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World Menstrual Hygiene Day 2021: कोरोना काल ने बढ़ा दी महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याएं

हर साल विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस यानी वर्ल्ड मेन्सट्रुअल हाइजीन (माहवारी से जुड़ी साफ-सफाई) डे 28 मई को मनाया जाता है यानी आज विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस है। आज विश्व में प्रत्येक जगह महिलाओं को इसके बारे में जागरूक किया जाएगा। एक दिन हर महिला को इस चक्र से गुज़रना पड़ता है। यह एक प्राकृतिक क्रिया है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसे मनाने का मकसद यही है कि लड़कियों/महिलाओं को पीरियड्स के उन खास दिनों में स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके। महिलाओं के पीरियड्स आमतौर पर 28 दिनों के भीतर आते हैं, ये पांच दिनों तक रहता है। इसी कारण इस खास दिवस को मनाने के लिए साल के पांचवें महीने मई की 28 तारीख को चुना गया।

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कोरोना काल में बिगड़ा मासिक धर्म का चक्र

कोरोना काल में सभी को मानसिक तनाव का शिकार होना पड़ा है। मानसिक तनाव के कारण महिलाओं और किशोरियों का मासिक धर्म का चक्र बिगड़ गया है। महीने में एक बार आने वाली माहवारी अब महीने में एक से ज्याद बार आ रही है। जो महिलाएं कोरोना संक्रमित हो रही है उन्हें मासिक धर्म में कमी या अधिकता की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। प्रसूति रोग विशेषज्ञों और मासिक धर्म स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले साल भर के दौरान इस तरह के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान के सीकर स्थित एस के मेडिकल कॉलेज में प्रसूति रोग विभाग में प्रिंसिपल स्पेशलिस्ट डॉ. गीता दाधीच कहती हैं कि कोविड-19 के दौरान मासिक धर्म संबंधी अनियमितताओं के मामले ज्यादा देखने को मिले हैं। डॉ. दाधीच के मुताबिक कोविड-19 के दौरान मासिक धर्म में देरी के मामले बढ़े हैं। ज्यादा तनाव, अत्यधिक दवाओं के सेवन से हार्मोनल असंतुलन की वजह से ऐसा हो सकता है। इसके कारण मेनोरेजिया (ज्यादा रक्तस्राव) भी कई बार देखने को मिलता है।

कोरोना काल में इन समस्याओं का सामना करना पड़ा-

  1. वर्ष 2020 से लेकर अभी तक ऐसी कई समस्याओं का सामना महिलाओं को करना पड़ा है। कोरोना काल में महिलाओं को अनेक समसयाओं का सामना करना पड़ा है। महिलाओं के मानसिक तनाव के कारण मासिक धर्म में भी देरी होने लगी। जो कोरोना से ग्रसित थी उन महिलाओं को समय से पीरियड नहीं आया। ज्यादा दवाईयां लेने के कारण हार्मोन में बदलाव आ गए। लॉकडाउन को कारण जिन महिलाओं को घर पर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है वह भी इसी प्रकार की समस्या से गुजरी है। कई महिलाओं ने कोविड-19 से पीड़ित होने के बाद मैंने मासिक धर्म चक्र में बदलाव महसूस किया। कुछ महिलाओं के मासिक धर्म देरी से आए तो कुछ के एक महीने में दो-तीन बार आने की शिकायत रही। ज्यादा रक्त स्त्राव के कारण उनको खून की कमी और कमजोरी का सामना करना पड़ा।
  2. जो महिला डॉक्टर और नर्स पीपीई किट पहनकर कोरोना मरीजों की ध्यान रखती है सबसे ज्यादा उन्हीं को समस्या हुई है। पीपीई किट को पहनकर खुद का कोई काम नहीं कर सकते है। मासिक धर्म के दौरान पीपीई किट पहन कर कई घंटे काम करने वाली स्वास्थ्यकर्मियों को मूत्र मार्ग संक्रमण, खुजली, सूजन आदि समस्याएं हो रही हैं। मासिक धर्म के अलावा भी महिलाएं पीपीई किट में सैनेटरी नैपकिन का उपयोग कर रही है। बार बार पीपीई किट को उतारने में बहुत समस्या आती है।
  3. कई संस्थानों में जो किशोरी है उनको इस बारे में कुछ पता नहीं होता है तो इस संबंध में अनेक समस्या झेलनी पड़ती है। जैसे कई अनाथआश्रम है जहां किशोरियों को ऐसी समस्याएं झेलनी पड़ती है। इसलिए आज के दिन जगह-जगह जाकर महिलाओं को ऐसी समस्या से अवगत कराया जाता है। जिससे आगे उन्हें कोई समस्या ना हो। विश्व ईकाई, यूनीसेफ के मुताबिक भारत में 71 प्रतिशत किशोरवय लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में तब तक बहुत जानकारी नहीं होती जब तक उन्हें खुद पहली बार इसका (माहवारी का) अनुभव नहीं होता।
  4. ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी पैड्स उपलब्ध नहीं होने की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान अनेकों ग्रामीण महिलाओं को सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं हुए थे। जिस कारण उन्हें कपड़ा इस्तेमाल करना पड़ा जदिस वजह से अनेक बीमारियां उत्पन्न हुई। जब मजदूरों का पलायन हो रहा था उस समय भी अनेक ऐसी महिलाए थी जिसको सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं हुए थे। लेकिन कई गैर-सरकारी संस्थानों ने सैनेटरी नैपकिन उन महिलाओं तक पहुंचा कर उनकी जिंदगी बचाई थी।

वर्ल्ड मेन्सट्रुअल हाइजीन डे की थीम और उद्देश्य

इस वर्ष वर्ल्ड मेन्सट्रुअल हाइजीन डे की थीम एक्‍शन एंड इन्‍वेस्‍टमेंट इन मेन्सट्रुअल हाइजीन एंड हेल्‍थ यानी ‘मासिक धर्म स्वच्छता और स्वास्थ्य में कार्रवाई, निवेश रखी गई है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मासिक धर्म के दौरान लड़कियों और महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और कठिनाइयों के बारे में जागरूकता पैदा करना और कई तरह की सावधानियां बरतना है। उन किशोरियों को इस बारे में जागरूक करना है जिनको कुछ मालूम नहीं है।

 इसलिए है इसका खास महत्‍व

पहले के समय में इस विषय पर कोई खुलकर बात नहीं करता था। ऐसे में वे इसके लिए मानसिक रूप से पहले से तैयार नहीं होती थीं। इस वजह से वे न तो इसके प्रति जागरूक होती थीं और न ही इससे होने वाली बीमारियों के बारे में ही जानती थीं। ऐसे में इस दिवस के बहाने लोगों को इस ओर जागरूक किया जाता है कि मासिक धर्म कोई अपराध नहीं। यह एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। ऐसे में इस पर घर और समाज में खुलकर बात करने की जरूरत पर बल दिया जाता है। ताकि इस दौरान स्वच्छता के महत्व को भी समझा जा सके। लेकिन कई लोग ऐसे जो इसको अपराध मानते है महिलाओं को इन छुआछुत जैसे समझते है। किसी भी वस्तु के हाथ नहीं लगाने देते है। इन दिनों महिलाओं को गंदगी समझा जाता है। आज भी कई महिलाएं ऐसी है जो अपने मासिक धर्म के बारे में खुलकर नहीं बता पाती है। महिलाओं को इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। यह कोई पाप नहीं प्राकृतिक क्रिया है।

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