• डाउनलोड ऐप
Saturday, April 10, 2021
No menu items!
spot_img

चैत्र नवरात्र 2021 : जानें, क्यों है चैत्र नवरात्री का इतना महत्व, कहां कैसी होती है मां की पूजा

Must Read

भारतीय कैलेंडर के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्री का त्योहार चार बार आते हैं. इसमें चैत्र ,शारदीय नवरात्री और दो गुप्त नवरात्री आते हैं. जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्री प्रमुख होते हैं. इस बार के चैत्र के नवरात्रे 13 अप्रैल से शुरू होकर 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे हैं. चैत्र के नवरात्रों के शुरुआती दिन को भारतीय नववर्ष कहा जाता है और अंतिम दिन को रामनवमी के नाम से जाना जाता है. इन नवरात्रों को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है.  भक्त नवरात्री में शक्ति की उपासना करते हैं. कहा जाता है कि इस 9 दिनों में  सच्चे मन से  देवी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

नवरात्रि का लोगों को बेसब्री से इतंजार रहता है. देवी दुर्गा की मुर्तियों को कुमकुम, चुड़ियों, वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है. बंगाल में नवरात्रि की विशेष रौनक होती है.  हालांकि दूसरी नवरात्री के समय यहां पंडालों के कारण ज्यादी रौनक होती है.  शारदीय नवरात्रों में बंगाल में बनने वाले  पंडाल देशभर में आकर्षण का केंद्र होते हैं. ऐसा कहते हैं बंगाल के लोग इन 9 दिनों में  रात को सोते नहीं हैं. इन 9 दिनो में श्रद्धालुओं को एक अलग ही तेज और शक्ति का एहसास होता है.

इसे भी पढ़ें Damoh by-election : कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल उम्मीदवार राहुल लोधी खिलाफ लोगों में नाराजगी, भाजपा संकट में

कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 13 अप्रैल को कलश स्थापना की जाएगी. नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना शुभ फलकारी माना गया है. 13 अप्रैल मंगलवार के दिन सुबह 05 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक घटस्थापना का मुहर्त शुभ माना गया है.

पूजन विधान

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े पहने. मंदिर की साफ-सफाई कर सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं. इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें.  इस पर अखंड ज्योत का दीपक रखें. एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें.  जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर मोली बांधें.  कलश में साबुत सुपारी, सिक्का, अक्षत डालकर अशोक के पत्तों से कलश के चारों तरफ बांध दें. एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर मोली से बांधें.  इस नारियल को कलश के ऊपर रख दें.  फिर देवी दुर्गा की मुर्ति या फोटो को स्थापित करें.  एक तरफ राम दरबार की फोटो और दूसरी तरफ बालाजी की तस्वीर को स्थापित करें. इसके बाद देवी दुर्गा का आवाहन करें. इसके बाद दीप आदि जलाकर कलश की पूजा करें.  नवरात्रि में देवी की पूजा के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश स्थापित किया जाता है.  9 दिन तक देवी को अलग-अलग तरह के प्रसाद का भोग लगायें.

इसे भी पढ़ें नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने से शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स में 460 अंकों की बढ़त

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की तिथि

13 अप्रैल 2021: नवरात्रि का पहला दिन, प्रतिपदा, कलश स्‍थापना और शैलपुत्री पूजन.

14 अप्रैल 2021: नवरात्रि का दूसरा दिन, द्व‍ितीया, बह्मचारिणी पूजन.

15 अप्रैल 2021:  नवरात्रि का तीसरा दिन, तृतीया, चंद्रघंटा पूजन.

16 अप्रैल 2021: नवरात्रि का चौथा दिन, चतुर्थी, कुष्‍मांडा पूजन.

17 अप्रैल 2021: नवरात्रि का पांचवां दिन, पंचमी, स्‍कंदमाता पूजन.

18 अप्रैल 2021: नवरात्रि का छठा दिन, षष्‍ठी, सरस्‍वती पूजन, कात्‍यायनी पूजन.

19 अप्रैल 2021: नवरात्रि का सातवां दिन, सप्‍तमी, कालरात्रि पूजन.

20 अप्रैल 2021: नवरात्रि का आठवां दिन, अष्‍टमी, महागौरी पूजन, कन्‍या पूजन.

21 अप्रैल 2021: नवरात्रि का नौवां दिन, राम नवमी, सिद्धिदात्री पूजन, कन्‍या पूजन, नवमी हवन, नवरात्रि पारण

अंतिम दिन को रामनवमी क्यों कहा जाता है

उतर-भारत में नवरात्री का त्योहार बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. नौ दिन तक मां दुर्गा के 9 रूपों की पुजा-अर्चना की जाती है. पहले दिन घटस्थापना की जाती है. इसी के साथ नौ दिन तक श्रद्धालु फलाहार पर वर्त करते हैं और अंतिम दिन यानी रामनवमी के दिन छोटी-छोटी नौ कन्याओं की पुजा कर उन्हें खाना खिलाया जाता है. कन्याओं को खाना खिलाकर ही व्रत खोला जाता है. अंतिम दिन को रामनवमी इसलिए कहते है क्योंकि मान्यता क्योंकि इस  दिन भगवान श्री राम का जन्म हुआ था. कई घरों और मंदिरों में रामायण का पाठ किया जाता है. भगवान श्री राम की पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही भजन-कीर्तन कर आरती की जाती है और भक्‍तों में प्रसाद बांटा जाता है.

नवरात्री व्रत के नियम

-नवरात्रि के पहले दिन कलश स्‍थापना कर 9 दिनों तक व्रत रखने का संकल्‍प लें.

– पूरी श्रद्धा भक्ति से मां की पूजा करें.

– दिन के समय आप फल और दूध ले सकते हैं.

– शाम के समय मां की आरती उतारें.

– सभी में प्रसाद बांटें और फिर खुद भी ग्रहण करें.

– फिर भोजन ग्रहण करें.

– हो सके तो इस दौरान अन्‍न न खाएं, सिर्फ फलाहार ग्रहण करें.

– अष्‍टमी या नवमी के दिन नौ कन्‍याओं को भोजन कराएं. उन्‍हें उपहार और दक्षिणा दें.

– अगर संभव हो तो हवन के साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें.

इसे भी पढ़ें अजब-गजब: होने वाली बहू निकली खोयी हुई बेटी,  जानकारी के बाद भी मां ने शादी की दी अनुमति

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

देवी के मंदिर दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी डीसीएम खाई में गिरी, 11 की मौत, 41 घायल

कानपुर। यूपी के इटावा में शनिवार को एक बड़ा दर्दनाक हादसा (Road accident in Etawah) हो गया। आज अचानक...

More Articles Like This