अंग्रेजों के समय की मोटरसाइकिल का दिया बुलेट का रूप

कुशीनगर। शौक और पुरखों की निशानी को बचाने की कोशिश में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक व्यक्ति से अंग्रेजों के जमाने की मोटरसाइकिल को नये लुक में ढाल दिया है।  कुशीनगर के दुदही के रहने वाले राजकुमार उर्फ डॉ. राजकिशोर ने अंग्रेजी फौज की मोटरसाइकिल को न सिर्फ आकर्षण का केंद्र बनाया है, बल्कि अपने पास से सवा लाख रुपये लगाकर बुलेट को नया रूप दिया है।

इसे देखने के लिये बड़ी संख्या में लोग देखने आ रहे हैं। पारिवारिक सूत्रों ने सोमवार को यहां बताया कि अंग्रेजी फौज के इंग्लैंड वापस लौटते समय खरीदी गई 349 सीसी की मैचलेस जी-तीन मोटरसाइकिन अब चुनिंदा लोगों के ही पास ही है। इस मोटरसाइकिन इंग्लैंड की मैचलेस कंपनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फौज के जवानों के लिए निर्मित किया था।

इसे भी पढ़ें :- जबलपुर में थ्री-डी तकनीक से बनाया गया बच्चे का मलद्वार

देवरिया निवासी श्याम बिहारी त्रिपाठी और दुदही के रामचंद्र गुप्ता महराजगंज के आनंदनगर में व्यवसाय करते थे। आनंदनगर में ही देवरिया के श्याम बिहारी ने इस मोटरसाइकिल को वर्ष 1947 में जार्ज नामक एक फौजी से 400 रुपये में खरीदा था। इसके बाद वह भारत छोड़ कर इंग्लैंड चला गया था। वर्ष 1958 में रामचंद्र गुप्ता ने श्याम बिहारी त्रिपाठी से उतने ही रुपये में यह मोटरसाइकिल खरीद ली और तब से लेकर 1975 तक वह इसका उपयोग करते रहे। 1975 में मोटरसाइकिल की सरेंडर वैल्यू खत्म होने के बाद रामचंद्र गुप्ता के घर में वर्ष 2017 तक मोटरसाइकिल बेकार पड़ी रही।

श्री रामचंद्र गुप्ता के नाती डॉ. राजकिशोर ने मोटरसाइकिन को बनवाने की सोची और इसके बारे में पता करना शुरू किया। पिता से मिली जानकारी तथा घर में रखे कागजातों के आधार पर डॉ. राजकिशोर लखनऊ आरटीओ में पड़ताल कराने पहुंचे तो वहां रिकॉर्ड में मिल गये। वर्ष 2017 में उन्होंने इसको बनवाने की ठानी और काफी खोजबीन कर लखनऊ के एक मैकेनिक को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी। दो साल में मोटरसाइकिल बनकर तैयार हुई।

डॉ. राजकिशोर के मुताबिक अंग्रेजी फौज की मोटरसाइकिन को नया रूप देने में करीब सवा लाख रुपये खर्च हो गये। मोटरसाइकिल का पुराना नंबर भी लखनऊ आरटीओ ऑफिस ने डॉ. राजकिशोर के नाम से उनके लखनऊ आवास के पते पर जारी किया है। डॉ. राजकिशोर के साथ ही उनके पिता डॉ. प्रेम नारायण गुप्ता समेत पूरे परिवार के सदस्य पुरखों की इस निशानी को नए रूप में पाकर काफी आह्लादित हैं। दुदही बाजार के लोग हर दिन इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares