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Thursday, May 13, 2021
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ये तबाही और इसके बाद

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जैसे- जैसे जानकारियां सामने आ रही हैं, देश की मौजूदा बर्बादी के पीछे सरकार की नाकामी पर से परदा हटता जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक ताजा एक्सक्लूसिव खबर में ब्योरे के साथ ये बताया है कि इंडियन सार्स-सीओवी-2 जेनेटिक्स कॉन्जर्टियम (आईएनएसीओजी) ने मार्च के आरंभ में ही भारत सरकार को ये चेतावनी दे दी थी कि एक नया और अधिक संक्रामक कोरोना वायरस अस्तित्व में गया है, जो भारी तबाही मचा सकता है। आईएनएसीओजी वैज्ञानिक सलाहकारों का समूह है, जिसे खुद सरकार ने गठित किया था। इस समूह से जुड़े पांच वैज्ञानिकों ने इस समाचार एजेंसी से कहा है कि उन्होंने ये रिपोर्ट उन बड़े अफसरों को सौंपी थी, जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैँ। लेकिन जाहिर है कि इस पर गौर नहीं किया गया। ये चेतावनी मिलने के बाद भी राजनीतिक रैलियों और बड़े धार्मिक जमावड़ों को जारी रखा गया। उधर ना तो खतरे के मद्देनजर इलाज के लिए जरूरी इंतजाम किए गए। नतीजा ये तबाही है, जिसके बारे में पहले कल्पना करना भी कठिन था।

ये बर्बादी कब थमेगी, अब किसी को नहीं मालूम। इसलिए कि जो विशेषज्ञ संक्रमण के आंकड़ों के आधार पर मॉडलिंग करते हैं, वे अपना मॉडल बताने के बाद यह जोड़ना नहीं भूलते कि चूंकि मिल रहे आंकड़े शायद पूरी तस्वीर नहीं बताते, इसलिए मुमकिन है कि उनके मॉडल भी पूर्णतः सटीक ना हों। बहरहाल, रेखांकित करने की बात यह है कि ये पूरी त्रासद कहानी मानव निर्मित है, जैसाकि विदेशी मीडिया दो-टूक कह रहा है। अब चूंकि इसका ही अनुमान नहीं लगाया गया और कदम नहीं उठाए गए, तो ये तबाही अपने पीछे जो मुसीबत छोड़ कर जाएगी, उसके लिए अभी से कोई तैयारी होगी, इसकी उम्मीद करना बेमायने है। जबकि कैसी मुसीबतें बनी रह सकती हैं, इसके संकेत मिलने लगे हैं। मसलन, एक बड़ी समस्या कोरोना संक्रमण के कारण जान गवां रहे ऐसे गरीब या निम्न आय वर्ग के लोगों की है, जिनके अनाथ बच्चों हो रहे हैं। मसलन, दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें दो बच्चों ने एक ही दिन में अपने माता-पिता को खो दिया। एक अन्य मामले में कोविड 19 की वजह से दो बच्चों ने अपने पिता को खो दिया। बच्चों के पास आश्रय का कोई स्थान नहीं था। बच्चों को नहीं पता था कि अब आगे क्या होगा। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ये बात किसी को मालूम नहीं है।

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