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गले में खराश को गंभीरता से लें!

गले में दर्द के साथ खराश, सूखापन और खुरखुराहट महसूस होने को मेडिकल साइंस में सोर थ्रोट कहते हैं। गले में दर्द इसका कॉमन लक्षण है। सोर थ्रोट, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण या फिर किसी  वातावरण आधारित फैक्टर से होता है। वातावरण में सूखापन और नमी कम होने से गले में खराश होने लगती है। कोरोना संक्रमण से पहले अपने आप या नमक के गरारे से ठीक होने वाले इस विकार से डरने वाली बात नहीं थी लेकिन आज की तारीख में कोरोना संक्रमण का पहला लक्षण होने की वजह से इसकी कल्पना मात्र से घबराहट होने लगती है। गले में लोकेशन के हिसाब से इसके तीन टाइप हैं-

फेरनजाइटिस: इससे मुंह के ठीक पीछे का क्षेत्र प्रभावित होता है।

टॉन्सिलाइटिस: यह मुंह में पीछे की ओर मौजूद सॉफ्ट टिश्यू या टॉन्सिल में सूजन और लालामी से होता है।

लेरिनजाइटिस: यह गले में मौजूद वॉयस बॉक्स या लेरिन्क्स में सूजन और लालामी से होता है।

लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण इस बात पर निर्भर होते हैं कि व्यक्ति इसके किस टाइप से पीड़ित है। आमतौर पर सोर थ्रोट से पीड़ित होने पर गले में खुरखुराहट, जलन, सूखापन, इरीटेशन या खुजली महसूस होती है और गला मुलायम (टेन्डर) हो जाता है जिससे कुछ भी निगलने या खाने में दिक्कत होती है। कुछ मामलों में टॉन्सिल पर सफेद पैच बन जाते हैं, इसी तरह के पैच स्ट्रेप थ्रोट में भी उभरते हैं लेकिन अंतर यह है कि यहां पर ये वायरल इंफेक्शन से हैं जबकि स्ट्रेप थ्रोट में ये बैक्टीरियल इंफेक्शन से होते हैं।

सोर थ्रोट में बहुत से लोगों को ऊपर दिये लक्षणों के अलावा नाक बंद होना, नाक बहना, छींक आना, खांसी, बुखार, ठँड लगना, गले की ग्रन्थियों में सूजन, आवाज में कर्कशता, शरीर में दर्द, सिरदर्द और कम भूख लगने जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं।

कारण क्या हैं?

सोर थ्रोट (गले खराश)  इंफेक्शन से लेकर इंजरी तक से हो सकता है। मेडिकल साइंस के मुताबिक इसके लिये ये आठ कारण जिम्मेदार हैं-

सर्दी, जुकाम और अन्य वायरल संक्रमण: गले में खराश के 90 प्रतिशत मामलों का मूल कारण वायरस है जैसेकि कॉमन कोल्ड, कोविड-19, इंफ्लूएंजा, मोनोन्यूक्लिओसिस (लार से फैलने वाला संक्रामक रोग), खसरा, चिकनपॉक्स और ममप्स वायरस।

स्ट्रेप थ्रोट और अन्य बैक्टीरियल संक्रमण: बैक्टीरियल संक्रमण से भी गले में खराश होती है। इनमें स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से होने वाला स्ट्रेप थ्रोट संक्रमण प्रमुख है। यह सबसे ज्यादा बच्चों को शिकार बनाता है। टॉन्सिलाइटिस और सेक्सुअली ट्रांसमिटड इंफेक्शन्स जैसेकि गॉनरिया और क्लामाइडिया से भी सोर थ्रोट हो जाता है।

एलर्जी: इम्यून सिस्टम के पालतू जानवरों की डेंडरफ, घास, फूल, पोलेन या किसी कैमिकल के प्रति अतिसंवेदनशील होने से एलर्जी उभरती है और इसका परिणाम सोर थ्रोट, नेजल कंजेशन, आंख से पानी बहना, छींकना और गले में इरीटेशन के रूप में नजर आता है। ऐसे में नाक में बन रहा अतिरिक्त म्यूकस गले में पीछे की ओर गिरता है इसे पोस्टनेजल ड्रिप कहते हैं, इसकी वजह से गले में खराश होती है।

सूखी हवा: सूखी हवा से मुंह और गले की नमी समाप्त होने से मुंह सूखने और गले में खरखराहट महसूस होती है। ऐसा अक्सर सर्दियों में कमरे में हीटर चलाने से होता है।

