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चोरी की आदत भी मानसिक बीमारी!

क्लेप्टोमेनिया पीड़ितों को चोरी करने से खुशी मिलती है, इनकी तुलना उन डॉयबिटिक लोगों से कर सकते हैं जिन्हें पता है कि मीठा खाने से ब्लड शुगर बढ़ेगी फिर भी वे चोरी-छिपे मीठा खाते हैं क्योंकि उनमें मीठा खाने की हुड़क (क्रेविंग) उठती है जिसे वे कंट्रोल नहीं कर पाते।  क्लेप्टोमेनियक कहीं भी (दुकान, डिपार्टमेंटल स्टोर, घर, पार्टी) चोरी कर सकते हैं, चीजें देखते ही उनमें चोरी की हुड़क उठती है और वे इसी हुड़क को मिटाने के लिये चोरी करते हैं। क्लेप्टोमेनियक आत्मग्लानि और शर्मिन्दगी भरा जीवन जीते हैं। इसका इलाज बिना किसी दवा के टॉक थेरेपी से होता है।  

मनोविज्ञान के अनुसार मजबूरी में चोरी करना नेचुरल है लेकिन बिना मजबूरी आदतन चोरी करने का मतलब है क्लेप्टोमेनियक होना यानी एक गम्भीर मानसिक रोग क्लेप्टोमेनिया से ग्रस्त। इन्हें चोरी का व्यसन होता है, ये कुछ भी चुरा लेते हैं जरूरी नहीं कि वह कीमती हो। हमारे देश में हर साल इसके दस लाख से ज्यादा मामले सामने आते हैं। शोध से सामने आया है कि पुरूषों के मुकाबले महिलायें इससे ज्यादा पीड़ित हैं, क्लेप्टोमेनिया के कुल मरीजों में इनकी संख्या दो-तिहाई है।  क्लेप्टोमेनिया पीड़ितों को चोरी करने से खुशी मिलती है, इनकी तुलना उन डॉयबिटिक लोगों से कर सकते हैं जिन्हें पता है कि मीठा खाने से ब्लड शुगर बढ़ेगी फिर भी वे चोरी-छिपे मीठा खाते हैं क्योंकि उनमें मीठा खाने की हुड़क (क्रेविंग) उठती है जिसे वे कंट्रोल नहीं कर पाते।

क्लेप्टोमेनियक कहीं भी (दुकान, डिपार्टमेंटल स्टोर, घर, पार्टी) चोरी कर सकते हैं, चीजें देखते ही उनमें चोरी की हुड़क उठती है और वे इसी हुड़क को मिटाने के लिये चोरी करते हैं। चोरी के लिये ये मान-सम्मान-प्रठिष्ठा किसी की परवाह नहीं करते। ऐसा एक वाकया मेरे सामने हुआ, कई वर्ष पहले मैं एक प्रकाशक मित्र के साथ योरोप ट्रिप पर गया, उनके साथ पूरा परिवार था जिसमें उनकी 70 वर्षीय मां भी थीं। उन्होंने लंदन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर से कुछ सामान चोरी करके अपने हैंड बैग में रख लिया और जब बिना बिल दिये निकलने लगीं तो पकड़ी गयीं जबकि उस समय उनके हैंड बैग में करीब 2 हजार पौंड थे। आप अनुमान लगा सकते हैं कि परिवार के लिये यह कितनी शर्मिंदगी की बात रही होगी। ट्रिप से लौटने के बाद उन्होंने मनोचिकित्सक से उनकी जांच करायी तो पता चला कि वे क्लिप्टोमेनियक हैं।

मनोविज्ञानी इसे रेयर लेकिन गम्भीर मानसिक रोग मानते हैं इसमें भावनात्मक/ व्यवहारिक आत्म-नियंत्रण समाप्त होने से व्यक्ति चोरी की आदत का विरोध नहीं कर पाता। व्यवहारिक आत्म-नियन्त्रण खोने से वह जब तक आवेगी व्यवहार पूरा न कर ले उसे शान्ति नहीं मिलती। क्लेप्टोमेनिया का समय पर इलाज न हो तो पीड़ित और उसके परिजनों को बहुत भावनात्मक दर्द सहना पड़ता है। क्लेप्टोमेनियक आत्मग्लानि और शर्मिन्दगी भरा जीवन जीते हैं क्योंकि वे न तो इसके बारे में किसी को बता पाते हैं और न ही इलाज करा पाते हैं। याद रखें कि इसका इलाज बिना किसी दवा के टॉक थेरेपी से होता है और मनोचिकित्सक कुछ सिटिंग में यह आदत छुड़ा देते हैं।

लक्षण क्या उभरते हैं?

