बीमारी है कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार

समाज की यौन अपराध की घटनाओं पर यदि मेडिकल साइंस के नजरिये से सोचा जाए तो ऐसे कुकृत्यों में लिप्त ज्यादातर अपराधी यौन, यौनिक कल्पना, व्यवहार में बाध्यकारी, आदतन लोग होते है। एक मानसिक बीमारी के शिकार। कई लोग कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार या हाइपर सेक्सुअल्टी डिस्आर्डर (सेक्स नसेड़ी) का शिकार होते हैं। इससे ग्रस्त व्यक्ति हमेशा यौन कल्पनाओं, यौन आग्रहों या तरह-तरह के यौन व्यवहारों में लिप्त रहता है। इस विकार की पहली स्टेज में व्यक्ति सुखद यौन अनुभव के लिये कल्पना की दुनिया में खुद को किसी के साथ काम-क्रीड़ा में लिप्त सोचता है जोकि सामान्य बात है। यह किशोरावस्था में शरीर में अचानक नये-नये हारमोन्स बनने से बढता होता है। इसके बाद दूसरी स्टेज शुरू होती है जब और ज्यादा आनंद प्राप्त करने के लिये व्यक्ति पोर्नोग्राफी या साइबर सेक्स की ओर मुड़ता है। इसका सिलसिला लंबे समय तक चला तो इसकी लत पड़ जाती है जिससे व्यक्ति अगले मुकाम यानी स्टेज 3 में प्रवेश करता है जहां भुगतान (यह भुगतान पैसा, पॉवर, पद, प्रतिष्ठा इत्यादि किसी भी रूप में रूप में हो सकता है)  या जबरदस्ती यौन पर उतर आता है जिसकी परिणति बलात्कार के रूप में सामने आती है। ऐसे कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार को कंट्रोल करने के लिये इलाज और स्व-नियंत्रण की जरूरत होती है।

लक्षण-सिम्पटम

कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार से ग्रस्त होने के संकेत इन लक्षणों के रूप में उभरते हैं-

– दिमाग में हर समय उठने वाले यौन विचारों को चाहकर भी कंट्रोल न कर पाना।

– हमेशा यौन क्रिया-कलापों के लिये तत्पर रहना (पोर्न साहित्य, ब्लू फिल्में, नग्न शो (स्ट्रिप शो, वेश्यागमन) और इच्छा पूरी होने पर रिलेक्स होने के साथ पछतावा और अपराधबोध होना।

– काम व पढ़ाई में ध्यान केन्द्रित न कर पाना और स्वस्थ स्थिर संबध बनाये रखने में दिक्कत।

– यौन व्यवहारों के बारे में झूठ बोलना व टोके जाने पर उत्तेजित होकर झगड़ना।

– अकेलेपन, डिप्रेशन, चिंता या तनाव जैसी समस्याओं से बचने के लिये यौन कल्पनाओं, यौन आग्रह, कामुकता पूर्ण व्यवहार या वेश्यागमन इत्यादि का सहारा लेना।

– यौन इच्छाओं को हर हाल में पूरा करना चाहे रिश्ते टूट जायें, कैरियर बर्बाद हो जाये, कर्जदार हो जायें, पुलिस पकड़ ले या यौन रोगों के शिकार।

कब जाना चाहिये डाक्टर के पास?

जब व्यक्ति को लगे कि उसका अपने यौन व्यवहार पर नियंत्रण समाप्त हो गया है और वह अन्य लोगों (पत्नी, दोस्त और आस-पड़ोस) के लिये समस्या बन रहा है तो डाक्टर के पास जाना चाहिये। यह विकार समय के साथ बढ़ता है इसलिये प्रथम संकेत मिलते ही डाक्टर के पास जायें। इससे ग्रस्त होने की पुष्टि के लिये खुद से ये प्रश्न पूछें-

– क्या मैं अपने यौन आवेगों को कंट्रोल या मैनेज कर सकता हूं?

– क्या मै अपने यौन व्यवहार से व्यथित हूं?

– क्या मैं अपने यौन व्यवहार को छिपाने का प्रयास करता हूं?

– क्या मेरे यौन व्यवहार से मेरे व्यक्तिगत और सामाजिक रिश्ते खराब हो रहे हैं।

– क्या मेरे यौन व्यवहार से मेरा करियर प्रभावित हो रहा है?

– क्या मैं अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिये कर्ज लेने लगा हूं?

– क्या मैं किसी यौन रोग का शिकार हो रहा हूं?

– क्या मेरे यौन व्यवहार का असर मेरे स्वास्थय पर पड़ने लगा है?

