आमलकी एकादशी 2021ः शास्त्रों में बहुत है महत्व जानें, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

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आमलकी एकादशी का हिंदु पुराणों में विशेष महत्व है. आमलकी का मतलब होता है आंवला और इस दिन आंवला की भी पुजा करने की मान्यता है. होली के चार दिन पहले मनाई जाने वाली आमलकी एकादशी का हिंदु शास्त्रों में विशेष महत्व है. ऐसा कहते हैं कि आमलकी एकादशी का वर्त करने से सभी पापों से मुक्त हो जाते है. सभी रोगों से भी मुक्ति मिलती हैै. आमलकी एकादशी का उपवास भगवान विष्णु को समर्पित हैं. इस एकादशी के वर्त को करने से भक्त को सभी कामों में सफलता मिलती है. एकादशी का वर्त करने वाले लोग इस दिन भगवान विष्णु की शुद्ध मन से पुजा करते हैं. इस बार आमलकी एकादशी कब है इस को लेकर लोग थोड़े असमंजस में है. आइए जानें इसे करने की क्या विधि है…

एकादशी की तिथिु और शुभ मुहूर्त

आमलकी एकादशी की तिथि- 25 मार्च 2021
एकादशी तिथि प्रारंभ- 24 मार्च 2021 को सुबह 10 बजकर 23 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्‍त- 25 मार्च 2021 को सुबह 09 बजकर 47 मिनट पर
पारण का समय- 26 मार्च 2021 को सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 8 बजकर 21 मिनट तक

आमलकी एकादशी व्रत करने का महत्व

आमलकी एकादशी के दिन आंवला की भी पुजा करने की जाती हैैै. आंवला को शास्त्रों में शुद्ध माना गया है. ऐसी मान्यता है कि श्री हरि विष्णु ने जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को जन्म दिया था तो उसी समय श्री हरि ने आंवले के वृक्ष को भी जन्म दिया था. आंवले को श्री हरि ने आदिवृक्ष के रुप में जन्म दिया था. आंवले के पेड़ के हर अंग में भगवान विष्णु का निवास माना गया है. आंवला भगवान विष्णु का प्रिय फल है आमलकी एकादशी के दिन आंवला और भगवान विष्‍णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्‍ति होती है. जो लोग स्वर्ग और मोक्ष की कामना करते है उनको एकादशी का व्रत करके आंवला के वृक्ष के नीचे बैठ प्रसन्न मन से भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए.

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आमलकी एकादशी की पूजन विधि

एकादशी से एक दिन पहले दशमी की रात को भगवान विष्‍णु का ध्‍यान करते हुए सोना चाहिए. एकादशी के दिन पहले रोजाना के काम करने के बाद स्नान करके साफ कपड़े पहनें. घर के ही मंदिर में श्री हरि की फोटो या प्रतिमा को सामने रखकर हाथ में तिल,कुश,पैसे लेकर व्रत का संकल्प करें. संकल्प लेते समय बोलें- मैं (अपना नाम) भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता या रखती हूं. हे विष्ण मुझे अपना शरण में लें और मेरा व्रत सफलतापूर्क पुरा कीजिए कोई भुल हो तो मुझ माफ करने की कृपा करें. इसके बाद भगवान विष्णु को स्नान कराएं. साफ कपड़े से पोछकर स्वच्छ वस्त्र पहनाए. अब विष्‍णु भगवान को पुष्‍प, ऋतु फल(मौसम के अनुसार फल) और तुलसी के पत्ते चढ़ाए. भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है. भगवान विष्णु की आरती करें प्रणाम करें और भोग लगाए. विष्‍णु की पूजा करने के बाद पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें. आंवले के वृक्ष की पुजा करने से पहले साफ करके गाय के गोबर से पवित्र करें. पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें.

कलश में देवताओं, तीर्थों और सागर को आमंत्रित करें. कलश में पंचरत्न रखकर दीपक जलाएं कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप कर वस्त्र अर्पित करें. कलश के ऊपर विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित करके विधिवत पूजा करें. शाम के समय एक बार विष्‍णु जी की पूजा करें और फलाहार ग्रहण करें. रात्रि में भागवत कथा और भजन-कीर्तन करते हुए श्री हरि विष्‍णु का पूजन करें और अगले दिन यानी कि द्वादशी को सुबह ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्‍हें यथा शक्ति दान-दक्षिणा देकर विदा करें. इसके बाद आप स्‍वयं भी भोजन ग्रहण कर व्रत को खोल लेवे.

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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