क्लेप्टोमेनियक ऐसी वस्तुओं की चोरी कर लेते हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती। प्रलोभित होने पर वे टेंशन, एंग्जॉयटी और उत्तेजना महसूस करते हैं, आवेगी व्यवहार पूरा करने के लिये सबसे अलग होकर या लोगों का ध्यान भटकाकर सामान चुरा लेते हैं। जब तक चोरी न कर लें टेंशन और उत्तेजना में रहते हैं। इच्छा पूरी होने के बाद ही उन्हें संतुष्टि या खुशी मिलती है। चोरी के बाद इन्हें अपराधबोध, पछतावा, आत्म-ग्लानि, शर्म और गिरफ्तारी का डर महसूस होता है।

आम चोरों से अलग कैसे?

मनोचिकित्सकों के मुताबिक आम चोरों और क्लेप्टोमेनियक में यह फर्क है-

  1. मानसिक रूप से स्वस्थ आदमी व्यक्तिगत लाभ, साहस दिखाने, विद्रोह जताने या बदला लेने के लिये चोरी करता है और जरूरी नहीं कि वह हमेशा चोरी करे। जबकि क्लेप्टोमेनियक को चोरी से कोई लाभ नहीं होता, दिमाग में चोरी की हुड़क उठने पर वह इसका विरोध नहीं कर पाता इसलिये चोरी करता है।
  2. आम या प्रोफेशनल चोर प्लान बनाकर अकेले या किसी के सहयोग से चोरी करता है, जबकि क्लेप्टोमेनियक बिना किसी योजना और बिना मदद के अकेले चोरी करता है।
  3. क्लेप्टोमेनियक ज्यादातर सार्वजनिक स्थानों, दुकानों, सुपरमार्केटों, शादी-ब्याह या पार्टियों में चोरी करते हैं। अक्सर, चोरी की गई वस्तुओं का इनके लिए कोई मूल्य नहीं होता क्योंकि वह उन्हें आसानी से खरीद सकता है। ये चोरी की गई वस्तुएं अपने से दूर रखते हैं और कभी इस्तेमाल नहीं करतेवे इन्हें  दान या दोस्तों को भेंट में दे देते हैं या वापस वहीं रख आते हैं जहां से चुराया था।
  4. इनमें चोरी का आग्रह या भावना समय के साथ कम-ज्यादा होती है। यह एक तरह का एपीसोड होता है जो लगातार कई महीने रह सकता है या कुछ महीने बिलकुल नहीं।

क्यों होते हैं लोग क्लेप्टोमेनियक?

क्लेप्टोमेनिया का पक्का कारण ज्ञात नहीं है। कई सिद्धांत बताते हैं कि मस्तिष्क में हुए रासायनिक  परिवर्तन क्लेप्टोमेनिया की जड़ में हैं। इसके संभावित कारणों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अभी शोध जारी है। मनोचिकित्सकों के अनुसार क्लेप्टोमेनिया के ये कारण हो सकते हैं-

  1. मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक रसायन कम बनने से व्यक्ति क्लेप्टोमेनियक हो जाता है क्योंकि सेरोटोनिन मूड और भावनायें नियन्त्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर की भांति काम करता है। शोध के अनुसार आवेगी व्यवहार वाले लोगों में सेरोटोनिन स्तर कम होना आम बात है।
  2. क्लेप्टोमेनियक को चोरी के बाद मिली खुशी (संतुष्टि) के कारण दिमाग में डोपामाइन हारमोन का स्राव बढ़ने से उसे पुरस्कृत होने की फीलिंग आती है और बार-बार इसी सुखद भावना की चाह उसे  चोरी के लिये उकसाती है।
  3. मस्तिष्क की ओपिओइड प्रणाली असंतुलित होने से व्यक्ति क्लेप्टोमेनियक हो जाता है क्योंकि यही प्रणाली वह दिमागी आग्रह नियन्त्रित करती है जिससे व्यक्ति समझता है कि उसे क्या करना है और क्या नहीं।

मनोचिकित्सक की जरूरत कब?

क्लेप्टोमेनिया पीड़ित यदि चोरी करना (शॉपलिफ्टिंग) चाहकर बंद न कर पाये तो मनोचिकित्सक की जरूरत पड़ती है। ज्यादातर क्लेप्टोमेनियक इलाज नहीं कराना चाहते क्योंकि उन्हें जेल जाने, गिरफ्तारी या कानूनी पचड़े में फसने का डर होता है। याद रखें कि अच्छा मनोचिकित्सक अपने मरीज की पर्सनल सूचनायें किसी को नहीं देता क्योंकि यह उसके इलाज के इथिक्स में शामिल है।

क्या करें जब प्रियजन क्लेप्टोमेनियक हो?

