E-vehicle can cause current accident : ई-वाहन से करंट लगने का खतरा
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क्या ई-वाहन से करंट लगने का खतरा हो सकता है, जानें विशेषज्ञों की राय

E-vehicle can cause current accident

दिल्ली | एक तो देश में मंहगाई इतनी बढ़ रही है और फिर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम आसमां छू रहे है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के पैसे बचाने और वायु प्रदूषण से बचने के लिए आज इलेक्ट्रिक व्‍हीकल को उपयोग में लेने के लिए प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। यही कारण है कि कॉमर्शियल इस्‍तेमाल और सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्‍या सड़कों पर अब बढ़ रही है। वहीं लोग निजी इस्‍तेमाल के लिए भी इलेक्ट्रिक कार, इलेक्ट्रिक स्‍कूटर आदि दोपहिया वाहनों की ओर मुड़ रहे हैं। प्रदूषण से बचने के लिए आजकल लोग साइकिल पर वापस आ गये है। लोगों को मानना है कि इससे आपकी फिटनेस भी बनी रहेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। लेकिन सिक्के के दो पहलू होते है किसी चीज के फायदे है तो नुकसान भी होंगे ही। ऐसे ही ई-साइकिल को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे है कि ( E-vehicle can cause current accident) क्‍या ई-वाहन से इलेक्ट्रिक शॉक या करंट जैसी दुर्घटना हो सकती है

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सर्किट आधारित होता है

इस बारे में दो विशेषज्ञों से बात करने पर पता चला है कि सीएसआईआर- सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (CRRI) के सीनियर प्रिंसिपल वैज्ञानिक और प्रोफेसर एसीएसआईआर ट्रांस्‍पोर्टेशन प्‍लानिंग एंड एनवायरनमेंट डॉ. रविंद्र कुमार कहते हैं कि ई-वाहन में इलेक्ट्रिक शॉक या करंट लगने का कोई भा संकट नहीं है। अन्‍य ईंधन के वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक व्‍हीकल में कंपोनेंट काफी कम होते हैं। बैटरी से संचालित सिस्‍टम को भी ठीक से कवर करके रखा जाता है। यह सर्किट आधारित होता है। लिहाजा इसमें करंट का खतरा कम ही होता है।

सवारियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है

वहीं दिल्‍ली स्थित पॉलिसी रिसर्च इंस्‍टीट्यूट, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) में सीनियर प्रोग्राम लीड हिमानी जैन बताती हैं कि इलेक्ट्रिक व्हीकल ड्राइवर या सवारी को करंट लगने के खतरे से मुक्त है और यह ड्राइवर या सवारियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके अलावा अगर बैटरी बैकअप या पॉवर बैकअप मोड के सवाल पर हिमानी कहती हैं कि इसमें अभी पॅावर सेविंग मोड की सुविधा नहीं है लेकिन कई चीजें खास हैं।

वे कहती हैं कि इलेक्ट्रिक व्‍हीकल में आधुनिक फ्यूल इकॉनोमी मोड की संभावना है। यह ठी‍क उसी तरह है जैसे पेट्रोल या डीजल के वाहनों में होती है। इस तरह से से ईवी भी एनर्जी इफीशियंट मोड में संचालित हो रहे हैं। ईवी में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी (वाहन की रफ्तार घटाने की प्रक्रिया में बैटरी को चार्ज करने की व्यवस्था) लगा करके ब्रेक लगाने, रफ्तार बढ़ाने और घटाने जैसी कुछ स्थितियों, खास तौर पर शहरी परिस्थितियों में, ऊर्जा दक्षता बढ़ाई जाती है।

ईको ड्राइविंग से 11 से 50 फीसदी ईंधन की बचत ( E-vehicle can cause current accident)

डॉ. रविंद्र कुमार कहते हैं कि पॉवर या बैटरी सेविंग की बात है तो पेट्रोल-डीजल वाहनों की तरह ई-वाहनों में भी ईको ड्राइविंग या ग्रीन ड्राइविंग कारगर होती है। जैसे पेट्रोल या डीजल के वाहनों में ईको ड्राइविंग करने से 11 से 50 फीसदी तक की ईंधन की बचत की जा सकती है उसी तरह ईवी में इस ड्राइविंग पद्धति के माध्‍यम से बैटरी की बचत की जा सकती है। इसके अलावा जो खास बात है वह यह है कि इससे बैटरी की रेंज बढ़ती है और वह ज्‍यादा दिन तक चलती है. अभी सामान्‍य रूप से कोई बैटरी तीन से चार साल चलती है लेकिन ईको-ड्राइविंग से इसकी उम्र को 10 से 15 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। किसी भी वाहन के लिए ड्राइविंग पैटर्न बहुत मायने रखता है। इसे मैनेज करना बहुत जरूरी है। ( E-vehicle can cause current accident)

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