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यीस्ट इंफेक्शनः हल्के में नहीं लें

इसका अधिक बढ़ना संकटदायी है। कोरोना से पहले इसे साधारण लेकिन परेशान करने वाला संक्रमण मानते थे लेकिन कोरोना काल में फंगल इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ने से डाक्टर इसे गम्भीरता से ले रहे हैं। कैंडिडाइसिस वर्ग में आने वाला यह फंगल इंफेक्शन कोविड संक्रमितों में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है, क्योंकि व्हाइट फंगस भी इसी वर्ग का सदस्य है जिसका जानलेवा संक्रामक रूप आज हमारे सामने है।

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यीस्ट (खमीर) हमारे मुंह, बड़ी आंत, त्वचा और जननागों के अंदरूनी भागों में पाया जाने वाला आम फंगस (कवक/फफूंद) है, महिलाओं में यह योनि में मौजूद होता है जो उन्हें कई बीमारियों से बचाता है लेकिन इसका अधिक बढ़ना (ओवरग्रोथ) बीमारी (संक्रमण) बन जाता है। कोरोना से पहले इसे साधारण लेकिन परेशान करने वाला संक्रमण मानते थे लेकिन कोरोना काल में फंगल इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ने से डाक्टर इसे गम्भीरता से ले रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स अस्पताल (मेरीलैंड-अमेरिका) के डिपार्टमेंट ऑफ डरमेटोलॉजी के डाक्टर ग्रान्ट जेम्स इन्हाल्ट (एम.डी., डरमेटोइम्यूलॉजी) के मुताबिक कैंडिडाइसिस वर्ग में आने वाला यह फंगल इंफेक्शन कोविड संक्रमितों में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है, क्योंकि व्हाइट फंगस भी इसी वर्ग का सदस्य है जिसका जानलेवा संक्रामक रूप आज हमारे सामने है। यीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित महिलायें यदि कोरोना या इम्युनिटी कम करने वाली किसी बीमारी की चपेट में आ जायें तो उनकी रिकवरी में अधिक समय लगने के अलावा वे अन्य संक्रामक बीमारियों का शिकार हो जायेंगी। यीस्ट इंफेक्शन महिला और पुरूष दोनों को होता है लेकिन महिलाओं में आम है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार चार में से तीन महिलाओं को उनके जीवन काल में कम से कम दो बार यीस्ट इंफेक्शन जरूर होता है।

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क्या है यीस्ट इंफेक्शन?

आमतौर पर महिलाओं की योनि (वजाइना) में होने वाले इस इंफेक्शन को कैन्डीडाइसिस एल्बीकैंस कहते हैं। तकनीकी दृष्टि से यह व्हाइट फंगस वाले वर्ग का सदस्य है। एक स्वस्थ महिला की योनि में हमेशा कुछ बैक्टीरिया और यीस्ट (खमीर) सेल मौजूद होते हैं जो उसे कई सेक्सुअली ट्रांसमिटिड संक्रमणों (एसटीआई) से बचाते हैं। समस्या तब होती है जब योनि में मौजूद बैक्टीरिया और यीस्ट का संतुलन बिगड़ने से यीस्ट सेल्स मल्टीप्लाई होकर संख्या में अधिक हो जाते हैं जिसका परिणाम संक्रमण के रूप में सामने आता है। इससे योनि में तीव्र खुजली, लालामी तथा जलन महसूस होने के साथ सूजन हो जाती है, गम्भीर अवस्था में योनि में दर्द और सूजन से महिला के लिये सेक्स अत्यन्त कष्टदायी हो जाता है। कोरोना आने से पहले तक यह क्रीम और दवाओं से दो-तीन दिन में ठीक होने वाली आम बीमारी थी, अगर मामला बिगड़ा तो भी दो सप्ताह में पूरी तरह ठीक, लेकिन कोरोना काल में इम्युनिटी कमजोर होने से जहां इसे ठीक होने में बहुत समय लगता है वहीं इसकी वजह से अनेक कॉम्प्लीकेशन भी हो रहे हैं। (अभी इस पर रिसर्च जारी है।)

यीस्ट इंफेक्शन, संक्रामक (कन्टेजियस) है, यौन क्रिया में लिप्त दोनों लोग इसे वजाइनल या ओरल  सेक्स से एक दूसरे में फैला सकते हैं। पश्चिमी सभ्यता में सेक्स ट्वाइज की भी इसे फैलाने में अहम भूमिका है। यदि गर्भवती महिला इससे पीड़ित है तो डिलीवरी के समय यह संक्रमण शिशु में चला जाता है, कुछ केसों में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के ब्रेस्ट एरिया में कैन्डीडा की ओवरग्रोथ से यह ब्रेस्ट फीडिंग से शिशु में पहुंच गया।

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लक्षण क्या है?

