नहीं चला पति-पत्नी का लगाव

स्थितियां काफी बदल जाने के बावजूद असल जिंदगी के फिल्मी पति-पत्नी फिल्मों में एक दूसरे के सामने अने से अभी भी कतराते रहे हैं तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह दुविधा रही है कि फिल्म में उनकी रोमांटिक छवि स्वाभाविक लगेगी या नहीं? अक्सर हीरो-हीरोइन का शादी से पहले का जो रोमांस उत्सुकता जगा देता है वैसा भाव पति-पत्नी बनने के बाद नहीं पनप पाता। ऐश्वर्य राय व अभिषेक बच्चन का मामला इसकी बड़ी मिसाल है। शादी से पहले हालांकि उनमें रोमांस जैसी कोई बात नहीं थी। शादी के बाद उन्होंने फिल्मों में रोमांटिक एंगल बनाने की कोशिश की लेकिन दंपति की पहचान उनके फिल्मी चरित्र पर इतनी हावी रही कि ‘उमराव जान’, ‘गुरू’ व ‘रावण’ सरीखी फिल्मों में उनकी कैमिस्ट्री सहज नहीं लग पाई। 

करीना कपूर और सैफ अली खान ने तो लगभग तय कर लिया है कि वे साथ में कोई फिल्म नहीं करेंगे। धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की जोड़ी ने एक अनूठा विश्व रिकार्ड कायम किया। दोनों करीब तीन दर्जन फिल्मों में साथ आए। धर्म बदल कर शादी की तो उसे काफी समय तक इस अंदेशे में गोपनीय रखा कि कहीं इससे उनकी फिल्मी जोड़ी की लोकप्रियता पर बुरा असर न पड़े। लेकिन जब बात खुल गई तो उसके बाद अई तीन चार फिल्में पहले जैसा जलवा नहीं दिखा पाईं। फिल्मों में ऐसी जोड़ियों का लंबा इतिहास रहा जिनके रोमांस ने कई फिल्मों को चमकाया लेकिन शादी के बाद अक्सर पत्नी ने फिल्मों से नाता तोड़ लिया और असल जिंदगी का रोमांस फिल्मों में जादू नहीं चला पाया। वैसे तो ऐसे मामले कम ही हुए हैं जब किसी हीरो ने हीरोइन से शादी की हो। शम्मी कपूर ने गीताबाली से शादी की लेकिन उससे पहले उनके रोमांस की कोई चर्चा नहीं हुई। फिर भी शादी के बाद दोनों ने कोई फिल्म नहीं की। कल्पना कार्तिक ने देव आनंद के साथ ही फिल्में की। ‘नौ दो ग्यारह’, टैक्सी ड्राइवर, ‘हाउस नंबर 44’ सरीखी फिल्मों में दोनों की जोड़ी काफी सराही गई। 

देश-विदेश् में चर्चित हो गए देव आनंद और सुरैया का रोमांस तब तक दम तोड़ चुका था। देव आनंद को सहारा चाहिए था। वह कल्पना कार्तिक में मिला। ‘नौ दो ग्यारह’ की शूटिंग बीच में छोड़ कर उन्होंने गुपचुप शादी कर ली। लेकिन उसके बाद कल्पना कार्तिक फिल्मों से गायब हो गईं और फिर किसी सार्वजनिक समारोह तक में नहीं दिखीं। यहां तक कि देव आनंद के निधन के वक्त भी वे नहीं दिखीं। पत्नी को घर में कैद कर देव आनंद अन्य हीरोइनों के साथ अपनी रोमांटिक छवि निखारते रहे।