स्मोक, कैमिकल और अन्य इरीटेंट: घरेलू इस्तेमाल वाले कैमिकल और वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों से गले में खराश हो सकती है, इनमें सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों का धुंआं, वायु प्रदूषण तथा कैमिकल युक्त घरेलू सफाई व मच्छर भगाने वाले उत्पाद शामिल हैं।

जख्म और गले की मांसपेशियों में खिंचाव: गले में चोट या कट से बना जख्म दर्द पैदा करता है जिससे इरीटेशन के साथ खाना निगलने में दिक्कत होती है। ज्यादा जोर से चिल्लाने, लगातार बोलने या गाने से गले की वोकल कॉर्ड और मांसपेशियों में खिंचाव होने से सोर थ्रोट की कंडीशन बनती है। फिटनेस प्रशिक्षक और शिक्षक जिन्हें अक्सर चिल्लाना पड़ता है इससे पीड़ित हो जाते हैं।

गेस्ट्रोसोफेगल रिफ्लक्स डिसीस (जीईआरडी): ऐसी कंडीशन जिसमें पेट से एसिड बैक मारकर एल्फागस (भोजन की नली) से गले तक आ जाता है से भी गले में जलन तथा खराश होने लगती है। इस तरह के एसिड रिफलक्स से हार्टबर्न (सीने में जलन-चुभन) जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं।

ट्यूमर और एचआईवी इंफेक्शन: थ्रोट, वॉयस बॉक्स या जीभ में ट्यूमर होने से सोर थ्रोट होता है। यदि गले में लम्बे समय से खराश है तो ट्यूमर के चांस बढ़ जाते हैं। एचआईवी संक्रमित लोगों की इम्यूनिटी कम होने से इन्हें बार-बार गले में फंगल (ओरल थ्रस) और वायरल इंफेक्शन (साइटोमेगालोवायरस-सीएमवी) होता है जिसकी वजह से वे सोर थ्रोट से पीड़ित रहते हैं।

डाक्टर को दिखाना कब जरूरी?

गले में गम्भीर खराश, खाना निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत, मुंह खोलने में परेशानी, गले में दर्द, 101 डिग्री फॉरेनहाइट बुखार, गरदन में अकड़न और दर्द, गिल्टी, कान में दर्द, लार या कफ में खून या एक सप्ताह से अधिक समय तक खराश रहने पर डाक्टर को दिखाना जरूरी है।

पुष्टि कैसे हो सोर थ्रोट की?

लक्षणों, मुंह की जांच और फिजिकल जांच से डाक्टर (ईएनटी स्पेसलिस्ट) को पता चल जाता है कि गले में किस तरह का संक्रमण है। संदेह रहने पर रैपिड या थ्रोट कल्चर टेस्ट किया जाता है। रैपिड टेस्ट की रिपोर्ट कुछ मिनटों में मिल जाती है। इससे पता चल जाता है कि गले में खराश बैक्टीरियल संक्रमण से है या वायरल संक्रमण से।

इलाज क्या है?

इसके इलाज में ओवर द काउंटर दवायें दी जाती हैं जैसेकि एस्प्रिन, आइब्रूफेन और एक्टामाइनोफेन। आजकल एंटीसेप्टिक थ्रोट स्प्रे भी प्रयोग किये जाते हैं जैसेकि फिनॉल और गले को ठंडक पहुंचाने वाले मेन्थॉल या यूकेलिप्टस से बने स्प्रे। अनेक मामलों में गले में राहत के लिये सीरप भी दिये जाते हैं। मुलेठी या लौंग इत्यादि को चूसने से गले की खराश में आराम मिलता है।

यदि एसीडिटी से गले में खराश है तो एन्टासिड और पेट में एसिड बनना कम करने के लिये फेमोडाइन, सीमेटीडाइन जैसे एच2 ब्लॉकर व प्रोटॉन पम्प इन्हिबटर जैसेकि लेन्सोप्रॉजोल जैसी दवायें दी जाती है। कोर्टीकोस्टीराइड की अल्प मात्रा भी गले की खराश में राहत देती है।

नोट: बच्चों और किशोरों को सोर थ्रोट होने पर एस्प्रिन न दें। एक शोध में एस्प्रिन का सम्बन्ध रेये सिन्ड्रोम से पाया गया है, यह रेयर लेकिन गम्भीर जानलेवा कंडीशन है, इससे लीवर और दिमाग में सूजन आने से जीवन खतरे में पड़ सकता है।

एंटीबॉयोटिक की जरूरत कब?

