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विश्व रक्तदाता दिवस 2021: कोरोना काल में भी प्लाज़मा डोनेट कर कोरोना मरीजों को दिया जीवनदान

आज 14 जून को पूरे विश्व में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा हर साल 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का उद्देश्य है कि लोगों को जागरूक करना। सेफ ब्लड और ब्लड प्रोडक्ट्स के बारे में लोगों को जागरूक करना। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय आज के दिन आम जनता को स्वैच्छिक कार्यकर्ता, अनपेड रक्त दाताओं द्वारा उनकी संबंधित स्वास्थ्य प्रणालियों में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को लेकर एकसाथ आता है। रक्तदान को महादान कहा जाता है। हर साल ना जानें कितने ही बच्चें और बड़ों की खून के अभाव में मौत हो जाती है। हर साल रक्तदान शिविर भी लगाया जाता है। इसमें बहुत से लोगों द्वारा खून दिया जाता है। कोरोना महामारी में लोगों ने मरीजों को बड़ी संख्या में प्लाज़मा डोनेट किया है। लॉकडाउन में भी किसी भी मरीज को जब ब्लड की जरूरत थी जब भी लोगों ने प्लाज़मा देने से पीछे नहीं हटे। भारत सहित विदेशों में भी लोगों ने ब्लड डोनेशन से पीछे नहीं हटे। rare ब्लड ग्रुप को ढूंढ़ने में बड़ी समस्या होती है। अंत समय में ऐसा ब्लड ग्रुप कहींमिलता भी नहीं है। इसलिे रक्तदान शविर में भी rare ब्लड ग्रुप वालों का पहले खून लिया जाता है। किसी भी इमरजेंसी या ऑपरेशन में rare ब्लड ग्रुप आसानी से नहीं मिलता है।

प्लाज़मा डोनेशन को बंद करवा दिया

हालांकि, पिछले महीने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘द लैंसेट’ द्वारा रिकवरी क्लिनिकल परीक्षण के रिजल्ट प्रकाशित करने के बाद अपने क्लिनिकल मैनेजमेंटप्रोटोकॉल से कोविड -19 के लिए दीक्षांत (convalescent) प्लाज्मा के उपयोग को हटा दिया। मेडिकल जर्नल ने उल्लेख किया कि अधिक मात्रा में रोगी को एंटीबॉडी के साथ ब्लड और प्लाज्मा चढ़ाने से 28 दिनों के बाद रोगी के जीवित रहने की संभावना में सुधार करने में विफल साबित हुआ। प्लाज़मा डोनेशन का काम सबसे पहले दिल्ली में शुरु हुआ था। उसके बाद प्लाज़मा मरीज की जान बचाने में उसफल साबित हुआ तो असके उपयोग को तुरंत हटा दिया गया। कोरोना महामारी आने से पहले ही बल्ड डोनेशन की उपयोगिता लोगों को पता थी। लोग किसी भी शिविर में बड़ी संख्या में रक्तदान करते थे। कोरोना ही नहीं किसी अन्य बीमारी में भी मरीज को खून की अत्यंत आवश्यकता होती है।

रक्त दो और दुनिया को हराते रहो।

हालांकि, ऐसे समय में जब स्वास्थ्य सेवा का बुनियादी ढांचा कोविड के मामलों से भरा हुआ है, थैलेसीमिया, एनीमिया और रक्त विकृतियों जैसी अन्य जानलेवा चिकित्सा स्थितियों के रोगियों को यह महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा प्राप्त करने की आवश्यकता है। प्रसव के दौरान रक्त की कमी महिलाओं को भी प्रभावित करती है क्योंकि डिलीवरी के बार खून बहने से कई बार मां की मौत ही जाती है। इसलिए, इस वर्ष डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर में ब्लड डोनर्स के योगदान के लिए एक स्लोगन निकाला है ‘रक्त दो और दुनिया को हराते रहो। देश-दनिया में मेडिकल इमरजेंसी के समय में यह ब्लड डोनर्स की महत्वपूर्ण और संगठित तरीके से काम करने के बारे में है। महामारी के दौरान रक्तदान करने में कई ब्लड डोनर्स इन्फेक्शन को लेकर परेशान हो सकते हैं और ये लाज़मी भी है। लेकिन इस सिलसिले में WHO का कहना है कि रक्तदान एक नेक काम है और इससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।

रक्तदान के फायदें

विश्व रक्तदाता दिवस सर्वप्रथम 2004 में मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस संघ व रेड क्रीसेंट समाज ने 14 जून को वार्षिक तौर पर ‘रक्तदान दिवस’ पहली बार मनाकर इसकी शुरुआत की थी। कई लोग स्वस्थ होते हुए भी रक्तदान करने से डरते हैं, क्योंकि उनके मन में इससे जुड़ीं कई भ्रांतियां होती हैं। लोग अभी भी रक्तदान नहीं करते है उनके मन में कोई डर बैठा हुआ है लेकिन उनको शायद यह नहीं पता कि उनके थोड़े से खून से कितनो की जिंदगियां बचाई जा सकती है। आइये जानते है रक्तदान के फायदें ..

1 एक औसत व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिटयानी (5-6 लीटर) रक्त होता है।

2 रक्तदान करते हुए डोनर के शरीर से केवल 1 यूनिट रक्त ही लिया जाता है।

3 कई बार केवल एक कार एक्सीडेंट (दुर्घटना) में ही, चोटील व्यक्ति को 100 यूनिट तक के रक्त की जरूरत पड़ जाती है।

4 एक बार रक्तदान से आप 3 लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।

5 भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप ‘O नेगेटिव’ है।

6 ‘O नेगेटिव’ ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर कहलाता है, इसे किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को दिया जा सकता है।

7 इमरजेंसी के समय जैसे जब किसी नवजात बालक या अन्य को खून की आवश्यकता हो और उसका ब्लड ग्रुप ना पता हो, तब उसे ‘O नेगेटिव’ ब्लड दिया जा सकता है।

8 ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया काफी सरल होती है और रक्त दाता को आमतौर पर इसमें कोई तकलिफ नहीं होती हैं।

9 कोई व्यक्ति 18 से 60 वर्ष की आयु तक रक्तदान कर सकता हैं।

10 रक्त दाता का वजन, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर, बॉडी टेम्परेचर आदि चीजों के सामान्य पाए जाने पर ही डॉक्टर्स या ब्लड डोनेशन टीम के सदस्य आपका ब्लड लेते हैं।

11 पुरुष 3 महीने और महिलाएं 4 महीने के अंतराल में नियमित रक्तदान कर सकती हैं।

12 हर कोई रक्तदान नहीं कर सकता। यदि आप स्वस्थ हैं, आपको किसी प्रकार का बुखार या बीमारी नहीं हैं, तो ही आप रक्तदान कर सकते हैं।

13 अगर कभी रक्तदान के बाद आपको चक्कर आना, पसीना आना, वजन कम होना या किसी भी अन्य प्रकार की समस्या लंबे समय तक बनी हुई हो तो आप रक्तदान ना करें।

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