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Chaitra Navratri 2021 : माता का अनोखा मंदिर जहां प्रसाद नहीं, चढ़ाई जाती हैं हथकड़ी और बेड़ियां

प्रतापगढ़। भारत की भूमि पर अनेक चमत्कारिक और अनोखे मंदिर हैं। जिनमें लोग अक्सर भगवान को प्रसन्न करने के लिए फल-फूल और प्रसाद चढ़ाते हैं। लेकिन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में माता का एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त फल-फूल और प्रसाद नहीं, बल्कि माता को हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं।

प्रतापगढ़ के ग्राम जोलर में दिवाक माता (Divak Mata Temple) का यह प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के परिसर में एक त्रिशुल गढ़ा है। जिसमें श्रद्धालु हथकड़ियां चढ़ाते हैं। माता का यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। अतः यहां पहुंचने के लिए भक्तों को छोटी-बड़ी पहाड़ियां पार करनी होती है। माता इस मंदिर से लोगों की इतनी श्रद्धा जुड़ी हुई है कि यहां के जंगलों से एक भी पेड़ नहीं काटा जाता है। यहां कई जगह से लोग माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।

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जेल से मुक्ती के लिए चढ़ाते हैं हथकड़ियां
मंदिर में बेड़िया और हथकड़िया चढ़ाने के बारे में यहां के लोगों का मानना है कि माता के नाम से यहां पर बेड़िया और हथकड़ियां चढ़ाने पर वो अपने आप ही खुल जाती हैं। एक समय था, जब यहां मालवा क्षेत्र के जंगलों में डाकुओं का राज हुआ करता था। डाकू इस मंदिर में दर्शन के लिए आते थे और माता से मन्नत मांगते थे कि यदि वे पुलिस से बच जाएंगे तो वे मंदिर में आकर प्रसाद के रुप में हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाएंगे। तभी से यहां कई लोग आते हैं जो अपने परिजनों को जेल से छुड़वाने की मन्नत मांग हथकड़ी चढ़ाते हैं।

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माता के स्मरण से ही टूट गई डाकू की बेड़ियां
लोगों के अनुसार, एक समय एक नामी डाकू पृथ्वीराणा ने जेल में दिवाक माता की मन्नत ली थी कि अगर वह जेल तोड़कर भागने में सफल रहा, तो वह सीधा यहां दर्शन करने के लिए आएगा और दिवाक माता के स्मरण मात्र से ही उसकी बेडियां टूट गई और वह जेल से भाग निकला था। तब से यह परंपरा चली आ रही है। आज भी अपने किसी रिश्तेदार या परिचित को जेल से मुक्त कराने के लिए परिजन यहां हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं।

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