जब गले के संक्रमण का कारण बैक्टीरिया हो तो एंटीबॉयोटिक दवायें दी जाती हैं। ऐसा अक्सर स्ट्रेप थ्रोट की कंडीशन में होता है जोकि एक बैक्टीरियल संक्रमण है। ऐसी अवस्था में एंटीबॉयोटिक्स जहां गला ठीक करते हैं वहीं अन्य गम्भीर कॉम्प्लीकेशनों से भी बचाते हैं जैसेकि निमोनिया, ब्रोन्काइटिस और रियूमेटिक फीवर। एंटीबॉयोटिक से एक दिन में ही गले का दर्द कम होने लगता है और रियूमेटिक फीवर के चांस 70 प्रतिशत कम हो जाते हैं।

गले में खराश के इलाज के लिये डाक्टर 10 दिन का एंटीबॉयोटिक कोर्स लिखते हैं। यदि गले में दो या तीन दिन में ही आराम आ गया है तब भी पूरे दस दिन दवा लें।

यदि गले की खराश का कारण कोविड-19 संक्रमण है तो डाक्टर विशेष एंटीबॉयोटिक और साथ में एंटी वायरल दवायें देते हैं। इनके साथ सूजन कम करने के लिये एंटी-इन्फ्लेमेटरी और दर्द में राहत के लिये एंटी एस्प्रिन या क्रोसीन जैसी दवायें भी दी जाती हैं।

घरेलू उपचार

आप घरेलू नुस्खों से गले की खराश ठीक कर सकते हैं। इसके लिये सबसे जरूरी है आराम करना जिससे हमारा इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ सके। इसके साथ खराश में आराम के लिये इन नुस्खों को आजमायें-

– एक कप पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में तीन-चार दफे गरारे करें।

– गले को आराम देने के लिये पानी में अदरक उबालकर उसमें शहद मिलाकर चाय की तरह पियें।

– गरम पानी में नीबू शहद भी ले सकते हैं। हर्बल चाय से भी गले को आराम मिलता है।

– दिन में तीन बार भाप लें, इससे नाक खुली रहेगी और अतिरिक्त म्यूकस गले में नहीं गिरेगा।

– यदि हवा में नमी नहीं है तो कमरे में ह्यूमिडीफायर चलायें।

– जितना सम्भव हो पानी पियें जिससे गले में नमी और शरीर में पानी की कमी न हो।

– सोर थ्रोट होने पर शराब न पियें क्योंकि इससे शरीर में पानी की और खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे रिकवरी टाइम बढ़ जाता है।

– जब तक गला ठीक न हो जाये कम बात करें।

रोकथाम कैसे?

सोर थ्रोट से बचाव का सबसे अच्छा तरीका साफ-सफाई से रहना है, गुड हाइजीन की आदत डालें और बच्चों को भी सिखायें। इन बातों का विशेष ध्यान रखें-

खांसने, छींकने, टॉयलेट जाने के बाद साबुन से हाथ धोयें और कभी भी बिना हाथ धोये खाना न खायें।

सोर थ्रोट पीड़ितों के साथ खाना-पीना शेयर न करें और न ही बिना मास्क उनके नजदीक जायें।

सोर थ्रोट पीड़ितों के बरतन और वस्तुएं शेयर न करें, उनके तकिये का कवर कुछ देर साबुन में भीगने दें और अलग से धोयें। पब्लिक फोन और पब्लिक एरिया में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं छूने से बचें, यदि छू लिया है तो हाथों को एल्कोहल बेस्ड सेनेटाइजर से साफ करें। होटलों में टीवी रिमोट, एसी रिमोट और ऐसी अन्य वस्तुओं को सेनेटाइज करने के बाद इस्तेमाल करें। भीड़-भाड़ वाले एरिया में मास्क लगाकर जायें।

याद रखें कि सोर थ्रोट वायरल इंफेक्शन है यदि कोरोना या कोई अन्य वजह न हो तो यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिये कोरोना टेस्ट निगेटिव आने पर घर में पांच-सात दिन  आराम करें, घरेलू नुस्खे अपनायें और घर के सदस्यों से बिना मास्क न मिलें, यह अपने आप ही ठीक हो जायेगा।

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