सबको रास नहीं आया अभिनय

सलीम दुर्रानी, संदीप पाटील या अजय जाडेजा जैसे क्रिकेटरों को ही नहीं, खेलों की दुनिया से फिल्मों में आने वाले सभी खिलाड़ियों को अभिनय विशेष रास नहीं आ पाया। फिर भी जिसको जब मौका मिला, उसने अभिनय के मैदान में कूदने में हिचक नहीं दिखाई। करीब पैंतीस साल पहले अश्विनी मूल रूप से कन्नड़ में बनी और बाद में हिंदी में डब हुई ‘अश्विनी’ में नायिका बन कर आईं लेकिन वह फिल्म उन्हीं के खेल जीवन आधारित थी। अश्विनी आकर्षक थी और चाहतीं तो फिल्मों  चल सकती थी लेकिन एक फिल्म में काम करने की मशक्कत ने आगे के लिए उनका हौसला तोड़ दिया। 

फिल्मी दुनिया की ग्लैमरस चमक दमक बाहर के लोगों को चौंधियाती जरूर है लेकिन उसमें दाखिल होकर जब एक अलग अंधेरी दुनिया भी नजर आती है तो सारा मोह भंग हो जाता है। इसीलिए खिलाड़ियों ने शौकिया तौर पर फिल्मों से नाता जोड़ने में ही ज्यादा रूचि दिखाई है। सालों पहले जेम्स बांड कड़ी की एक फिल्म ‘आक्टोपसी’ में खलनायक कबीर बेदी के सहायक के रूप में लान टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज उदयपुर की सड़कों पर आटो रिक्शा दौड़ाते नजर आए थे। उस एक अनुभव के बाद विजय अमृतराज ने फिर अभिनय का रुख नहीं किया। उनके छोटे भाई अशोक अमृतराज ने हालीवुड में कई फिल्में बनाई, हिंदी में ‘जींस’ बना कर भारतीय बाजार में प्रवेश की कोशिश की लेकिन ‘आक्टोपसी’ में स्वाभाविक अभिनय करने वाले बड़े भैया को फिर अभिनय के मैदान में उतरने के लिए राजी नहीं कर पाए।

चालीस साल की उम्र को पार कर चुके टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने साल के शुरू में आस्ट्रेलियाई ओपन में मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीता। इस जीत से पेस के हिस्से में दो लाख तीस हजार डालर आए। इतना पैसा फिल्मों में अभिनय करके नहीं मिल सकता। इसीलिए ग्लैमर की दुनिया में भरपूर रूचि होने के बावजूद पेस फिलहाल खेल में रमे हुए हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि पेस गा भी लेते हैं और अच्छा खासा नाचना जानते हैं। मतलब यह कि मसाला फिल्मों में खप सकने लायक तमाम खूबियां उनमें हैं। अभिनय का शौक उन्हें बचपन से है। 

इसीलिए खेल की अंतरराष्ट्रीय व्यस्तता के बीच उन्हें थोड़ा मौका मिला तो उन्होंने अशोक कोहली की फिल्म ‘राजधानी एक्सप्रेस’ में काम करने के लिए फौरन हां कर दी। फिल्म में उन्होंने केशव नाम के आतंकवादी की भूमिका की। ‘राजधानी एक्सप्रेस’ को कोई खास सफलता नहीं मिल पाई। लिहाजा पेस ने कोई और फिल्म तो साइन नहीं की है। लेकिन इस बात की इच्छा जताई है कि अगर अच्छे विषय मिले तो वे ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में अभिनय करना चाहेंगे। एक जमाने में लिएंडर पेस के खास दोस्त रहे महेश भूपति ग्रैंड स्लेम की डबल्स स्पर्धा में पेस की तीन सफलताओं में साझीदार रहे। बाद में उनके रिश्तों में ऐसी खटास आ गई कि आज वे एक दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं करते। 

2012 में लंदन ओलंपिक के लिए जोड़ी बनाने के सवाल पर हुई उठापटक ने उनके बीच की बदमजगी और बढ़ा दी है। लेकिन कुछ बातें दोनों में समान है। पेस की तरह महेश भूपति ने भी एक अभिनेत्री लारा दत्त से शादी की है। अभिनय का उन्हें शौक नहीं है लेकिन फिल्मी दुनिया से जुड़ने की चाह में वे निर्माता जरूर बन गए हैं। कुछ समय पहले भूपति ने  ‘बिग डैडी प्रोडक्शंस’ के नाम से अपनी फिल्म निर्माण कंपनी खोली और पत्नी लारा दत्ता के बैनर ‘भीगी बसंती प्रोडक्शंस’ के साथ मिल कर फिल्म ‘चलो दिल्ली’ बनाई। अब दंपति ‘चलो चाइना’ बना रहे हैं। 

क्रिकेटर और टेनिस खिलाड़ी ही नहीं, अन्य खेलों के खिलाड़ी भी फिल्मी ग्लैमर से अछूते नहीं रह पाए हैं। बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा, साइना नेहवाल व अश्विनी. क्रिकेटर मिथाली राज और तीरंदाज दीपिका कुमारी ने फिलहाल विज्ञापन फिल्मों से शुरुआत की है। इनमें से ज्वाला व अश्विनी ने तो स्टेज शो पर ग्लैमरस नृत्य भी किया है। तैयारी उनकी फिल्मों में दाखिल होने की है। इंतजार है बस अच्छा मौका मिलने का। टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को तो फिल्मों में अभिनय का प्रस्ताव मिल चुका है। फिलहाल उन्हें लगता है कि खेल में कुछ कर दिखाने की अभी गुंजाइश बची है। लिहाजा टेनिस छोड़ कर फिल्मी दुनिया में शाट लगाने का वे मन नहीं बना पा रही है। 

कुछ खिलाड़ियों को तो जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास ने आगे बढ़ने से रोक दिया। यह तय कर पाना काफी मुश्किल है कि बात मजाक में कही गई थी या यूं ही खबर बन गई लेकिन किस्सा है दिलचस्प। 2008 के ओलंपिक खेलों में मुक्केबाजी का कांस्य पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह ने पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘फगली’ में काम किया। उनसे पूछा गया कि क्या वे एक्टिंग कर सकते हैं? विजेंदर का जवाब था कि जब अक्षय कुमार एक्टिंग कर सकते हैं तो वे क्यों नहीं? यह तुलना शायद उन्होंने इस आधार पर की होगी कि अक्षय मार्शल आर्ट सिखाते-सिखाते अभिनय कर गए तो विजेंद्र भी मुक्केबाजी करते हुए अभिनय के रिंग में आ कूदे। करीब दो दशक और 130 फिल्मों के अक्षय कुमार के सफर के मुकाबले विजेंदर एक फिल्म से ही पस्त हो गए। 

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