सेक्स, गॉनरिया, कोरोना और सुपर गॉनरिया

इस 28 दिसम्बर 2020 को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि कोरोना (कोविड-19) महामारी में एंटीबॉयोटिक के बहुत ज्यादा प्रयोग से गॉनरिया संक्रमण ड्रग हावी याकि रजिस्टेंट होकर सुपर गॉनरिया में म्यूटेट है, इस वजह से अभी तक इसके इलाज में जो दवाएं प्रयोग की जा रही थी (जैसेकि एज़ीथ्रोमाइसिन और सेफट्रियाएक्सॉन) बेअसर हो गयी हैं। सुपर गॉनरिया के मामले कई देशों में रिपोर्ट हुए हैं इनमें फ्रांस, जापान, स्पेन, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द इसके लिये किसी नयी दवा नहीं खोजी गयी तो यह बीमारी तेजी से दुनिया भर में एड्स की तरह फैल जायेगी। इसकी हकीकत जानने के लिये जब वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन से एसोसियेट डाक्टर रशेल बॉक्वारेज से सम्पर्क किया तो उनसे यह जानकारी हासिल हुई-

क्या है गॉनरिया?

यौन संसर्ग से फैलने वाली (सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इन्फेक्शन अर्थात एसटीआई) यह संक्रामक बीमारी नसेरिया गॉनरिया नामक बैक्टिरिया से होती है। यह बैक्टीरिया शरीर के गर्म और नम हिस्सों जैसेकि यूरेथरा (ब्लेडर से यूरीन बाहर लाने वाली नलिका), योनि (वजाइना), गुदा (एनस), महिलाओं का रिप्रोडक्टिव ट्रैक (फेलोपियन ट्यूब्स, सरविक्स, ओवरी, यूट्रेस), गले और आंखों को टारगेट करता है। यह यौन संक्रमण बिना कंडोम (असुरक्षित सेक्स) के वजाइनल सेक्स, एनल सेक्स और ओरल सेक्स से  फैलता है। इसे हिंदी में प्रमेह (सुजाक) कहते हैं। यह पुरूष और महिलायों दोनों को ही अपना शिकार बनाता है। हमारे देश में प्रति वर्ष इसके एक करोड़ से ज्यादा मामले दर्ज होते हैं। यह बीमारी समय पर इलाज से कुछ कुछ सप्ताह में ठीक हो जाती है लेकिन इलाज न कराने से महिलाओं का रिप्रोडक्टिव सिस्टम और पुरूषों के जोड़ तथा यूरेथ्रा डैमेज होने से स्थिति गम्भीर हो जाती है। यदि गर्भवती महिला में यह संक्रमण है तो यह गर्भस्थ शिशु को भी संक्रमित कर देती है और जिससे उसकी आंखों, सिर तथा गले पर बुरा असर होता है।

क्या लक्षण हैं इसके?

संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने के 2 से 14 दिन के अंदर इसके लक्षण उभरते हैं-

पुरुषों में: संक्रमित होने के एक सप्ताह में इसका पहला लक्षण पेशाब करते समय दर्दयुक्त जलन के रूप में उभरता है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है कुछ और लक्षण नजर आते हैं जैसेकि- जल्दी-जल्दी यूरीनेशन, लिंग से पस की तरह सफेद, पीला, मटमैला और हल्के रंग का द्रव्य रिसना, लिंग के मुहाने पर सूजन और लालामी, टेस्टीकल्स (अंडकोष) में सूजन और दर्द व गले में लगातार खराश। यदि संक्रमण रेक्टम (गुदा) तक फैल जाये तो वहां भी तेज दर्द होता है। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि गॉनरिया से शरीर के कुछ भाग डैमेज हो गये जैसेकि यूरेथरा, टेस्टिकल्स और जोड़ (ज्वाइंट)।

महिलाओं में: संक्रमित होने के एक सप्ताह में इसका पहला लक्षण वजाइनल डिस्चार्ज के रूप में सामने आता है इसमें पानी जैसा, क्रीमी या हल्के हरे रंग का फ्लूड डिस्चार्ज होता है। कुछ दिन बीतने के बाद संक्रमण बढ़ने से यूरीनेशन में जलन के साथ दर्द, बार-बार यूरीनेशन, बहुत ज्यादा मात्रा में माहवारी, गले में खराश, सम्भोग करते समय दर्द, लोअर एब्डोमिन में तीव्र दर्द और बुखार होने लगता है।

नोट: कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं उभरते, इन्हें एसिम्टेमेटिक कैरियर कहते हैं और ये लक्षणों वाले संक्रमित व्यक्ति की तरह से इस बीमारी को एक से दूसरे में फैलाते हैं।

पुष्टि कैसे होती है?

इसकी पुष्टि के लिये यूरीन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और संक्रमण से उत्पन्न फ्लूड (द्रव्य) का स्वैब टेस्ट किया जाता है। हेल्थकेयर प्रोफेशनल लिंग, रेक्टम, वजाइना या गले में से कहीं से भी स्वैब सैम्पल कलेक्ट कर सकते हैं। यदि डाक्टर को लगता है कि पीड़ित के जोड़ (ज्वाइंट) खराब हो रहे हैं तो वह संक्रमित के ज्वाइंट में नीडिल डालकर फ्लूड सैम्पल लेकर टेस्ट कराते हैं। यूरीन टेस्ट से पता चलता है कि संक्रमण कहीं यूरेथरा तक तो नहीं पहुंच गया। ब्लड इंफेक्शन का संदेह होने पर ब्लड टेस्ट करते हैं। इन टेस्टों की रिपोर्ट 24 घंटों में आ जाती है। आजकल गॉनरिया सेल्फ टेस्टिंग किट भी उपलब्ध हैं इससे स्वैब के जरिये खुद टेस्ट किया जा सकता है।

क्या जटिलताएं होती हैं?

