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भाजपा और कांग्रेस के दावों के बीच जीतेगा कौन, बना बड़ा सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव की मतगणना कल होनी है, मगर दोनों प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत के साथ सत्ता की कमान संभालने के दावे कर रही हैं। वहीं मतदाताओं के मन मस्तिष्क में एक सवाल कौंध रहा है कि आखिर जीत किसकी हो रही है।

राज्य में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव हो रहे हैं, इनमें से 25 वह स्थान हैं जहां के तत्कालीन विधायकों ने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी, वहीं तीन स्थान विधायकों के निधन के कारण रिक्त हुए थे। दोनों ही दलों ने इन चुनावों को जीतने के लिए पूरा जोर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

मतगणना कल होने वाली है और नतीजे से पहले जो एग्जिट पोल आए हैं, उसे दोनों ही दल पूरी तरह स्वीकारने को तैयार नहीं है। एग्जिट पोल में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा को बढ़त दिखाई गई है। कांग्रेस की तरफ से यही कहा जा रहा है कि एग्जिट पोल से उलट जीत उसी के खाते में आने वाली है। दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि एग्जिट पोल में जितनी सीटें भाजपा को दिखाई जा रही हैं, उससे कहीं ज्यादा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीतेंगे।

चुनाव नतीजों को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का कहना है कि, भाजपा सभी 28 क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी और यह पार्टी के कार्यकर्ता के अथक परिश्रम से संभव होने जा रहा है । कांग्रेस तो मतगणना होने से पहले ही हार मानने लगी है, यही कारण है कि दिग्विजय सिंह ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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