hindu muslim politics yogi यूपी का हर मुद्दा हिंदू-मुस्लिम!
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यूपी का हर मुद्दा हिंदू-मुस्लिम!

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी किसी तरह से हर मुद्दे को हिंदुत्व से जोड़ रही है, मुसलमान से जोड़ रही है और तालिबान से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकल्प लिया लगता है कि वे अपने हर भाषण में वेतीन-चार बार तालिबान का जिक्र जरूर करेंगे। किसी न किसी मसले को या किसी न किसी विपक्षी नेता को तालिबान से जोड़ेंगे। उन्होंने 15 अगस्त को अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा करने के बाद जोर शोर से राज्य की सभी विपक्षी पार्टियों को तालिबान का समर्थक सिद्ध करना शुरू किया है और राज्य के लोगों में भय बनाया है कि तालिबान आ जाएगा। hindu muslim politics yogi

उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुताबिक योगी राज की सबसे बड़ी उपलब्धि कानून व्यवस्था सुधरने की है, जिसे सीधे तौर पर हिंदू-मुस्लिम से जोड़ा जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर गए तो उन्होंने भी अपने भाषण में मुख्तार अंसारी का नाम लिया। हर भाषण में भाजपा के नेता बता रहे हैं कि योगी राज में किस तरह से मुख्तार अंसारी का घर गिराया गया और अतीक अहमद के घर और मॉल गिराए गए। बात बात में अफजल और शिबगतुल्ला अंसारी का जिक्र किया जाता है। खुलेआम आंकड़े गिनाए जाते हैं कि यूपी पुलिस ने मुठभेड़ करके जिन अपराधियों को मार गिराया है या घायल करके छोड़ा उनमें सबसे ज्यादा मुस्लिम हैं। इस तरह कानून व्यवस्था का मुद्दा सीधे सीधे हिंदू-मुस्लिम से जोड़ा जा रहा है।

सरकार की दूसरी उपलब्धि शहरों और स्टेशनों के नाम बदलने की है। यह मुद्दा भी हिंदुत्व से जुड़ा है क्योंकि सिर्फ मुस्लिम नाम ही बदले जा रहे हैं। पहले मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल कर दीनदयाल उपाध्याय नगर किया गया। फिर फैजाबाद का नाम अयोध्या किया गया और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आजमगढ़ का नाम आर्यमगढ़ किया जाएगा। अलीगढ़ का नाम बदलने की भी चर्चा थी लेकिन वह थोड़े समय के लिए स्थगित है।

विकास के नाम पर तीसरी उपलब्धि जो बताई जाती है वह अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की है या काशी में विश्वनाथ मंदिर के कॉरिडोर निर्माण की है। इसी तर्ज पर पिछले दिनों विंध्यवासिनी देवी के मंदिर के सामने भी कॉरिडोर के निर्माण का ऐलान किया गया। इसी से जुड़ा चौथा विकास हर साल अयोध्या में दीपावली मनाने और हर साल ज्यादा से ज्यादा दीये जलाने का विश्व रिकार्ड बनाने का है। सवा लाख दीयों से शुरू हुआ सफर अब 12 लाख दीयों तक पहुंच गया है। विकास की पांचवी उपलब्धि यह है कि पहले सिर्फ कब्रिस्तान बनते थे, अब श्मशान भी बन रहे हैं।

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हालांकि इतने श्मशान बनाने के बावजूद कोरोना के दौरान श्मशान कम पड़ गए। लगता है और श्मशान बनाने होंगे ताकि लोगों को अपने प्रियजनों और परिजनों का शव गंगा में बहाना न पड़े या गंगा किनारे दफनाने की जरूरत न पड़े। लेकिन श्मशान बनाने का भी क्या कहा जाए, दिल्ली से सटे गाजियाबाद में नया श्मशान बना था और तीन महीने के अंदर ही एक अंतिम संस्कार के समय श्मशान की छत गिर गई, जिसमें 25 लोग मर गए। जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार हो रहा था, उसके बेटे की भी वहीं मौत हो गई। यह हिंदुत्व के नाम पर होने वाले विकास की एक छोटी सी कीमत थी।

