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नींद में चलना या पैरासोमनिया

अच्छी सेहत के लिये गहरी नींद (डीप स्लीप) जरूरी है। गहरी नींद न आने से व्यक्ति की मानसिक सेहत बिगड़ती है और उसके व्यवहार तथा व्यक्तित्व पर इसका असर नजर आने लगता है। पैरासोमनिया, नींद से सम्बन्धी एक ऐसा ही विकार है जिसमें व्यक्ति गहरी नींद न ले पाने से सोते हुए अजीबोगरीब व्यवहार करने लगता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसा स्ट्रेस और एंजॉयटी से होता है और आजकल कोविड-19 (कोरोना) के कारण स्ट्रेस और एंजॉयटी बढ़ने से इसके मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसलिये यह जरूरी है कि पाठकों को इसके बारे में सही न सटीक जानकारी दी जाये जिससे वे इस कठिन कोरोना काल में अपने मानसिक स्वास्थ्य को बिगड़ने से बचा सकें।

स्लीप (नींद) साइकल
नींद से जुड़ी बीमारियों का अध्ययन करने वाले वर्ल्ड स्लीप फाउंडेशन के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम 7 से 9 घंटे सोना चाहिये। व्यक्ति की नींद के दो साइकल होते हैं- एनआरईएम (नॉन रैपिड आई मूवमेंट) और आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट)। नींद या स्लीप का 75 प्रतिशत समय नॉन रैपिड आई मूवमेंट साइकल में आता है और इसके चार चरण (स्टेज) हैं-

स्टेज-1:इसमें व्यक्ति सोने के लिये बिस्तर पर लेटता है और यह जागने तथा सोने के बीच की (उनींदी) अवस्था है।
स्टेज-2: इसमें व्यक्ति सो जाता है और वह चारों ओर के माहौल से अनजान होता है। इसमें शरीर का तापमान कम होता है और सांस तथा दिल की धड़कन धीमी होकर एक प्राकृतिक लय (रिद्म) में (नेचुरल रिद्म) आ जाती है।
स्टेज 3-4:इन स्टेजों में व्यक्ति गहरी नींद (डीप स्लीप) में होता है और उसकी सांस धीमी तथा ब्लड प्रेशर कम होने से मांसपेशियां पूरी तरह से रिलेक्स (शिथिल या ढीली) हो जाती हैं। नींद के इन चरणों के दौरान मांसपेशियों में रक्त प्रवाह बढ़ने से ग्रोथ हारमोन्स (सोमेटोट्रापिन) रिलीज होता है जिससे शरीर के टिश्यू अपने आपको रिपेयर करने लगते हैं।
आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट): रात का पहला आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट) चक्र सोने के लगभग 90 मिनट बाद शुरू होता है और हर 90 मिनट में इसकी पुनरावृत्ति होती है। इसमें व्यक्ति की आंखें, पलकों के पीछे तेजी से घूमती हैं और दिमाग की नसें जागृत अवस्था की तरह सक्रिय हो जाती हैं। इस चक्र में श्वास, हृदय गति और ब्लड प्रेशर, जागने वाले स्तर तक बढ़ता है। आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट) नींद, जिसे स्टेज 5 कहा जाता है में सपने देखने की सबसे अधिक संभावना होती है। आरईएम नींद, शरीर और मस्तिष्क को सक्रिय करती है जिससे व्यक्ति दिन में सतर्क और केंद्रित महसूस करता है। रैपिड आई मूवमेंट साइकल में व्यक्ति के हाथ-पैर अस्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो जाते हैं, जिससे उसे शारीरिक रूप से अपने सपनों को पूरा करने से रोका जा सके।
पैरासोमनिया पीड़ित व्यक्ति, डीप स्लीप (गहरी नींद) न आने से नींद में चलने, बड़बड़ाने, डरने और रोने-चिल्लाने जैसी असामान्य हरकतें करता है और जागने पर उसे कुछ भी याद नहीं रहता। ऐसे व्यक्ति के लिये आराम से सोना मुश्किल होता है और ये अपने आसपास सो रहे लोगों की नींद डिस्टर्ब करने के साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। विशेष रूप से उस समय जब आस-पास सो रहे लोग इस बात से अन्जान हों कि उनके पास सोया व्यक्ति पैरासोमनिया से पीड़ित है। आज पैरासोमनिया का इलाज है और सही इलाज से व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

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