूर तक ग्लेशियर लाल रंग का दिख रहा था। उन्होंने  बताया कि वैज्ञानिकों ने यह तो पता कर लिया है कि ग्लेशियर लाल कैसे हो जाते हैं, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि वैज्ञानिकों को इस एल्गी की बायोलॉजी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। यह भी नहीं पता कि पहाड़ों के इकोसिस्टम पर यह कैसे पनप रही हैं। आमतौर पर समुद्र में एल्गी पनपने की वजह होती है न्यूट्रीएंट से भरा प्रदूषण, लेकिन पहाड़ों पर यह पोषण बारिश और हवा से पहुंचता है। संभव है इसकी वजह से पनपी होगी. इसके अलावा वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की बढ़ोतरी भी इसके पनपने की वजह हो सकती है।

इस तरह से करती हैं प्रभावित

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 में नेचर मैगजीन में छपी एक स्टडी के मुताबिक लाल रंग की बर्फ कम रोशनी परावर्तित करती है, जिसकी वजह से बर्फ तेजी से पिघलने लगती है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो  एल्गी ग्लेशियर के जीवन को छोटा कर सकती है। हालांकि, यह बात अब भी अस्पष्ट है कि समुद्री एल्गी के पनपने, पर्यावरण परिवर्तन और प्रदूषण की वजह से ग्लेशियरों के लाल होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिसकी वजह से उस इकोसिस्टम में रहने वाले अन्य जीव-जंतुओं के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

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