गणतंत्र और 26 जनवरी की परेड

इस देश में जरा-जरा सी बात पर हंगामा खड़ा होता रहा है। नवीनतम मामला हाल में केंद्र सरकार द्वारा कुछ राज्यों को गणतंत्र दिवस की परेड में अपनी झांकी न दिखाने देने का है। इसे राज्य राजनीति से प्रेरित बताकर फैसले की आलोचना कर रहे हैं। हर साल गणतंत्र दिवस की परेड में झांकियां हिस्सा लेती हैं। इस बार 15 राज्यों एक केंद्र शासित प्रदेश व 6 मंत्रालयों या विभागों की झांकियों को परेड के लिए चुना गया है।

ध्यान रहे कि राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने हिस्सा लेने के लिए 32 व 24 मंत्रालयों व विभागों ने अपने प्रस्ताव सरकार में भेजे हैं। मालूम हो कि झांकियां तय करने का अधिकार रक्षा मंत्रालय को होता है। वहां एक कला व संस्कृति विशेषज्ञों की टीम होती है जोकि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों व विभागों से झांकी के आवेदन मांगती है।

इस साल होने वाली परेड के लिए अपने प्रस्ताव देने की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी। दो बार बैठक करके कमेटी अपना चयन करती है। अंतिम फैसला करने के पहले कमेटी उनसे थ्रीडाइमेंशल मॉडल देखती है। यह झांकियां एक तय थीम के आधार पर बनाई जानी चाहिए। इसका सारा खर्च झांकी बनाने वाले राज्य के मंत्रालय को ही उठाना पड़ता है। हर झांकी पर कोई लोगो नहीं लगाया जा सकता है। उस पर उस राज्य या मंत्रालय का सामने हिंदी में व पीछे अंग्रेजी का वहां की भाषा में नाम लिखा जा सकता है।

ध्यान रहे कि पश्चिम बंगाल व कुछ अन्य राज्यों की झांकियां शामिल नहीं की गई। पश्चिम बंगाल का आरोप है कि चूंकि उसने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया था। इसलिए उसे यह सजा दी गई। केरल की वामपंथी सरकार, महाराष्ट्र की शिवसेना व एनसीपी सरकार के मॉडल भी ठुकरा दिए गए। वे भी केंद्र पर भेदभाव के आरोप लगा रही है। जिन 15 राज्यो को चुना गया है उनमें से 8 भाजपा शासित व 7 गैर-भाजपा शासित सरकारे है।

ध्यान रहे कि 26 जनवरी 1950 को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (1935) हटाकर उसकी जगह देश को संभालने के लिए नए संविधान को सक्रिय बनाने के कारण हम इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। यहां बता दे कि हमारे संविधन को संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को ही स्वीकार कर लिया था। पर यह 26 जनवरी 1950 को ही स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में अस्तित्व में आया। 26 जनवरी चुने जाने की वजह यही थी। इसी दिन 1929में देश के लिए पूर्ण स्वराज का ऐलान किया गया था।

हालांकि देश ने 1950 से ही गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन करना शुरू कर दिया था। माना कि पहले यह परेड इरविन स्टेडियम, नेशनल स्टेडियम, लालकिला मैदान, में आयोजित की जाती थी। इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में हर साल आयोजित किया जाता है। जिसे देखने के लिए लगभग दो लाख लोग आते हैं। यहां याद दिलाना जरूरी हो जाता है कि 1950 से 1954 तक राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक परेड आयोजित नहीं की गई थी। तब राजपथ का नाम किंग्स् वे था।

सरकार ने 1950 से दूसरे देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाना करना शुरू कर दिया था। सबसे पहले 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकार्णो को 26 जनवरी पर मुख्य अतिथि बनाया गया था। व पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को भी आमंत्रित किया गया था। इस मौके पर राष्ट्रपति के आने पर उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। मगर इसके लिए 21 तोफो का इस्तेमाल नहीं होता है। मगर 7 तोपे तीन-तीन बार उन्हें सलामी देती है।

सलामी राष्ट्रगीत शुरू होते ही शुरू हो जाती है व उसके खत्म होने पर 52 सेकेंड के अंदर ही पूरी हो जाती है। सलामी देने वाली इन तोपों को 1941 में तैयार किया गया था। परेड की तैयारी हर साल जुलाई में शुरू हो जाती है व इसमें हिस्सा लेने सुबह 2 बजे तैयार होकर तीन बजे अंधेरे में ही प्रारंभ बिंदु पर सब एकत्र हो जाते है।  सेना अपनी संबंधित रेजीमेंट से परेड की तैयारी अगस्त में शुरू करता है व दिसंबर को रेजीमेट दिल्ली पहुंचकर अपनी तैयारी शुरू करती है।  हिस्सा लेने वालो को करीब 600 घंटे अभ्यास करना पड़ता है। इंडिया गेट के पास टैंको, सैन्य सामग्री को एकत्र कर उसको पेंट किया जाता है। मुख्य परेड से कुछ दिन पहले परेड का अभ्यास किया जाता है जिसको 12 किलोमीटर की दूरी तक ले जाया जाता  है। जबकि 26 जनवरी को परेड नौ किलोमीटर की दूरी तय करती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि सेना के हथियारो में किसी तरह की गोली या बारूद न हो। जब मिस्र के राष्ट्रपति की परेड के दौरान हत्या हुई थी तो उसके बाद यह जांच और भी सख्त हो गई।

पहले राष्ट्रपति के सामने रूककर टैंक अपनी नली उनकी और मोड़कर उसे नीचे झुकाकर सलामी देते थे। मगर मिस्र के राष्ट्रपति की इस तरह से हत्या की गई थी सो उसके बाद टैंको को ऐसा करने से रोक दिया गया।  हिस्सा लेने वाली झाकियो को ट्रेक्टर पर बनाया जाता है जिनमें ड्राइवर के आगे एक हिस्सा काट दिया जाता है ताकि वे लोग उसे चलाते समय बाहर रखे।  हर साल इस दौरान अबाइड विद मी गीत बजाया जाता है जोकि महात्मा गांधी को बेहद पसंद था।

कहने को तो हम 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गए थे मगर देश का अपना संविधान न होने व उसे स्वीकार न करने के कारण ब्रिटिश संसद के फैसले ने ही भारत व पाकिस्तान को बांटा और व्यवस्था प्रारंभ की।  भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंभ हुआ और ब्रितानी राजशाही से मुक्त। पर  तब जार्ज षष्ठम देश के प्रमुख थे व माउंटबेटन दोनें देश के गर्वनर जनरल। तब तक देश में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत बनाए गए कानून ही लागू रहे।

29 अगस्त 1947 में संविधान सभा में मसौदा समिति बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ जिसे संविधान बनाना था। बीआर अंबेडकर इस समिति के अध्यक्ष थे। संविधान सभा ने 26 जनवरी 1950 को संविधान  स्वीकार किया व दो दिन बाद 28 जनवरी को यह पूरे देश में लागू हो गया व डा राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली वह संविधान सभा संसद में परिवर्तित हो गई। इसके साथ ही गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट समाप्त हुआ और भारत गणतंत्र घोषित।

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