– क्या मैं अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिये पुलिस द्वारा पकड़े जाने की परवाह भी नहीं करता।

यदि इन प्रश्नों के उत्तर हां में हैं तो डाक्टर के पास जाना चाहिये। हालांकि बाध्यकारी यौन व्यवहार अत्यन्त निजी मामला होने की वजह से इसके लिये किसी से मदद मांगना मुश्किल कार्य है लेकिन यह विकार और न बढ़े इसलिये डाक्टर के पास जाने का मन इस तरह से बनायें-

– शर्म छोड़ें और इलाज से होने वाले फायदों के बारे में सोचें।

– याद रखें कि इस विकार से ग्रस्त आप अकेले नहीं आप जैसे दुनिया में और भी हैं।

– इसका इलाज करने वाले जानते हैं कि यह एक विकार है, वे आपकी समस्या समझेंगे और मजाक नहीं बनायेंगे।

– अनुभवी और प्रोफेशनल चिकित्सक अपने मरीज की सभी जानकारियां गुप्त रखते हैं।

इन परिस्थितियों में डाक्टर से तुरन्त मिलें

– यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिये उम्र, रिश्ते-नाते, समय, साफ-सफाई और लिंग भेद का बोध समाप्त हो जाये।

– यौन आवेग नियन्त्रित न कर पाने से कर्ज लेने लगें या यौन रोगों से पीड़ित हो जायें।

– यौन व्यवहार से उत्पन्न अपराधबोध की भावना से आत्महत्या के बारे में सोचने लगें।

कारण और रिस्क फैक्टर

इस सम्बन्ध में हुई रिसर्च के अनुसार ऐसा इन वजहों से होता है-

नेचुरल ब्रेन कैमिकल्स का असन्तुलन: दिमाग में बनने वाले कुछ कैमिकल्स (न्यूरोट्रांसमीटर) जैसेकि सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉनपेनेफ्रिन ब्रेन नियन्त्रित करने में मदद करते हैं,  इनका स्तर ज्यादा बढ़ने से व्यक्ति कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार का शिकार हो जाता है।

मस्तिष्क मार्गों में परिवर्तन: किशोरावस्था में शरीर में आये हारमोनल परिवर्तनों से दिमाग में यौन इच्छायें उठती हैं, ऐसे में पोर्न सामग्री और हस्तमैथुन इत्यादि से बार-बार आन्नद प्राप्त करना धीरे-धीरे एक लत बन जाता है और दूसरे व्यसनों की तरह संतुष्टि या राहत पाने के लिये दिमाग ज्यादा उत्तेजना हासिल करने हेतु इन्टेन्सिव सेक्सुअल कंटेट की मांग करता है। लगातार ऐसी मांग से दिमाग के रिइनफोर्समेंट केन्द्रों में मौजूद न्यूरो सर्किट बदलने लगते हैं और यह बदलाव कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार के रूप में सामने आता है।

अन्य बीमारिया: कुछ रोग और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायें जैसेकि मिर्गी और मनोभ्रंश (डिमेन्शिया) से दिमाग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने से यौन व्यवहार बदल जाता है। पार्किंसन रोग के इलाज में प्रयोग की जाने वाली डोपामाइन एगोनिस्ट दवायें भी कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार को जन्म देती हैं।

कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार महिलाओं और पुरूषों दोनों में होता है लेकिन यह महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों में ज्यादा आम है। इसका रिस्क बढ़ने के कारण हैं-

यौन सामग्री की उपलब्धता: तेजी से बदलती तकनीक से यौन सामग्री आज आसानी से सुलभ है। माता-पिता के कामकाजी होने और माइक्रो फैमिली कल्चर ने यौन सामग्री एक्सेस कर उसमें डूबने के  ज्यादा मौके उपलब्ध कराये हैं जिससे इसकी लत लगने से किशोरों में कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार का रिस्क बढ़ता है।

प्राइवेसी: आज शहरों में छोटे घर होने से प्राइवेसी की समस्या है, किशोरों और बच्चों को उसका स्पेस नहीं मिलता और वह बड़ों को यौन क्रियाओं में लिप्त देखते हैं जिससे इसका रिस्क बढ़ता है।

शराब और मादक द्रव्य: शराब व मादक द्रव्यों के सेवन और यौन शोषण से भी कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार पनपने के चांस बढ़ जाते हैं।

खराब मानसिक स्थिति: मूड डिस्आर्डर (जैसेकि डिप्रेशन और ऐंग्जॉयटी) और जुऐ की आदत भी कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार का रिस्क बढ़ाती है।

