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शिव की एक ऐसी शक्ति जिन्हें लगाया जाता झूठन का भोग..लेकिन क्यों

नवरात्रे साल में चार बार आते है जिसमें से शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र होते है। जिस तरह चैत्र और शारदयी नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, उसी तरह गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा अर्चना की जाती है। मां दुर्गा की इन्हीं 10 महाविद्याओं में से एक हैं देवी मातंगी। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मतंग भगवान शिव का नाम है और उनकी शक्ति मातंगी हैं। इस तरह से देवी मातंगी माता पार्वती का ही एक रूप हैं। मातंगी देवी को प्रकृति की देवी, वाणी और कला संगीत की देवी भी कहा जाता है। एक कथा के अनुसार देवी मातंगी को झूठन का भोग लगाया जाता है। हम सभी लोग कुछ भी खाने से पहले भगवान को भोग लगाते है और उस भोग को खाकर मन प्रसन्न होता है। लेकिन देवी मातंगी को खाने की झूठन का भोग लगाया जाता है इसके पीछे भी एक कारण है आइये जानते है..

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देवी मातंगी का कैसा है रूप?

पौराणिक कथाओं के अनुसार मां दुर्गा के आशीर्वाद से ऋषि मतंग के घर कन्या के रूप में जन्म लेने की वजह से इनका नाम मातंगी पड़ा। देवी मातंगी के रूप की बात करें तो उनका रंग गहरा नीला है। अपने मस्तक पर इन्होंने अर्ध चन्द्र धारण कर रखा और मां के 3 ओजपूर्ण नेत्र हैं। माता रत्नों से जड़े सिंहासन पर आसीन हैं। देवी मातंगी के एक हाथ में गुंजा के बीजों की माला है तो दाएं हाथों में वीणा और कपाल और बाएं हाथ में खड़ग। देवी मातंगी अभय मुद्रा में हैं।

मां मातंगी के लिए व्रत नहीं रखा जाता

ऐसी मान्यता है कि मातंगी देवी एक मात्र ऐसी देवी हैं जिनके लिए कोई व्रत नहीं रखा जाता है।यह देवी केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं। पवित्र मन से मां की पूजा करने से और मां को याद करने से ही ही मां मातंगी प्रसन्न हो जाती है। इतना ही नहीं ऐसी मान्यता है कि देवी मातंगी को जूठन का प्रसाद या भोग अर्पित किया जाता है।

जूठन के भोग से जुड़ी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी भगवान शिव और मां पार्वती से मिलने कैलाश पहुंचें। भगवान विष्णु अपने साथ कुछ खाने की सामग्री लेकर आए थे जिसे उन्होंने शिव जी को भेंट में दिया। भगवान शिव और मां पार्वती ने विष्णु जी से उपहार में मिले भोजन को खाया तो भोजन का कुछ हिस्सा धरती पर गिर गया। उन गिरे हुए भोजन से श्याम वर्ण वाली एक देवी ने जन्म लिया जो मातंगी देवी के नाम से विख्यात हुईं। यही वजह है कि मां मातंगी को जूठन का भोग लगाया जाता है।

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