इस विकास के आगे का जो लक्ष्य है वह मथुरा और काशी का है या कृष्णभक्तों की कारसेवा का है, जिसका जिक्र पिछले दिनों दीपावली के उत्सव के दौरान अलग अलग तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया। मौर्य ने पुराना नारा दोहराते हुए कहा कि अयोध्या अब हमारी है, मथुरा-काशी की बारी है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि बहुत पहले राम मंदिर की कारसेवा के समय कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने परोक्ष रूप से मथुरा का हवाला दिया और कहा कि अब अगर कारसेवा होती है तो रामभक्तों या कृष्णभक्तों पर गोली नहीं बरसाई जाएगी, बल्कि पुष्पवर्षा होगी।

सरकार की उपलब्धियों का पूरा कनेक्शन हिंदू-मुस्लिम से तो जुड़ा है ही विपक्ष पर हमला भी जिन मुद्दों से किया जा रहा है वो भी हिंदू-मुस्लिम से ही जुड़ा है। जैसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेएएम यानी जैमदिया जिसका मतलब जनधन खाता, आधार और मोबाइल है दूसरी ओर विपक्ष के जैमका मतलब जिन्ना, ओवैसी और मुख्तार है। सोचें, जिन्ना की कब्र पर चादर चढ़ाने और सेकुलर बताने वाले लालकृष्ण आडवाणी के तो भाजपा नेता पैर छूते हैं, लेकिन जिन्ना का जिक्र करने भर से अखिलेश मुस्लिमपरस्त हो जाते हैं। बहरहाल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष पर हमला करते हुए बार बार बताते हैं कि 30 साल पहले कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। वे जनता के बीच यह मैसेज देना चाहते हैं कि अखिलेश अपने पिता को अब्बाजान कहते हैं। सो, कुल मिला कर प्रचार अब्बाजान बनाम पिताश्री, श्मशान बनाम कब्रिस्तान और अली बनाम बजरंग बली का है।

सवाल है कि ऐसा क्यों है कि राज्य में पांच साल तक डबल इंजन की सरकार चलाने के बाद भाजपा को अपने कामकाज और उपलब्धियों के नाम पर सिर्फ सांप्रदायिक मुद्दे ध्यान आ रहे हैं? क्या सरकार ने कोई काम नहीं किया है? यह कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा कि सरकार ने कुछ नहीं किया है क्योंकि सरकार चाहे जितनी भी निकम्मी हो एक बार कामकाज शुरू हो जाने के बाद उसे रोक नहीं सकती है। न्यूटन की गति के दूसरे नियम के मुताबिक एक बार कोई काम शुरू करने के लिए बड़ा बल लगाने की जरूरत होती है, उसके बाद वह काम तब तक चलता रहता है, जब तक शुरू करने में लगाए गए बल से ज्यादा बड़ा बल उसे रोके नहीं। उसी नियम के हिसाब से देखें तो काम चल रहा है। सड़कें बन रही हैं, इमारतें बन रही हैं, स्कूल-कॉलेज-अस्पताल आदि की नींव रखी जा रही है या उद्घाटन हो रहे हैं। लेकिन सरकार और भाजपा को पता है कि यह चुनाव जिताने के लिए पर्याप्त नहीं है। अब लोग इतने से संतुष्ट नहीं होते हैं। उनकी आकांक्षा बड़ी है और पार्टियों ने सपने बड़े दिखा रखे हैं। दूसरे, कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सरकार हर मोर्चे पर विफल रही। सो, उपलब्धियों के मोर्चे पर औसत कामकाज और कोरोना के मोर्चे पर संपूर्ण विफलता के बीच चुनाव जीतने का सिर्फ एक ही फॉर्मूला है और वह है हिंदू-मुस्लिम का। भाजपा इसमें चैंपियन भी है इसलिए उसी मोर्चे पर खेल रही है।

By अजीत द्विवेदी

पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।

1 comment

  1. अजीतजी आपकी लेखनी का जवाब नही, बहुत सही पकड़े हो

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