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Saturday, April 17, 2021
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खुशबू का भाजपा में शामिल होना

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आज कल फिल्म अभिनेताओं- निर्माताओं का राजनीति में आना बहुत आम बात हो गई है। मगर एक समय था जब गिने चुने ही अभिनेता राजनीति में आते थे या उन्हें राजनीतिक दल चुनाव लड़ने का मौका दिया करते थे। फिर तो अमिताभ बच्चन से लेकर धर्मेद्र और हेमामालिनी व वैजयंती माला तक राजनीति में आई और फिर राजनीति में हमारे फिल्म अभिनेता हावी होने लगे।

यही नहीं जहां एक ओर जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं व एनटी रामाराव ने दलबदल करना भी सीख लिया। नवीनतम मामला, दक्षिण भारत की जानी मानी अभिनेत्री खुशबू सुंदर का है। खुशबू का परिचय बहुत मजेदार है। वे तमिल की जानी मानी अभिनेत्री हैं। उन्होंने कन्नड़, मलयालम व तेलगू फिल्मों में भूमिकाएं की। सबसे अहम बात यह है कि धर्म से मुसलमान होने के बावजूद उन्होंने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया।

खुशबू का जन्म मुंबई के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। मुंबई में 1970 में जन्मी इस अभिनेत्री ने जानी मानी 200 फिल्मों में काम किया। उसे केरल व तमिलनाडू के सरकारी आवार्ड मिल चुके हैं। उसने अपना अभिनय हिंदी में फिल्म द बर्निंग ट्रेन से 1980 में शुरु किया था व तेरी जमीन है, तेरा आसमान नामक गाने के कारण बहुत चर्चित हुई थी।

उसने हिंदी फिल्मों नसीब, लावारिस, कालिया, दर्द का रिश्ता में भी काम किया। उसने हिंदी फिल्म मेरी जंग, में जावेद जाफरी के साथ नृत्य किया था। वह काफी चर्चित हुआ। उसने जाने माने दक्षिण भारतीय अभिनेता जैसे रजनीकांत, कमल हसन, विजयकांत, चिरंजीवी, अंबरीष आदि के साथ भी हेरोइन की भूमिका अदा की। वह देश में अकेली ऐसी अभिनेत्री हैं जिनके प्रशंसकों ने उनका मंदिर बनाया था।

यह गौरव और किसी भारतीय अभिनेत्री को नहीं मिला। उनकी लोकप्रियता के कारण तमिलनाडू में खुशबू इडली, खुशबू झुमको से लेकर खुशबू साड़ी काफी लोकप्रिय रही है। खुशबू ने 2010 में डीएमके में शामिल होकर राजनीति में प्रवेश किया था। तत्कालीन डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने उन्हें खुद पार्टी में शामिल करवाया था। करुणानिधि उस समय तमिलनाडू के मुख्यमंत्री भी थे। उस समय खुशबू की प्रसिद्धि अपने शिखर पर थी। उन्होंने तमिलनाडू के जाने माने समाज सुधारक की आत्मकथा पर बनी फिल्म मनिमरमाई में भी उनकी हिरोइन के रुप में अभिनय किया था।

मगर जब पार्टी पर करुणानिधि के बेटे एम स्टालिन का प्रभाव बढ़ा तो उनकी खुशबू के साथ नहीं पटी और दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी। अंततः उन्होने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया। क्योंकि उस समय पार्टी में उन्हें स्टालिन भाव नहीं दे रहे थे व कांग्रेस के पास इस प्रदेश में कोई अच्छा फिल्म स्टार नेता नहीं था। अतः वे नवंबर 2014 में कांग्रेस में शामिल हो गईं। उन्हें पार्टी में लाने में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ईवीके एस इलानगोवन की अहम भूमिका रही। उन्होंने 2014 के लोकसभा व 2016 के विधानसभा चुनाव में खुशबू के साथ मिलकर चुनाव प्रचार किया।

बाद में इलानगोवन को पार्टी से निकाल दिया गया। मगर यहां भी उनकी दाल नहीं गली और उनके यहां द्रमुक जैसे हालात पैदा होने लगे। यहां भी बड़े नेताओं ने उन्हें दरकिनार करना शुरु कर दिया। उनका मुंहफट होना पार्टी नेताओं को पसंद नहीं आया। हालांकि अपने इन्हीं गुणों या दोषों के कारण वे विवाद में आती रही थी। एक बार उन्होंने कहा था कि शादी के पहले सैक्स संबंध बनाने में कुछ गलत नहीं है। हमारे समाज के इस सोच से बाहर निकलना चाहिए कि शादी के समय लड़की ने पहले कभी सेक्स नहीं किया है वह वर्जिन या अछूती हो। यह कहने पर उनके खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दायर किए गए व अंततः वह 2010 में सभी दो दर्जन मुकदमें से बरी घोषित कर दी गई।

जब वे भाजपा में नहीं थी तब उनके तमाम विचारों को लेकर प्रदेश वे देश में जमकर विरोध होते थे। इनकी वजह यह थी कि उन्हें भाजपा का कट्टर विरोधी माना जाता था व उनकी जमकर आलोचना किया करती थी। उन्होंने दिसंबर 2013 में तब बहुत बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था जब उन्होंने एक ऐसी साड़ी पहनी थी जिस पर राम, कृष्ण व हनुमान भगवानों के चित्र छपे हुए थे। तमिलनाडू में भाजपा सरीखी पार्टी हिंदू महाकाल काची ने इस पर कड़ी आपत्ति प्रकट की व उनकी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए कहा। ऐसा न करने पर देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया।

तब उन्होंने कहा था कि मैं हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे के आरोपों पर अपनी सफाई नहीं दूंगी। यह लोग एक महिला से इतना घबराए हुए क्यों है। क्या इन लोगों के पास कोई और काम नहीं है। हिंदू काची महाकाल  ने उनके खिलाफ जो मुकदमे दायर किए उन पर सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती आदि देवियों के सामने चप्पल पहन कर घूमने का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि यह कदम उन्होंने एक पूजा के मुहुर्त के मौका पर उठाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बाद में यह मुकदमा खारिज किया। उन्होंने 2017 में इंडियन फिल्म फेस्टीवल मेलबोर्न आयोजक मीतू भौमिक याग्निक पर प्रादेशिक फिल्मों की अनदेखी कर अपमान करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भारतीय सिनेमा का मतलब सिर्फ बालीवुड है। उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्मों व सिनेमा काफी पसंद है। उनकी गिनती उन अभिनेत्रियों मे की जा सकती है जिनके तस्वीर का सबसे ज्यादा बेजा इस्तेमाल हुआ है। उनकी गर्दन व सिर अक्सर नग्न तस्वीर पर लगा कर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की घटनाएं होती रहती हैं। वे अक्सर इस मामले को अदालत भी ले गई है।

जब वे डीएमके व कांग्रेस में थी तब वे भाजपा की जमकर आलोचना किया करती थी। अब वे भाजपा के बड़े नेताओं में शामिल हो गई हैं। अब वे नए अवतार में आ गई है। अब वे वहां विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के लिए जमकर प्रचार करेगी और वे खुद भी राज्यसभा में पहुंचना चाहती हैं। उनका मानना है कि उनके चुनाव प्रचार से भाजपा को चुनावी लाभ होगा। अब देखना यह है कि वे कब तक यहां रुकती है व उन्हें पार्टी क्या देगी।

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