nayaindia free ration central government मुफ्त अनाजः बहुत अच्छा लेकिन....?
kishori-yojna
बेबाक विचार | डा .वैदिक कॉलम| नया इंडिया| free ration central government मुफ्त अनाजः बहुत अच्छा लेकिन....?

मुफ्त अनाजः बहुत अच्छा लेकिन….?

देश के 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और लगभग 25 लाख पूर्व सैनिकों को पेंशन में फायदे की घोषणा, जो सरकार ने अभी-अभी की है, उसका कौन स्वागत नहीं करेगा? ऐसी घोषणा अब से पहले किसी सरकार ने की हो, मुझे याद नहीं पड़ता। पिछली सरकारों ने संकट-कालों में तरह-तरह की रियायतों की घोषणाएं जरूर की हैं लेकिन 80 करोड़ लोगों को साल भर तक 35 किलो अनाज मुफ्त मिलेगा, यह बहुत बड़ी सौगात है। कोराना-काल के दो वर्षों में भी सरकार ने असमर्थ लोगों को एकदम कम दाम पर अनाज देकर काफी मदद पहुंचाई थी लेकिन अब उन्हें भी वह अनाज मुफ्त मिला करेगा। आप यह पूछ सकते हैं कि इतना अनाज सरकार मुफ्त में बांट देगी लेकिन वह इसे करेगी कैसे? इस समय सरकारी भंडार में लगभग 4 करोड़ टन अनाज भरा पड़ा है।

उसे अपने लोगों का पेट भरने के लिए विदेशों के आगे झोली फैलाने की जरूरत नहीं है। इंदिरा गांधी राज के वे दिन अब नहीं रहे, जब भारत को पी.एल.480 गेहूं अमेरिका से आयात करना पड़ता था। उन दिनों सैकड़ों लोग अकाल के दौरान मौत के शिकार हो जाते थे। आजकल भारत अनाज का बड़ा निर्यातक है। उसने कुछ पड़ौसी देशों को 50-50 हजार टन गेहूं भी भेंट किया है। इस बार सरकार मुफ्त अनाज वितरण पर 2 लाख करोड़ रु. खर्च करेगी लेकिन इस सरकारी उदारता पर मेरी त्वरित प्रक्रिया यह है कि जरूरतमंद लोगों को बिल्कुल मुफ्त अनाज देने की बजाय पहले की तरह उसकी कीमत 5-7 रू. प्रति किलो जरूर रखी जाए वरना इस उदार रियायत पर वह कहावत लागू होगी कि ‘माले-मुफ्त, दिले-बेरहम’! इस अनाज पर तरह-तरह का भ्रष्टाचार होगा। लोग इसे इकट्ठा करेंगे और बाजार भाव पर बेचेंगे। अफसरों, व्यापारियों और दलालों की मिलीभगत इसे वास्तविक गरीबों तक पहुंचने ही नहीं देगी। मुफ्त अनाज की तरह भारत की चिकित्सा और शिक्षा भी मुफ्त होनी चाहिए लेकिन उस पर भी नाम-मात्र का शुल्क जरूर रखा जाना चाहिए। यदि देश के असमर्थ लोगों को अनाज, शिक्षा और चिकित्सा लगभग मुफ्त मिलने लगे तो अगले दस साल में भारत को महासंपन्न और महाशक्तिशाली बनने से कोई रोक नहीं सकता। जो सरकार ये तीनों चीजें असमर्थ जनता को सुलभ करवा देगी, उसे दशकों तक कोई हटा नहीं सकता।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

11 − six =

kishori-yojna
kishori-yojna
ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
सरकार छोटे किसानों के साथ मजबूती से खड़ी :राष्ट्रपति
सरकार छोटे किसानों के साथ मजबूती से खड़ी :राष्ट्रपति