nayaindia agneepath scheme protest अग्निपथ में भारत!
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप | बेबाक विचार| नया इंडिया| agneepath scheme protest अग्निपथ में भारत!

अग्निपथ में भारत!

गजब है भारत की नियति! भारत के मालिक भले किस्मत के कितने ही धनी हों, पर भारत को तो जलना ही है। मैं इस सप्ताह आर्थिकी, बुलडोजर, ईडी की अग्निपरीक्षा में राहुल और कांग्रेस, राष्ट्रपति चुनाव की हलचल पर गपशप करने के मूड में था। अचानक मुझे फोन पर रामावतारजी ने सूचना दी कि शेयर मार्केट भारी लुढ़क रहा है और बिहार में लड़के ट्रेनें जला रहे हैं। लडकों ने भाजपा का दफ्तर जला दिया। मैंने सुना-अनसुना कर इतना ही कहा यह सब तो होना ही है। पर फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “अग्निपथ” के नए जुमले का अर्थ कौंधा। मोदी ने अपनी जुबानी सचमुच अपनी कमान का भारत भाग्य बताया है। भभकता भारत। धधकता भारत! गर्माता भारत। झुलसता भारत। गर्मियां निकालता भारत। गर्मियां बुझाता भारत। माचिसें बांटता भारत। तिलियां जलाता भारत। अग्निपथ बनाता भारत। अग्निवीर पैदा करता भारत। और अंत में हर तरफ उछलते-कूदते-पूंछ में आग लिए, आग फैलाते लंगूरी भस्मासुर!

वाह! नोटबंदी के बाद से मेरे लगातार लिखे जाते भारत भविष्य की क्या गजब पुष्टि। ‘अग्निपथ’ और नौजवानों की अग्नि से ‘स्वाह’ होने की नई झांकियां। उस नाते यह कहने में हर्ज नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने ‘नोटबंदी’ से लेकर ‘अग्निपथ’ तक भारत की ऊर्जाओं, पुरुषार्थ, उम्मीदों का जो खेला बनाया है, विध्वंस, गृहयुद्ध की स्क्रिप्ट के जो सेट बनाए हैं उसका सबसे भयावह और त्रासद परिणाम यदि कोई है तो वह 140 करोड़ आबादी के बहुसंख्यक नौजवानों का लंगूरीकरण है।

‘नया इंडिया’ में ‘अग्निपथ’ पर अजीत द्विवेदी ने अपने कॉलम में विस्तार और बारीकी से सेना के आधुनिकीकरण और वक्त के तकाजे में ‘अग्निपथ’ योजना का औचित्य समझाया है। संपादकीय और डॉ. वैदिक के कॉलम में शंका, संभावना में पक्ष-विपक्ष से ‘अग्निपथ’ को बुझा गया। लेकिन जिस त्वरित रिएक्शन में नौजवानों ने ‘अग्निपथ’ का अर्थ निकाला तो वह क्या बताता हुआ है? मानों यह सरकार का धोखा है, छल है। भारत की सेना में भर्ती को आंगनवाड़ी की भर्ती जैसा बना डालना है, जिसमें न पूरी तनख्वाह, न स्थायित्व और न भविष्य की गारंटी।

कल्पना करें कि सभी सेना प्रमुखों के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नई योजना की घोषणा होना और तुरंत नौजवानों में उसका उलटा रिएक्शन! ऐसा कृषि बिलों के साथ भी हुआ था। किसान तुरंत रिएक्ट हुए क्योंकि उन्हें भी धोखा-छल समझ आया। और यह बात पिछले आठ वर्षों में नरेंद्र मोदी के मुंह से निकली हर योजना, घोषणा, जुमले के ऊपर लागू है। अच्छे दिनो का वादा महंगाई, बेरोजगारी, हिंसा-तनाव-असुरक्षा-चिंताओ की पटरियों पर धू-धू हो कर जल चुका है। अब खुद मोदी के मुंह से वह जुमला नहीं निकलता है। पांच ट्रिलियन की ओर भागती आर्थिकी का हल्ला गिरते हुए रुपए, जर्जर-खोखले-झूठे आंकड़ों में कभी का स्वाहा हो चुका है। सबका साथ-सबका विकास पर जहां बुलडोजर चलते हुए है वहीं समाज में मुसलमान हो, एससी, एसटी हो या जातियों की भूख हो सभी के दिल-दिमाग में गुस्सा ऐसा सुलगता-भभकता हुआ है कि तय मानें हिंदुओं का इतिहास पुराने अग्निपथों में अनिवार्यतः रिपीट होना है।

हम क्योंकि भस्मासुरी-लंगूरी वक्त में जी रहे हैं इसलिए सतह पर नहीं दिख रहा है कि नौजवान आबादी किस तरह व्यवहार करते हुए है? मगर हिंदुओं और मुसलमानों, दलितों, जातियों के आंदोलन करते नौजवान चेहरों पर गौर करें? नंबर एक डरावना सत्य है कि सबके तेवर खदबदाते हुए हैं। भक्त नौजवान मुसमलानों को ठीक कर देने, नफरत फैलाने, लड़ने के तेवर दिखाते हुए हैं तो मुस्लिम नौजवानों के चेहरे भी कम भभके हुए नहीं हैं। हिंदू-मुस्लिम के अग्निपथ में आगे समाज का स्वाह होना इसलिए तय है क्योंकि लड़कों के पास दूसरा काम ही नहीं है। नौकरी-रोजगार है नहीं। समझ-बुद्धि है नहीं और व्हाट्सऐप स्कूल में नफरत का पोषण प्रतिदिन हैं तो कुरबानी, लड़ाई व बरबादी का अग्निपथ तय है। ऊपर से सत्ता के बुलडोजर गर्माई और गुस्सा दोनों को नित नए प्रयोगों से बढ़ाते हुएल है।

तभी मस्जिद हो, मंदिर हो, सड़क हो प्लेटफॉर्म या रेल की पटरियां सब भारत के अग्निपथ की मंजिल हैं। मोदी—शाह-योगी का भाग्य भारत का क्यों कर अग्निपथ है, यह सत्य वक्त के साथ साल-दर-साल इसलिए प्रमाणित होगा क्योंकि दूसरी न कोई मंजिल है और न काम है।

गौर करें, याद करें आरक्षण से लेकर नौकरियों के तमाम आंदोलनों में दिखते नौजवान चेहरों पर! उफ! कितनी बेरोजगारी, सुबह से शाम तक रट्टा मार तैयारियां और बेचारों के लिए नतीजा जीरो। भारत ने सर्वशिक्षा और नेताओं की फ्रॉड सर्वज्ञता में कच्चे दिमागों को ऐसा फितूरी बना डाला है कि देश को अग्निपथ में स्वाहा होना ही है। आप नहीं मानते? न मानें। मैं तो नोटबंदी के बाद लगातार इस भविष्यवाणी को दोहराते हुए हूं कि इंतजार कीजिए, ध्वंस से सब सही साबित होता जाएगा। नरेंद्र मोदी न केवल हिंदुओं की वैश्विक बदनामी करवाने वाले युगपुरूष होंगे, बल्कि हिंदुओं के राजनीतिक दर्शन, संघ परिवार का भी वैसा ही बाजा बजवाने वाले होंगे, जैसे नवादा में भाजपा दफ्तर अभी अग्निपथ का शिकार हुआ।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published.

3 × 2 =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
….शाहरुख खान की रणनीति
….शाहरुख खान की रणनीति