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चीन में अब शी की तानाशाही!

बीजिंग। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीसीपी की एक हफ्ते चली पार्टी कांग्रेस समाप्त हो गई है। भारी ड्रामे से और राष्ट्रपति शी जिनफिंग की तानाशाही की स्थापना के संकल्प के साथ यह बैठक समाप्त हुई। रविवार को पोलित ब्यूरो के सदस्यों का चुनाव होगा, जिसमें तीसरे कार्यकाल के लिए जिनफिंग के नाम का प्रस्ताव लाया जाएगा। सीसीपी की बैठक के आखिरी दिन शनिवार को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में चल रही बैठक में से पूर्व राष्ट्रपति हू जिनताओ को जबरदस्ती निकाल दिया गया। राष्ट्रपति जिनफिंग ने अपने प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी पार्टी की सेंट्रल कमेटी से हटा दिया है। उनके साथ साथ तीन और वरिष्ठ पदाधिकारी हटा दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि पार्टी के अंदर शी जिनफिंग की नीतियों पर सवाल उठाने वाले या उनका विरोध करने वाले तमाम नेताओं को हटा दिया गया है।

नीतियों पर मतभेद की वजह से ही पूर्व राष्ट्रपति जिनताओ को बैठक से बाहर निकाला गया। न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के हवाले से जारी एक वीडियो में शी जिनफिंग के बगल में बैठे हू जिनताओ को दो सुरक्षाकर्मियों ने कुर्सी से उठाया और उन्हें मीटिंग हॉल से बाहर ले गए। ध्यान रहे जिनताओ सीसीपी के बड़े नेता हैं और 2013 में शी जिनफिंग के राष्ट्रपति बनने से पहले वे मार्च 2003 से मार्च 2013 तक 10 साल चीन के राष्ट्रपति रहे थे। संविधान के मुताबिक, दो कार्यकाल पूरे होने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था।

शी जिनफिंग ने संविधान के इस प्रस्ताव को पिछले साल ही एक बैठक में बदलवा दिया। इस बदलाव को सीसीपी की पार्टी कांग्रेस में मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के जरिए शी जिनफिंग के राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। इसके अलावा उन्होंने अपनी मर्जी की सेंट्रल कमेटी भी बनवा ली है। एक हफ्ते तक चली पार्टी कांग्रेस में पार्टी के सदस्यों ने नई सेंट्रल कमेटी के लिए वोटिंग की। इसमें 205 सदस्य चुने गए। यह कमेटी अब पोलित ब्यूरो के सदस्यों का चुनाव करेगी। सीसीपी की बैठक के बाद सेंट्रल कमेटी की मीटिंग होगी, जिसमें पोलित ब्यूरो के 25 सदस्य और स्थायी कमेटी के सात सदस्य चुने जाएंगे। इनकी घोषणा रविवार को होगी।

इससे पहले बैठक समाप्त होने के साथ ही एक दूसरी न्यूज एजेंसी ‘एपी’ ने बताया कि शी जिनफिंग ने चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी सेंट्रल कमेटी से हटा दिया है। उनके साथ तीन और शीर्ष पदाधिकारियों को हटाया गया है। अब ये चारों नेता पोलित ब्यूरो के सदस्य नहीं बन पाएंगे। गौरतलब है कि 2013 में जिनफिंग के राष्ट्रपति बनने से पहले सभी नेता पांच साल के दो कार्यकाल या 68 साल की उम्र होने पर रिटायर होते रहे हैं। उससे पहले माओत्से तुंग अपवाद थे, जो तीन दशक तक राष्ट्रपति रहे थे। उनके बाद ही यह दो कार्यकाल का नियम बनाया गया था, जिसे शी ने बदलवा दिया है।

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