इससे जीवन में जटिलताएं

– व्यक्ति हमेशा कम-आत्मसम्मान, अपराध और शर्म की भावना से ग्रस्त रहता है।

– इससे डिप्रेशन, आत्महत्या, सिवियर डिस्ट्रेस और एंग्जॉयटी जैसे मानसिक विकार पनपते हैं।

– झूठ बोलने की आदत से रिश्ते खराब हो जाते हैं।

– काम के समय इंटरनेट पर पोर्न सामग्री एक्सेस करने से कैरियर खराब होने का डर।

– पोर्न सामग्री और वेश्यागमन के लिये ज्यादा खर्च करने से कर्जे में डूब जाते हैं।

– ब्लैकमेल होने के चांस बढ़ जाते हैं।

– एचआईवी/एड्स जैसे संक्रामक रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं और दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं।

– सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिये दवाओं (वियाग्रा इत्यादि) और मादक द्रव्यों के सेवन से गम्भीर बीमारियां (हार्ट अटैक, किडनी और लीवर डिसीस इत्यादि) हो जाती हैं।

– यौन अपराधों के लिये पुलिस गिरफ्तार कर सकती है।

रोकथाम

– जैसे ही कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार के लक्षण उभरें तुरन्त डाक्टर की मदद लें, देरी से शर्म बढ़ने के साथ यौन रोग और कर्जे जैसी समस्यायें भी बढ़ेंगी जिससे स्वास्थ्य, सामाजिक व पारवारिक रिश्ते बिगड़ने से अपना दायित्व निभाने में दिक्कतें आयेंगी तथा उपचार में अधिक समय लगेगा।

– अगर एंग्जॉयटी और डिप्रेशन जैसे मानसिक विकार हैं तो तुरन्त इनका इलाज करायें, इलाज में देरी से हाइपर-सेक्सुअल्टी डिस्आर्डर अधिक गम्भीर हो जाता है।

– शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से बचें यदि इनकी लत है तो मनोचिकित्सक की सहायता से इसे दूर करें। मादक पदार्थों के सेवन से व्यक्ति का खुद पर नियन्त्रण नहीं रहता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने से उसका सेक्सुअल व्यवहार कंपल्सिव हो जाता है।

– सेक्स के लिये जोखिम भरी स्थितियों से बचें। नशीले पदार्थ (ड्रग्स) लेकर सेक्स करने या ग्रुप सेक्स जैसी पार्टियों और प्रथाओं से दूर रहें। यदि किसी ऐसे ग्रुप में शामिल हैं तो जल्द से जल्द उसे छोड़ें  अन्यथा दो या तीन वर्ष में स्वास्थ्य इतना बिगड़ जायेगा कि जीवन भर सेक्स के लिये तरसना पड़ेगा।

डॉयग्नोसिस या पुष्टि

इसकी पुष्टि के लिये डाक्टर या मेन्टल हैल्थ प्रोफेशनल मरीज का मनोवैज्ञानिक परीक्षण करते हैं इसमें वे मरीज के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ उसकी सम्पूर्ण भावनात्मक मनोदशा का पता लगाने के लिये इन बातों पर ध्यान देते हैं-

– यौन विचार, यौन व्यवहार और वे मजबूरियां जिनकी वजह से यौन व्यवहार कंट्रोल नहीं हो पाता।

– वह मनोरंजन के लिये किन मादक द्रव्यों का उपयोग करता है।

– उसके पारवारिक और सामाजिक रिश्ते कैसे हैं? व समाज में उसकी हैसियत क्या है?

– कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार से उसे किस तरह की समस्यायें होती हैं।

कुछ मामलों में डाक्टर मरीज के दोस्तों और परिवार वालों से भी इस सम्बन्ध में इनपुट लेते हैं। डाक्टर के पास पूरी तैयारी से जायें और इसके तहत-

– अपने व्यवहार सम्बन्धी नोट्स बनायें।

– कैरियर, रिलेशनशिप और कानूनी समस्याओं की लिस्ट बनायें जो इस बीमारी से हुईं हैं।

– यदि कोई अन्य शारीरिक या मानसिक बीमारी है और तो उसके इलाज की फाइल भी साथ रखें।

– अपनी लतों और नशीले पदार्थों के प्रयोग के बारे में पूरी इमानदारी से बतायें।

– हाल में ली गयी सभी दवाओं, विटामिन्स, हर्ब्स और सप्लीमेन्ट्स की लिस्ट तैयार करें।

