Hindu Rashtra India Intolerance यह कैसा भारत बन रहा है?
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यह कैसा भारत बन रहा है?

Hindu Rashtra India Intolerance

सात साल से भारत को महान बनाने की कोशिश हो रही है। बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सात साल पहले का भारत ऐसा था, जहां जन्म लेने की वजह से लोगों को शर्मिंदा होना पड़ता था। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत को फिर से महान बनाने का बीड़ा उठाया और उनके प्रयासों से भारत आज महान बनने के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन सवाल है कि इतिहास के किसी कालखंड में भारत जब महान था या विश्वगुरू था तब क्या ऐसा ही था? इतिहास के सामान्य से विद्यार्थी को भी पता है कि तब भारत ऐसा नहीं था। जिस समय भारत धर्म, अध्यात्म, ज्ञान, विज्ञान और व्यापार का केंद्र था तब भारत एक सहिष्णु और सर्वधर्म समभाव वाला देश था। तब भारत में किसी के खाने-पीने, पहनने, सोचने-विचारने, कारोबार करने या विवाह संबंध बनाने पर कोई पाबंदी नहीं थी और न उनके ऊपर शर्तें आरोपित थीं। Hindu Rashtra India Intolerance

अल्लामा इकबाल ने ‘तराना ए हिंद’ में लिखा, ‘यूनान ओ मिस्र और रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नाम ओ निशां हमारा, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा’। आखिर वह क्या बात थी, जिसकी वजह से हमारी हस्ती मिटती नहीं है? सहिष्णुता, सद्भाव और सर्वधर्म समभाव वह बात है, जिसकी वजह से इस देश की हस्ती नहीं मिटी। सारी दुनिया में कोई देश ऐसा नहीं है, जहां इतनी संस्कृतियां एक साथ विद्यमान हों और जहां सभ्यता की निरंतरता पांच हजार साल से बदस्तूर कायम हो। प्राचीन काल में जो चार मुख्य सभ्यताएं थीं, उनमें भारत ही एकमात्र सभ्यता है, जिसकी निरंतरता बनी हुई है। इसके अलावा चीन, यूनान-रोम और मिस्र-मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यता का मामूली सा भी अवशेष इन देशों में नहीं बचा है। इन सबसे पुरानी सभ्यता भारत की है, जिसके बारे में एएल बाशम ने लिखा कि, ‘ओल्ड टेस्टामेंट में लिखी गई सबसे पुरानी बात भी ऋग्वेद की सबसे नई ऋचा से बाद की है’। इसके बावजूद इसकी परंपराएं आज भी प्रचलन में हैं।

ऐसे भारत को फिर से महान बनाने के नाम पर क्या बनाया जा रहा है? जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान बनाने के नाम पर दुनिया के इस सबसे प्रगतिशील और आधुनिक विचार वाले देश को एक विभाजित, कट्टरपंथी, असहिष्णु और कमजोर समाज में बदल दिया था उसी तरह पिछले सात साल से भारत को असहिष्णु, वैचारिक रूप से दिवालिया, आर्थिक रूप से कंगाल और सामाजिक-धार्मिक रूप से कट्टरपंथी देश में बदला जा रहा है। यह सही है कि आज का भारत विश्वगुरू भारत की छाया भर भी नहीं है लेकिन कुछ धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्य आज तक बचे हुए थे, जिनसे यह उम्मीद थी कि भविष्य में भारत अपने पुराने गौरव को हासिल कर लेगा। लेकिन अब सुनियोजित तरीके से उसे भी खत्म किया जा रहा है।

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आज के भारत में धर्म और आस्था के नाम पर चारों तरफ पाबंदियों के घेरे बनाए जा रहे हैं। आप यहां प्रार्थना नहीं कर सकते हैं। आप वहां खाना नहीं खा सकते हैं। आप अपनी पसंद के कपड़े नहीं पहन सकते। आप अपनी पसंद से शादी नहीं कर सकते हैं। आप अमुक जगह पर अमुक सामान नहीं बेच सकते हैं। आप अपनी कला का प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। आप अपनी शिकायत का सार्वजनिक रूप से इजहार नहीं कर सकते हैं। पार्क में महिला-पुरुष एक साथ नहीं बैठ सकते हैं। मसाज पार्लर में विपरीत लिंग के लोग एक दूसरे की मसाज नहीं कर सकते हैं। दुनिया के दूसरे देश में जाकर भी आप अपने मन की बात नहीं कर सकते हैं। यह बेहद डरावने समय की आहट है। इसकी अनदेखी एक समाज के रूप में भारत को खत्म कर देगी।

पिछले सात साल से भारत को महान बनाने का जो प्रयास हुआ है उसका क्या हासिल है? उसका हासिल यह है कि अपने कंधे पर लाद कर कश्मीरी शॉल बेचने वालों को झारखंड में पकड़ कर उनसे जय श्रीराम के नारे लगवाए जा रहे हैं! मुनव्वर फारूकी को नहीं बोले गए एक चुटकुले के लिए पकड़ कर जेल में डाल दिया जाता है और उसके बाद मुट्ठी भर हुड़दंगियों के अंदेशे से अलग अलग राज्यों की पुलिस उसके कार्यक्रम रद्द कर रही है! गुजरात में सड़क के किनारे मांसाहारी सामान बेचने वालों को ठेले हटवाए जा रहे हैं! दिल्ली से सटे गुरुग्राम में लोगों को सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने से रोक दिया गया है! अमेरिका में स्टैंडअप कॉमिक के लिए वीर दास के ऊपर भारत में मुकदमे किए जा रहे हैं! लोगों को अपनी पसंद से शादी करने से रोकने के लिए कई राज्यों ने कानून बना दिए हैं! असम सरकार ने मसाज पार्लर में विपरीत लिंग के लोगों के एक-दूसरे की मसाज करने पर पाबंदी लगा दी है। बेंगलुरू में पब में बैठी महिलाओं से मारपीट की जा रही है! आप अगर सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायत का इजहार करते हैं तो आपके ऊपर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून यानी यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, जैसा कि त्रिपुरा में किया गया! अगर सड़क पर आप प्रदर्शन करने निकलते हैं तो संभव है कि आपको देशद्रोही बताया जाए, आपके ऊपर सरकारी कामकाज में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगे और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आपसे जुर्माना वसूला जाए!

हिंदू धर्म को मजबूत करने और देश को महान बनाने के लिए इतना सब कुछ किए जाने के बाद भी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को लग रहा है कि हिंदुओं की ताकत घट रही है। उनको पता नहीं किस कारण से ऐसा लगा लेकिन यह हकीकत है कि इस तरह की घटनाओं से हिंदू, उसका समाज, उसका धर्म और उसका देश चारों कमजोर हुए हैं। शांति, सहिष्णुता, सद्भाव और सर्वधर्म समभाव की उसकी बुनियादी ताकत का ह्रास हुआ है। धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाने की साजिशें, वोट के लिए जातियों के विभाजन की राजनीति, धर्म की रक्षा के नाम पर कला के प्रदर्शन को रोकने, अपना एकछत्र राज कायम करने के लिए असहमति की आवाजों को दबाने और सांस्कृतिक शुचिता के नाम पर प्रगतिशील विचारों को रोकने की कोशिशें अंततः इस देश की बुनियाद को और खोखला बनाएंगी।

By अजीत द्विवेदी

पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।

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