यदि किसी करीबी दोस्त या परिवार के सदस्य पर क्लेप्टोमेनियक होने का संदेह है, तो आवेश या गुस्से में आये बिना धीरे से उसे अपनी चिंताओं से अवगत करायें। ध्यान रखें कि क्लेप्टोमेनिया एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, चरित्र दोष नहीं, इसलिए अपने प्रियजन पर बिना कोई दोष या आरोप लगाये सहजता से इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए बात करें कि-

आप उसके लिये चिंतित हैं और उसका भला चाहते हैं।

आप उसके द्वारा की गयी चोरी के परिणामों के बारे में चिंतित हैं, जैसे गिरफ्तारी, नौकरी खोना या किसी मूल्यवान रिश्ते को नुकसान पहुंचाना।

आप समझते हैं कि, क्लेप्टोमेनिया मानसिक बीमारी है, चरित्र दोष नहीं और पीड़ित ने बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के चोरी की है।

उसे बतायें कि वर्तमान में इसका उपचार उपलब्ध है जिससे उसका चोरी का व्यसन छूट सकता है  और वह समाज में शर्मिन्दगी उठाये बिना जी सकता है।

अगर आप क्लेप्टोमेनिया के बारे में और जानकारी चाहते हैं तो पीड़ित से बात करने से पहले मनोचिकित्सक से बात करें कि पीड़ित को इलाज के लिये कैसे तैयार किया जाये। डॉक्टर से अनुरोध करें कि वह एक अनुभवी मेन्टल हेल्थ प्रोफेशनल को पीड़ित के पास भेजे जो उसे रक्षात्मक किये बिना इलाज के लिये प्रेरित करे।

किन्हें ज्यादा रिस्क क्लिप्टोमेनियक होने का?

क्लेप्टोमेनिया, किशोरावस्था के दौरान या युवा वयस्कता में शुरू होता है। एक शोध के मुताबिक इन लोगों को क्लेप्टोमेनियक होने का रिस्क अधिक होता है-

  1. ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्आर्डर (ओसीडी) से पीड़ितएल्कोहलिक या मादक द्रव्यों का सेवन करने वालों या जिनकी फैमिली हिस्ट्री में कोई क्लेप्टोमेनियक रहा है उन्हें इसका रिस्क रहता है। 
  2. पहले से किसी मानसिक बीमारी जैसे बाइपोलर डिस्आर्डर, ईटिंग डिस्आर्डर, पर्सनाल्टी डिस्आर्डर या सब्सटेंस यूज डिस्आर्डर (नशेड़ी) से ग्रस्त होने पर क्लेप्टोमेनिया के चांस बढ़ जाते हैं।

कॉम्प्लीकेशन क्या-क्या?

इलाज न कराने से यह रोग गम्भीर भावनात्मक समस्या बन जाता है, इससे पीड़ित सामाजिक, कानूनी या वित्तीय समस्याओं से घिर जाते हैंनौकरियां छूट जाती हैं और समाज में निंदनीय हो जाते हैं। खुद को अपराधबोध ग्रस्त, शर्मिंदा और अपमानित महसूस करते हैं। इन्हें डर रहता है कि ये कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं। इन सब कारणों से ये ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्आर्डर, एंग्जॉयटी, ईटिंग डिस्आर्डर, बाइपोलर डिस्आर्डर का शिकार हो जाते हैं। कुछ नशीले पदार्थों का सेवन करने लगते हैं और अंतिम परिणाम डिप्रेशन या आत्महत्या के रूप में सामने आता है।

क्लेप्टोमेनिया और जीवन

क्लेप्टोमेनिया मानसिक बीमारी है चरित्र दोष नहीं, इसलिये इलाज के लिये झिझके नहीं, डॉक्टर से खुलकर बात करें और जल्द से जल्द इलाज शुरू करें। इलाज में देरी से हालात और बदतर होते जायेंगे। यदि कोई प्रियजन इस रोग से ग्रस्त है तो उसका मजाक न उड़ायें, उसकी समस्या समझते हुए इलाज के लिये प्रेरित करें। उसके अंदर से यह डर निकालने का प्रयास करें कि मनोचिकित्सक उसके बारे में किसी को नहीं बतायेगा और कुछ सिटिंग में ही उसे इस रोग से मुक्ति दिला देगा।

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