इस बीमारी के कॉम्प्लीकेशन्स पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं के लिये ज्यादा खतरनाक हैं। समय से इलाज न कराने पर इसका बैक्टीरिया महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ट्रैक (फेलोपियन ट्यूब्स, सरविक्स, ओवरी और युट्रेस) को डैमेज कर देता है जिससे फिलोपियन ट्यूब में जख्म और ब्लॉकेज होने से गर्भधारण में मुश्किल होती है। इस कंडीशन को मेडिकल साइंस में पीआईडी अर्थात पैल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसीस कहते हैं, इसमें सिवियर और क्रोनिक पेन होता है। पीआईडी केवल गॉनेरिया से हो ऐसा नहीं, यह बीमारी किसी अन्य सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिसीस से भी हो सकती है। गॉनरिया संक्रमण डिलीवरी के समय मां से बच्चे में चला जाता है जिससे बच्चे का सिर, आंखें और गला संक्रमित हो जाता है।

गॉनरिया से पुरूषों के यूरेथरा में जख्म बन जाते हैं और कुछ मामलों में तो लिंग के अंदरूनी भाग में फुन्सियां होने से भयानक दर्द होता है व फर्टीलिटी घट जाती है।

यदि गॉनरिया का संक्रमण ब्लड स्ट्रीम में फैल जाये तो शरीर के जोड़ खराब होने से गठिया की शिकायत हो जाती है। इसका सबसे खराब पहलू यह है कि इससे दिमाग और रीढ़ की हड्डी में सूजन आती है व हृदय के वॉल्व को क्षति पहुंचती है। ये रेयर लेकिन बहुत गम्भीर स्थितियां हैं।

इलाज क्या है इसका?

सुपर गॉनरिया के पहले तक इसका इलाज उपलब्ध एंटीबॉयोटिक से किया जाता था। सामान्य गॉनरिया के इलाज में सबसे ज्यादा सेफट्रियाएक्सॉन और एजिथ्रोमाइसिन नामक एंटीबॉयोटिक इस्तेमाल होते हैं। इसमें सेफट्रियाएक्सॉन को हिप पर इंजेक्शन से और एजिथ्रोमाइसिन को ओरल टेबलेट के रूप में दिया जाता है। इलाज शुरू होने के एक दो दिन में ही आराम महसूस होने लगता है। पीड़ित को इस संक्रमण से पूरी तरह निजात पाने के लिये कम से कम सात दिन एंटीबॉयोटिक खानी पड़ती है। कई बार डुयेल एंटीबॉयोटिक कोर्स करना पड़ता है जिसमें दिन में दो बार डबल डोज लेनी पड़ती हैं। वैसे इस क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिक इसके लिये वैक्सीन की खोज में लगे हैं।

इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिये वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक गॉनरिया पीड़ित का इलाज करने वाले डॉक्टर को इसकी जानकारी जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी को देनी जरूरी है और यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि संक्रमित होने के बाद यह व्यक्ति किसी से सेक्सुअली सम्पर्क में तो नहीं आया।

कैसे रोकथाम कर सकते हैं?

इससे बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है कंडोम का इस्तेमाल। यदि पार्टनर में कोई लक्षण महसूस हों तो तुरन्त टेस्ट करायें जिससे संक्रमण आगे न फैले। यौन सम्बन्ध बनाते समय कंडोम इस्तेमाल करने के बाद भी अपने जननांगों को साबुन या डेटॉल जैसे किसी एंटीबैक्टीरियल सॉल्यूशन से अच्छी तरह धोकर साफ करें। जो लोग किसी अन्य सेक्सुअल ट्रांसमिटिड डिसीस से पीड़ित होते हैं उनमें इस संक्रमण का रिस्क ज्यादा होता है, ऐसे में किसी अन्य सेक्स रिलेटिड बीमारी का पता चलते ही तुरन्त उसका इलाज करायें। उस व्यक्ति से यौन सम्बन्ध बनाने से बचें जो हाल में ही किसी एसटीआई अर्थात सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीस से पीड़ित होकर ठीक हुआ हो। ऐसे व्यक्ति से यौन सम्बन्ध तभी बनाये जब उसे ठीक हुए कम से कम 30 दिन हो जायें और डाक्टर इसके ठीक होने की पुष्टि कर दे। मल्टीपल सेक्स पार्टनर वाले व्यक्तियों को प्रत्येक माह अपना और अपने पार्टनर का टेस्ट कराना चाहिये।

नजरिया

यदि कोई गॉनरिया संक्रमित हो गया है तो उसे तुरन्त सेक्सुअल एक्टीविटीज़ बंद करके डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिये। डाक्टर को सभी लक्षण और सेक्सुअल हिस्ट्री डिटेल में बतायें। साथ ही उस  व्यक्ति की जानकारी भी दें जिसके साथ अंतिम बार यौन क्रियाओं में लिप्त थे। डाक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब्ड एंटीबॉयोटिक का कोर्स पूरा करें। यदि गॉनरिया के लक्षण ठीक हो गये हैं और आपको कोई दिक्कत महसूस नहीं हो रही तब भी कोर्स पूरा करें, अन्यथा यह बैक्टीरिया फिर से ज्यादा शक्तिशाली होकर उभरेगा और तब एंटीबॉयोटिक भी असर नहीं करेगी। कोर्स पूरा होने के बाद डाक्टर के पास जांच के लिये जायें और जब वह  इस बात की पुष्टि कर दे कि आप संक्रमण मुक्त हो गये हैं तभी सेक्सुअल एक्टीविटीज शुरू करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares