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Corona Alert: खुद से ना बने डॉक्टर बिना डॉक्टरी सलाह के ऑक्सीजन लेना कर सकते है आपको और बीमार

New Delhi: कोरोना की दूसरी लहर में हर ओर हाहाकार मचा हुआ है. जैसे ही विशेषज्ञों की टीम कोरोना के लिए कोई दवा की मंजूरी देते हैं लोग कुछ भी सोचे समझे बिना उसे लेकर अपने परिजनों के लिए रख लेते हैं. कुछ ऐसा ही हाल ऑक्सीजन को लेकर भी है. देश में कई ऐसे पैसे वाले और रसूखदार लोग हैं जो ऑक्सीजन अपने घर पर एमरजेंसी के लिए रख रहे हैं. यहीं कारण है कि कई जरूरतमंदों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है. लेकिन कोरोना का इलाज कर रहे विशेषज्ञों की मानें तो अस्पतालों में आक्सीजन की किल्लत देखते हुए कुछ लोग घर पर ही बिना डाक्टर की सलाह के किसी तरह जुगाड़ कर आक्सीजन ले रहे हैं, लेकिन यह अभ्यास उन्हें ठीक करने की जगह और बीमार बना सकता है. भोपाल के गांधी मेडिकल कालेज के पलमोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष और कोरोना मामलों में मध्य प्रदेश सरकार के सलाहकार डा. लोकेंद्र दवे का कहना है कि कई लोगों को यह गलतफहमी है कि कोरोना संक्रमण होते ही आक्सीजन लेने से बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है. हकीकत में ऐसा नहीं है.

90 प्रतिशत से कम हो लेवल तब ही लें ऑक्सीजन

डा. लोकेंद्र दवे ने कहा कि  ऑक्सीजन तभी लेना चाहिए, जब आक्सीजन का स्तर 90 फीसद से नीचे आ गया हो.  जिन्हें पहले से फेफड़े की कोई तकलीफ है, उन्हें आक्सीजन का स्तर 92 फीसद होने पर भी आक्सीजन सपोर्ट दिया जाना चाहिए.  जरूरत से ज्यादा आक्सीजन लेने पर शरीर में आक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स बनते हैं. इस प्रक्रिया में शरीर की सामान्य कोशिकाएं ही ज्यादा आक्सीजन मिलने की वजह से खराब हो जाती हैं और फ्री रेडिकल्स बनकर पूरे शरीर में घूमते हैं. जिन-जिन अंगों में यह रेडिकल्स पहुंचते हैं, उन्हें नुकसान पहुंचता है. बिना जरूरत के ज्यादा दिन तक आक्सीजन सपोर्ट में रहने से सबसे ज्यादा नुकसान फेफड़े को होता है.उन्होंने कहा कि यदि जरूरत नहीं है और फिर भी आप आक्सीजन सपोर्ट पर हैं तो जितनी ज्यादा आक्सीजन लेंगे, उतनी ही यह दिक्कत होगी। 15 दिन से ज्यादा समय तक 10 लीटर प्रति मिनट या इससे ज्यादा आक्सीजन देने पर फेफड़े हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं. ज्यादा आक्सीजन के दुष्प्रभाव को आक्सीजन टाक्सीसिटी कहा जाता है.

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जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन लेने का पड़ता है गलत असर 

डा. लोकेंद्र दवे के अनुसार आक्सीजन की जरूरत मरीज में बदलती रहती है.  एक डाक्टर ही समझ सकता है कि कब किस मरीज को कितनी आक्सीजन की जरूरत है, इसलिए यदि कोई बिना डाक्टर की सलाह के आक्सीजन ले रहा है और तो यह खतरनाक हो सकता है.  मरीज को जरूरत के हिसाब से ही आक्सीजन सपोर्ट दिया जाना चाहिए. 90 फीसद से कम आक्सीजन होने पर एक से चार लीटर प्रति मिनट तक आक्सीजन दी जा सकती है.  नवजात बच्चों को ज्यादा आक्सीजन देने से उनकी आंखों की रक्त वाहिकाएं फटने लगती हैं.डा. लोकेंद्र दवे बताते हैं कि वेंटिलेटर सपोर्ट रखे गए मरीजों को 25 लीटर प्रति मिनट की रफ्तार से आक्सीजन देनी पड़ती है.

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