पंचांग 31 अक्टूबर गुरुवार

शुभ विक्रम संम्वत 2076  परिधावी नाम संवत्सर ,शाके:1941 ।मु.मास-  रवि उल अव्वल 02 ,हेमंत ऋतू , कार्तिक मास शुक्ल पक्ष

शुभ तिथि चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि रात्रि 1 बजकर 01 मिनट तक तत्पश्चात पंचमी तिथि रहेगी। चतुर्थी तिथि मे अग्नि,विषादिक असद कार्य,शत्रु मर्दन,इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते है| शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित है| चतुर्थी तिथि मे जन्मे जातक धनवान, बुद्धिवान ,भाग्यवान ,पराक्रमी  होते है।
ज्येष्ठा नक्षत्र रात्रि 9 बजकर 31 मिनट तक तत्पश्चात मूल नक्षत्र रहेगा| ज्येष्ठा नक्षत्र मे अग्नि ,शिल्प,चित्रकारी इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते है। ज्येष्ठा नक्षत्र गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र है अतः ज्येष्ठा नक्षत्र मे जन्मे जातको कि 27 दिन बाद पुनः इसी नक्षत्र के दिन मूल शांति करवा लेनी चाहिए|  ज्येष्ठा नक्षत्र मे जन्म लेने वाला जातक स्वतन्त्र विचारो वाला,कठोर मेहनत करने वाला, क्रोधी स्वाभाव वाला , सुन्दर ,साहसी,व्यापार निपुण ,धनवान, बुद्धिमान होता है
चन्द्रमा सम्पूर्ण दिन वृश्चिक राशि में संचार करेगा|

व्रतोत्सव –  विनायक चतुर्थी ,सूर्य छठ पूजा आरम्भ

राहुकाल – दोपहर 1.30 बजे से 3 बजे तक

दिशाशूल – गुरुवार को दक्षिण दिशा मे दिशाशूल रहता है। यात्रा को सफल बनाने लिए घर से दही खा कर निकले ।

आज के शुभ चौघड़िये – सूर्योदय से प्रातः 8.02 मिनट तक शुभ का,प्रातः 10.48 से दोपहर 2.56 मिनट तक चर,लाभ ,अमृत का और सायं 4.19 से सूर्यास्त तक शुभ का चौघड़िया

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