चैत्र नवरात्र 2021 : मां दुर्गा का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री, जानें पूजन विधि और मां की सिद्धियां.. - Naya India
लाइफ स्टाइल | धर्म कर्म| नया इंडिया|

चैत्र नवरात्र 2021 : मां दुर्गा का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री, जानें पूजन विधि और मां की सिद्धियां..

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां की आराधना करने से व्यक्ति जिनकी आराधना से व्यक्ति को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। साथ ही बुरे कर्मों से लड़ने की शक्ति भी प्राप्त होती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की अगर सच्चे मन से पूजा-अर्चना की जाए तो व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। इस दिन कन्या पूजन का भी विधान है। चैत्र नवरात्र राम नवमी के साथ पूर्ण हो जाते है।

इसे भी पढ़ें रामनवमी 2021: 21 अप्रेल को है रामनवमी, जानें पूजा विधि, मुहुर्त ….

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि | सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||

सबसे पहले मां की तस्वीर या मूर्ति रखें। फिर मां की आरती और हवन करना चाहिए। इस दिन भक्त सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां भगवती की उपासना करते है। भक्तों को नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में नवमी के दिन विशेष हवन किया जाता है। हवन से पहले सभी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। हवन के समय सभी देवी-देवताओं की आहुति देनी चाहिए। बाद में माताजी के नाम से आहुति देनी चाहिए। भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा करें फिर मां की अराधना करें। मां को प्रसाद चढ़ाएं। सभी लोगों को प्रसाद भी बांटें। देवी के बीज मंत्र ऊं हीं क्लीं चामुंडाय विच्चे नमो नमः से कम से कम 108 बार आहुति दे।

मां की सिद्धियां

मार्केण्डय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है। माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है।

प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह माँ सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करे। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

पूजा का महत्व

नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। सिद्धिदात्री माँ के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से माँ भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। माँ भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती। माँ के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए भक्त को निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करने का नियम कहा गया है।

इसे भी पढ़ें  चैत्र नवरात्र 2021 : जानें मां दुर्गा की आठवीं शक्ति कैसे कहलाईं गौरी, महागौरी के साथ सिंह ने भी की कठोर तपस्या

Latest News

चीन को जवाब कैसे?
राष्ट्रीय अखंडता और सुरक्षा के मुद्दे पर अतीत में कभी ऐसा हाल हुआ होगा, यह याद करना किसी के लिए मुश्किल है।…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});