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आधी जनता को एक भी वैक्सीन नसीब नहीं और कुछ लोग कोविशील्ड और कोवैक्सीन का कॉकटेल ले रहे

Delhi | भारत में एक तरफ जहां कोरोना वायरस (Corona Virus India) के मामलों में गिरावट देखी जा रही है वहीं पर कोरोना की वैक्सीन की बर्बादी (West of Vaccine in India) हो रही है। एक तरफ जहां आधी जनता वैक्सीन (Shortage of Vaccine) के लिये तड़प रही है वहीं कुछ वैक्सीन का कॉकटेल ले रहे है। डॉक्टर्स के सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां लोग कोविशील्ड के दो डोज लेने के बाद कोवैक्सीन भी लगवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि लोग इसके लिए अलग-अलग फोन नंबर और आईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, एक्सपर्ट्स ने चिंता जाहिर की है कि दोनों वैक्सीन शरीर को मिलने पर क्या प्रतिक्रिया होगी, इस बात की जानकारी नहीं है। क्योकि अभी तक ऐसा कोई प्रयोग नहीं किये गए है जिससे यह पता लग जाए। लोग लालच में आकर वैक्सीन का कॉकटेल ले रहे है। भारत के अलावा भी ऐसे मामले देखने को मिल रहे है। लोग इसे बूस्टर डोज़ मान रहे है लेकिन अभी ऐसा कुछ नहीं है।

यह शुद्ध लालच है..

कर्नाटक के कोविड टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य और सीनियर वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर वी रवि का कहना है कि यह शुद्ध लालच है। इस प्रकार का लालच सही नहीं है।उन्होंने कहा कि इस तरह से वे वैक्सीन और दूसरे के कोविड से सुरक्षित होने के मौके छीन रहे हैं। यह एक बड़ी चूक है, लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह भी नहीं मालूम की जब दोनों वैक्सीन शरीर के अंदर मिल जाएंगी, तो क्या होगा। वैक्सीनेशन से शरीर में एंटीबॉडी बनती है। दोनों वैक्सीन लगाने से शरीर में कैसी एंटीबॉडी बनेगी इसका कुछ पता नहीं। PHANA के अध्यक्ष डॉक्टर प्रसन्ना कहते हैं कि ये हालात सीधे सिस्टम में गलती की ओर इशारा कर रही है। अगर सरकार केवल एक फोटो आईडी पर सहमति देती, तो यह परेशानी सामने नहीं आती, लेकिन सभी के पास केवल एक आईडी कार्ड नहीं होगा। इसलिए सरकार को इसे सुलझाना होगा। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसा करना जीन्स को प्रभावित कर सकता है।

अपने शरीर को कैमिकल लैब में नहीं बदलें

डॉक्टर प्रसन्ना ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है। वे इस काम को अपराध घोषित कराना चाहते हैं, क्योंकि लोग लोगों से स्वास्थ का अधिकार छीन रहे हैं। डॉक्टर इस बात पर सहमति जताते हैं कि इस बात का कोई सबूत नहीं कि ऐसा करने से इम्युनिटी ज्यादा बढ़ेगी या सुरक्षा दोगुनी हो जाएगी। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि लोगों को अपने शरीर को कैमिकल लैब में नहीं बदलना चाहिए। भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में वैक्सीन मिक्स होने के मामले सामने आए हैं। दुर्भाग्य से लोग इसे बूस्टर डोज की तरह मान रहे हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी साबित नहीं हुआ है। डॉक्टर्स इस बात पर जोर देते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों जल्द वैक्सीन लगाई जानी चाहिए और इस काम में आ रही रुकावटों को जल्द दूर किया जाना चाहिए।

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