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कोर्ट ने लिवर रोगी को भर्ती करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति को उपचार के लिए भर्ती करे जिसे यकृत प्रतिरोपण की आवश्यकता है , लेकिन वह खर्च वहन नहीं कर सकता है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने मामले में अस्पताल से स्थिति रिपोर्ट दायर करने को भी कहा। आईएलबीएस दिल्ली सरकार के अंतर्गत आता है। अदालत ने कहा , ‘‘ पहले आप उसे भर्ती करें और स्थिति रिपोर्ट भी दायर करें। 25 जुलाई के लिए (मामले को) सूचीबद्ध कीजिए। ’’ इसने कहा कि रोगी को उस अस्पताल से आईएलबीएस स्थानांतरित किया जाए जहां वर्तमान में वह गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती है। अदालत बीरेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसने दावा किया कि वह लिवर खराब हो जाने की समस्या से जूझ रहा है और आईएलबीएस उसे नि : शुल्क इलाज उपलब्ध कराने से इनकार कर रहा है। कुमार की ओर से पेश वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि अस्पताल इस तथ्य के बावजूद उनके मुवक्किल से पैसे मांग रहा है कि वह गरीब है और उपचार का खर्च वहन नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि उसका उपचार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत किया जाना चाहिए। वकील ने कहा कि मानकों के मिलान के आधार पर संभावित डोनर उपलब्ध हैं। व्यक्ति ने दावा किया कि शुरू में उसका उपचार वेल्लोर में चल रहा था और बाद में उसे गत छह अप्रैल को आईएलबीएस में भर्ती कराया गया। उसने 22 अप्रैल तक अस्पताल को दो लाख रुपये का भुगतान किया। याचिका में बताया गया कि कुमार से लिवर प्रतिरोपण के लिए 15 लाख रुपये जमा करने को कहा गया। उसने इतना पैसा दे पाने में असमर्थता जताई क्योंकि उसके और उसके परिवार ने उसके उपचार के लिए मकान सहित सबकुछ बेच दिया। इतना पैसा दे पाने में असमर्थता जताए जाने पर उससे अस्पताल से चले जाने को कह दिया गया। इसमें कहा गया कि उसे दूसरे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के तहत भर्ती किया गया , लेकिन डॉक्टरों ने उसे जल्द से जल्द किसी ऐसे अस्पताल में लिवर प्रतिरोपण कराने की सलाह दी जहां यह सुविधा उपलब्ध हो। 

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