शरीर के वे स्थान जहां त्वचा आपस में टच होती है (स्किन फोल्ड) व नाभि में लालामी युक्त रैशेज, पानी जैसे द्रव्य का रिसाव करते पैच, पिम्पल्स, खुजली और जलन। योनि में तीव्र खुजली (इचिंग), सूजन, यूरीनेशन में जलन, योनि क्षेत्र में लालामी, रैशेज व सेक्स के समय दर्द। गम्भीर मामलों में  योनि से सफेद-ग्रे चिपचिपा डिस्चार्ज, कुछ महिलाओं में पनीर जैसे सफेद पदार्थ का डिस्चार्ज और योनि में तेज दर्द।

मुंह में जीभ तथा गालों के अंदरूनी भागों में सफेद पैच, लालामी और दर्द, ग्रास (भोजन) नलिका में यीस्ट जमा होने से भोजन निगलने में दिक्कत, मुंह के किनारों पर क्रैक्स और हल्के कट्स।

नाखूनों के नीचे (नेल बेड्स) सूजन, दर्द, पस और नाखूनों का सफेद या पीला होकर नेल बेड से अलग होना।

पुरूषों में लिंग के अंदरूनी भाग में लालामी और सफेद से पदार्थ का जमना व दर्द युक्त रैशेज उभरना।

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कारण क्या?

यीस्ट इंफेक्शन आमतौर पर स्किन डैमेज होने तथा गर्म-नम (ह्यूमिड) कंडीशन में यीस्ट फंगस की ओवरग्रोथ से होता है। योनि में स्वाभाविक रूप से मौजूद कैनडीडा एल्बीकैंस माइक्रोआर्गेनिज्म (सूक्ष्मजीवाणुओं) में लैक्टोबैसलिस बैक्टीरिया की जरूरी बृद्धि न होने से यीस्ट की मात्रा बढ़ती है और परिणाम इंफेक्शन के रूप में सामने आता है। मेडिकल साइंस के मुताबिक यीस्ट इंफेक्शन के लिये  जिम्मेदार फैक्टर हैं-

– कोरोना या किसी अन्य बीमारी से इम्यूनिटी कम होना।

– एंटीबॉयोटिक्स का सेवन, जिससे लैक्टोबैसलिस जैसे अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होने से शरीर में इनकी मात्रा घटती और यीस्ट की मात्रा बढ़ती है।

– कोरोना के इलाज में दिये गये स्टीराइड्स, जो अन-कंट्रोल्ड डॉयबिटीज को बढ़ावा देते हैं व खाने में मीठे की अधिकता।

– स्ट्रेस और नींद की कमी।

– मासिक धर्म के दौरान शरीर में हारमोनल असन्तुलन और गर्भावस्था।

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किन्हें ज्यादा रिस्क?

वैसे तो यह किसी को भी हो सकता है लेकिन शिशुओं, एंटीबॉयोटिक का अधिक सेवन करने वालों, कैंसर का इलाज करा रहे लोगों, एचआईवी और डॉयबिटीज के मरीज, जिनके दांतों पर डेन्चर लगा हो, कोरोना, एचआईवी पीड़ित और गर्भवती महिलाओं को इसका ज्यादा रिस्क होता है।

पुष्टि कैसे?

यीस्ट इंफेक्शन की पुष्टि के लिये डाक्टर मेडिकल हिस्ट्री जानने के साथ पेल्विक एरिया की जांच के तहत योनि की गहन जांच (योनि की दीवारों और सरविक्स) करते हैं। यदि पुष्टि में संदेह रहता है तो योनि से सेल्स कलेक्ट करके लैब भेजते हैं जहां से यीस्ट इंफेक्शन की पुष्टि होती है।

इलाज क्या?