इलाज

कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार का उपचार मनोचिकित्सा और दवाओं से किया जाता है। उपचार का प्राथमिक उद्देश्य मरीज को स्वस्थ यौन व्यवहार के लिये प्रेरित करके उसके बाध्यकारी यौन व्यवहार को कम करने में मदद करना है। इस डिस्आर्डर से ग्रस्त ज्यादातर मरीजों को अन्य मानसिक विकार (जैसेकि शराब व नशीली दवाओं की लत) भी हो जाते हैं ऐसे में उनका उपचार भी जरूरी है जिससे एंग्जॉयटी और डिप्रेशन जैसे विकारों को बढ़ने से रोका जा सके। यदि मरीज को इस बीमारी के साथ और भी लतें (एडिक्शन) हैं तो इलाज रिहैबलिटेशन सेन्टर में कराना चाहिये, जब बीमारी कुछ कंट्रोल हो जाये तो ओपीडी में इलाज करा सकते हैं। उपचार में इन थेरेपीज़ का इस्तेमाल होता है-

कॉग्नीटिव व्यवहार थेरेपी (सीबीटी): यह थेरेपी अनहेल्दी और निगेटिव विश्वासों, मान्यताओं और व्यवहार की पहचान करके उन्हें कम करने और पॉजटिव सोच बढ़ाने में मदद करती है। इसमें मनोचिकित्सक, मरीज को प्रशिक्षण देते हैं कि वह किस तरह से अपने आपको सेक्सुअल कंटेंट से दूर रखकर कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार को कंट्रोल कर सकता है।

एसेप्टेन्स एंड कमिटमेंट थेरेपी: इसमें विचारों की स्वीकृत पर जोर देकर मरीजों को सिखाया जाता है कि वे कैसे अपनी सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के साथ कमिटमेंट पूरे कर सकते हैं।

साइकोडॉयनामिक साइकोथेरेपी: इसमें मरीज के अन्दर पनप रहे अवचेतन विचारों और व्यवहार से उसे अवगत कराते हैं जिससे उसमें नयी अंतर्दृष्टि पैदा हो और वह अपनी समस्याओं को हल करने के लिये मोटीवेट हो।

मेडीकेशन: कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार के इलाज में मेडीकेशन के तहत एंटीडिप्रेसेन्ट, मूड स्टेब्लाइजर, एंटीएन्ड्रोजेन्स और नॉलट्रेक्सोन जैसी दवायें दी जाती हैं। ये वास्तव में कम्प्लसिव सेक्सुअल व्यवहार से उभरी अन्य समस्याओं (एंग्जॉयटी, डिप्रेशन) का इलाज करती हैं और जब ये समस्यायें ठीक हो जाती हैं तो यौन व्यवहार भी संतुलित होने लगता है।

नजरिया

म्यो क्लीनिक (मिनीसोटा, अमेरिका) की मनोचिकित्सक डा. जेनीफर वेन्सिल के मतानुसार इस विकार से छुटकारा पाने के लिये मरीज को इलाज के साथ अपनी सहायता खुद करनी होगी और उसे इन बातों का ध्यान रखना चाहिये-

– अपने ट्रीटमेंट प्लान पर टिके रहें, सभी सेशन ज्वाइन करें व दवायें समय पर खायें।

– खुद को अपनी बीमारी के बारे में शिक्षित करें जिससे आपको पता रहे कि उपचार बीच में छोड़ने के क्या परिणाम हो सकते हैं।

– उन परिस्थितियों, विचारों और भावनाओं का पता लगायें जिनसे कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार ट्रिगर होता है।

– रिस्की व्यवहार कंट्रोल करें और क्लब, पब व रेड लाइट एरिया में जाने से बचें। कम्प्यूटर पर फॉयरवाल इंस्टॉल करें जिससे पोर्न साइटें न खुलें। अपने मोबाइल फोन से टिंडर जैसे एप मिटा दें जिनसे सेक्सुअल भावनायें भड़क सकतीं हैं।

– मानसिक समस्याओं (एडिक्शन, डिप्रेशन, एंग्जॉयटी और स्ट्रेस इत्यादि) और नशीले पदार्थों की लत छुड़ाने के लिये जल्द से जल्द इनका इलाज करायें।

– स्ट्रेस घटाने की तकनीकों जैसेकि योगा, मेडीटेशन व व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तथा अपनी पसंद के स्पोर्ट्स ज्वाइन करें।

– कंपल्सिव सेक्सुअल व्यवहार से रिकवरी में समय लगता है इसलिये अपना उद्देश्य कभी न भूलें और दिमाग को बार-बार याद दिलाते रहें कि मुझे इस विकार से छुटकारा पाकर अपने पारवारिक व सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करना है।

यदि मरीज इन बातों का ध्यान रखें तो वह इस बीमारी से जल्द छुटकारा पा सकता है लेकिन इसमें परिवार वालों और दोस्तों का सपोर्ट बहुत जरूरी है अन्यथा वह कुछ समय बाद पुन: इस ओर जा सकता है।

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