एक समय था जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह का रोमांस बेहद चर्चित हुआ था। डेढ़ दर्जन फिल्मों वे साथ आए। उनके बीच के बेहतर तालमेल ने युवा रोमांस की फिल्मों में एक अलग परिभाषा गढ़ दी। दोनों की शादी एक बड़ी घटना के रूप में देखी गई। लेकिन तब नीतू सिंह ने घर गृहस्थी को प्राथमिकता दी। जानकारों का मानना है कि शादी के बाद भी दोनों के बीच की कैमिस्ट्री गजब ढा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। दोनों को किसी फिल्म में साथ लाने की कोई कोशिश सफल नहीं हो पाई। यह संभव हुआ कई साल बाद जब दोनों का बेटा रणवीर कपूर स्टार बन चुका था। 

‘दो दूनी चार’ व ‘बेशर्म’ के अलावा ‘जब तक है जान’ की संक्षिप्त भूमिका में ऋषि कपूर व नीतू सिंह पति पत्नी के रूप में जरूर आए लेकिन रोमांटिक कोण की बजाए एक परिपक्व रिश्ते की छाप उसमें रही। ऋषि कपूर के बड़े भाई रणधीर कपूर ने भी बबिता से रोमांस के बल पर कुछ फिल्मों को चला दिया लेकिन पति-पत्नी बनते ही बबिता फिल्मों से अलग हो गईं। उसके बाद दोनों के रिश्तों में आई खटास की वजह से बबिता के फिर रणधीर कपूर के साथ किसी फिल्म में नजर आने की संभावना ही नहीं बन पाई।

वैसे तो ऐसी कई हीरोइनें हुईं हैं जिन्होंने सिर्फ एक ही फिल्म की। लेकिन भाग्यश्री जैसी सफलता किसी को नहीं मिली। सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी ‘मैंने प्यार किया’ की सफलता ने उन्हें स्टार बना दिया। कई फिल्मों के प्रस्ताव उन्हें मिले लेकिन उन्हें स्वीकार करने की बजाए भाग्यश्री ने उद्योगपति हिमालय से शादी करना बेहतर समझा। उसके बाद जिद ठान ली कि वे पति के अलावा फिल्म में किसी और के साथ रोमांटिक जोड़ी नहीं बनाएंगी। ‘मैंने प्यार किया’ की ख्याति की वजह से भाग्यश्री की यह शर्त मान भी ली गई और पति-पत्नी के हिस्से में एक दर्जन के करीब फिल्में आ गईं। लेकिन ‘पायल’, ‘त्यागी’ व ‘कैद में है बुलबुल’ की नाकामी ने भाग्यश्री और हिमाचल की रोमांटिक जोड़ी को सिरे से खारिज कर दिया।

काजोल और अजय देवगन की शादी चौंकाने वाले अंदाज में हुई। दोनों के स्वभाव में जमीन आसमान का फर्क था। हालांकि जहां तक करिअर का सवाल था, दोनों ने अपना एक अलग मुकाम बना लिया था। शादी से पहले दोनों ने ‘गुंडाराज’, ‘हलचल’ व ‘प्यार तो होना ही था’ में साथ काम किया था। शादी के बाद आम फिल्मी चलन निभाते हुए काजोल फिल्मों से अलग हो गई। उन्होंने वापसी भी की। वापसी में शानदार सफलता पा कर उन्होंने इस धारणा को झुठला दिया कि शादी शुदा हीरोइन को पहले जैसी सफलता व स्वीकार्यता नहीं मिल सकती। लेकिन काजोल ने जो सफलता शाहरुख खान या आमिर खान के साथ पा ली, वह अपने पति अजय देवगन को नहीं दिला सकीं।

 ‘राजू चाचा’, ‘यू मी और हम’ व ‘दिल क्या करे’ में अजय देवगन व काजोल की जोड़ी व्यावसायिक तौर पर सफल नहीं हो पाई। कहा नहीं जा सकता कि यह फिल्मों के लचर होने की वजह से हुआ या उनकी जोड़ी अपेक्षित असर नहीं डाल पाई। लेकिन यह तो साबित हो गया कि पति-पत्नी को फिल्म की रोमांटिक जोड़ी के रूप में स्थापित कर पाना आमतौर पर आसान नहीं होता।

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