यीस्ट इंफेक्शन का इलाज लक्षणों और शरीर में इसकी स्थिति के आधार पर होता है। डॉक्टर संक्रमण और लक्षणों की गम्भीरता के हिसाब से दवायें लिखते हैं। यदि संक्रमण सामान्य है तो एंटी फंगल क्रीम से यह दो-तीन दिन में ठीक हो जाता है। कुछ मामलों में क्रीम के साथ टेबलेट भी खानी पड़ती हैं। इसके कॉमन मेडीकेशन में बूटाकोनाजोल (जानाजोल), क्लॉटरीमाजोल (लॉटरीमिन), मीकॉनाजोल (मॉनीस्टेट), टेरकॉनाजोल (टेराजोल) और फ्लूकॉनाजोल (डिफ्लूकैन) जैसी दवाओं का प्रयोग होता है।

यीस्ट संक्रमण की शिकार महिलाओं को ट्रीटमेंट प्लान अच्छी तरह से फॉलो करते हुए फॉलो-अप के लिये समय पर जाना चाहिये ताकि यह सुनुश्चित हो कि इलाज सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं। बहुत से मामलों में देखा गया है कि दो महीने बाद संक्रमण फिर से हो गया।

यदि किसी को साल में चार दफे से ज्यादा इंफेक्शन हो और योनि में अधिक लालामी, सूजन तथा दर्द जैसे लक्षण उभरें तो यह गम्भीर मामला है। संक्रमण की गम्भीरता का एक पैमाना यह भी है कि यह कैंडीडा एबीकैंस जैसे फंगस के बजाय केवल कैन्डीडा फंगस से हो। गर्भवती महिलाओं के लिये यह स्थिति ज्यादा गम्भीर है। इस कोविड टाइम में कमजोर इम्यून सिस्टम और अन्कंट्रोल्ड डॉयबिटीज के साथ यीस्ट इंफेक्शन को गम्भीर श्रेणी का माना जाता है। ऐसे में इसका इलाज कम से कम 14 दिन चलता है और इसके अंतर्गत क्रीम, ऑन्टमेंट और टेबलेट के साथ सपोसिटरी वजाइनल ट्रीटमेंट किया जाता है। संक्रमण जल्द ठीक हो और ज्यादा न फैले इसके लिये फ्लूकोनाजोल (डिफ्लूकैन) को करीब 6 सप्ताह तक लेना पड़ सकता है।

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पुरूषों में यीस्ट इंफेक्शन और इलाज: मेडिकल साइंस के मुताबिक ऑल बॉडीज हैव कैनडीडा- नॉट जस्ट द फीमेल बॉडी। इसका मतलब है कि यीस्ट इंफेक्शन से महिलायें ही नहीं पुरूष भी संक्रमित होते हैं। आमतौर पर इसमें पुरूष जननांग (लिंग)  संक्रमित होता है जिसे पेनाइल यीस्ट इंफेक्शन कहते हैं, ऐसा लिंग के अग्रभाग में चमड़ी के नीचे ग्रोइन एरिया में कैन्डीडा की ओवरग्रोथ से होता है। पेनाइल यीस्ट इंफेक्शन असुरक्षित यौन सम्बन्धों अर्थात बिना कंडोम के सेक्स से उस स्थिति में सम्भव है जब महिला यीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित हो। इससे बचने के लिये बिना कंडोम सेक्स न करें। जहां तक पुरूषों में इसके लक्षणों की बात है तो ये  महिलाओं जितने गम्भीर नहीं होते, ज्यादातर पुरूषों को तेज खुजली और लिंग के अग्र-भाग में लालामी होती है। इस हिस्से की अच्छी तरह से साफ-सफाई और रोजाना स्नान से इससे आसानी से मुक्ति मिल सकती है। इस सम्बन्ध में घरेलू उपचार के तौर पर नारियल का तेल और टी-ट्री ऑयल प्रयोग करें। यदि कुछ दिनों में लक्षण ठीक न हों तो डाक्टर से सम्पर्क करें।

शरीर के संक्रमित हिस्सों के मुताबिक इसका इलाज होता है जैसेकि-

– स्किन फोल्ड या जननांगों के बाहरी भागों में हुए यीस्ट इंफेक्शन का इलाज एंटी-यीस्ट पाउडर से।

– मुंह के यीस्ट इंफेक्शन का इलाज मेडीकेटेड माउथवाश या मुंह में घुलने वाली टेबलेट से।

– इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर एंटी-यीस्ट टेबलेट से।

– भोजन नलिका में यीस्ट इंफेक्शन का इलाज ओरल और इन्ट्रावीनस एंटी-यीस्ट दवाओं से।

– नाखूनों में हुए यीस्ट संक्रमण का इलाज में ओरल एंटी यीस्ट दवाओं व क्रीमों से।

– योनि के यीस्ट इंफेक्शन का उपचार क्रीम, टेबलेट और मेडिकेटेड सपोसिटोरीज से।

घरेलू उपचार

यीस्ट इंफेक्शन की शुरूआत में कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर इसे ठीक कर सकते हैं। लेकिन यह सामान्य अवस्था में ही करें न कि कोरोना होने के बाद रिकवरी पीरियड में। इसके अंतर्गत योनि को अच्छी तरह से साफ पानी से धोने के पश्चात कोकोनट ऑयल या टी-ट्री ऑयल लगायें। खाने में लहसुन और दही की मात्रा बढ़ायें। लहसुन में मौजूद एलिसिन नामक रसायन में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। दही का लेप योनि पर लगाने से इचिंग और जलन कम होती है व योनि में बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे संक्रमण जल्द ठीक होता है। ऐसा करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि हाथ अच्छी तरह से साफ हों। यदि संक्रमण योनि के अंदरूनी भागों में फैल गया है तो बोरिक एसिड वजाइनल सपोसिटरर्स का प्रयोग करें। गर्भवती और डॉयबिटीज पीड़ित महिलाओं में बार-बार यीस्ट इंफेक्शन होने पर घरेलू उपचार के बजाय डाक्टर से सम्पर्क करें ताकि ये शरीर में कहीं और न फैले।

कैसे बच सकते हैं इससे?

यीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित महिलाओं में यह अलग-अलग वजहों से पनपता है। बहुत सी महिलाओं को एंटीबायोटिक दवाओं से, कुछ को गर्भवती होने पर और कुछ में ब्लड शुगर बढ़ने पर। यदि इसका सही कारण पता हो तो उसका निदान करके इससे बच सकते हैं। इससे बचने के लिये बैलेंस डाइट लें, खाने में मीठा कम करें, दही और लैक्टोबैसिलस सप्लीमेंट लें, कॉटन और लिनिन के कपड़ों को प्राथमिकता दें, अडरगारमेंट अच्छी तरह से गर्म पानी में धोने के बाद ही पहने, फेमिनाइन उत्पाद (सेनेटरी पैड, टेम्फून) लगातार बदलें साथ ही सेन्टेड (खुशबूदार) सेनेटरी पैड प्रयोग न करें। टाइट पैंट और लेगिंग्स पहनने से बचें, मासिक धर्म के दौरान ज्यादा समय तक एक ही पैड का प्रयोग न करें, गीले या नम कपड़े न पहनें और गर्म हॉट टब तथा हॉट बाथ से बचें। मुंह के यीस्ट इंफेक्शन से बचने के लिये रोजाना दो बार ब्रश और माउथवाश करें।

यीस्ट इंफेक्शन और यौन सम्बन्ध

सीडीसी से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना से रिकवरी के 15 दिन बाद तक महिला और पुरूष दोनों को यौन सम्बन्ध बनाने से परहेज करना चाहिये अन्यथा वे यीस्ट इंफेक्शन या किसी अन्य सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिसीस से पीड़ित हो सकते हैं, यदि महिला कोरोना निगेटिव होने के बाद रिकवरी पीरियड (जोकि 15 से 30 दिन का होता है) में है, यीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित पुरूष से यौन सम्बन्ध बना लेती है तो वह यीस्ट इंफेक्शन की चपेट में आ जायेगी व किसी अन्य सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिसीस को भी कैच कर लेगी। ऐसे में सबसे अधिक चांस यूरीनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआई) के होते हैं। कमजोर इम्युनिटी में यूटीआई जानलेवा है अत: कोरोना से निगेटिव आने के बाद कम से कम 15 दिन तक यौन सम्बन्ध बनाने व ओरल सेक्स से परहेज करें। एक बार यीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित होने के बाद बार-बार इसकी चपेट में आने की सम्भावना बढ़ जाती है जोकि ज्यादा खतरनाक है। यदि इलाज के बाद भी यीस्ट इंफेक्शन बार-बार हो रहा है तो अपने पार्टनर की जांच करायें कि कहीं उसे तो यह इंफेक्शन नहीं है। ऐसे किसी भी रिस्क से बचने के लिये बिना कंडोम के सेक्स न करें।

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