ऑनलाइन हिंसा की शिकार महिलाएं

ट्रोलिंग आज की दुनिया का सच है। लेकिन इसके विभिन्न पहलुओं पर पर अभी बारीकी से ध्यान नहीं दिया गया है। इसलिए आई एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट महत्त्वपूर्ण है। मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के मुताबिक पिछले साल भारत में आम चुनाव के दौरान करीब सौ महिला राजनेताओं को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर गालियां दी गईं। इनमें हत्या और बलात्कार जैसी धमकियां भी शामिल थीं। उन्हें मार्च से मई के बीच ट्विटर पर नफरत भरे लगभग दस लाख संदेश मिले। पिछले आम चुनाव में कुल 724 महिला उम्मीदवार थीं। डिजिटल अधिकार विशेषज्ञ एमनेस्टी के निष्कर्ष से लगभग पूरी तरह सहमत हैं। उनका कहना है कि लिंग आधारित ऑनलाइन हिंसा बढ़ रही है, जिसका मकसद भय दिखाकर महिलाओं को सार्वजनिक पदों पर आने से रोकना है। एमनेस्टी के प्रवक्ता के मुताबिक महिला नेताओं के खिलाफ ऑनलाइन गाली गलौज के मामले बिगड़े या सुधरे हैं, यह स्पष्ट नहीं है। देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर इस तरह का शोध किया गया। जानकारों के मुताबिक विकसित और विकासशील देशों में लिंग आधारित ऑनलाइन हिंसा विश्व स्तर पर बढ़ रही है। ऐसा किसी एक खास देश या क्षेत्र में नहीं हो रहा है। यह विकासशील देशों की वास्तविकता है और उत्तरी अमेरिका, यूरोप और दुनिया भर में एक बढ़ती चुनौती है। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी प्रभावित हो रही है। खास तौर पर युवा महिलाएं ऑनलाइन उत्पीड़न के कारण सार्वजनिक जीवन से दूरी बना रही हैं। एमनेस्टी ने भारत पर अपनी रिपोर्ट में नेताओं के नाम नहीं जाहिर किए हैं। एमनेस्टी ने इसी तरह का शोध 2018 में ब्रिटेन और अमेरिका में किया था। तब 323 महिलाओं नेताओं पर शोध करने के बाद पाया गया कि उन्हें ठेस और अपमानित करने के इरादे से सात फीसदी ट्वीट्स में उनका जिक्र था। ब्रिटेन में कई महिला नेताओं ने ऑनलाइन गाली गलौच से परेशान होकर पिछले साल आम चुनाव में नहीं उतरने का फैसला किया था। एमनेस्टी ने ट्विटर से कहा है कि वह ऑनलाइन अभद्रता पर कड़े कदम उठाए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए और मजबूत नीति बनाए। ट्विटर का कहना है कि उसे अपने मंच पर अपशब्द और उत्पीड़न मंजूर नहीं है। साथ ही उसने कहा कि तकनीक की मदद से 50 फीसदी ऐसी सामग्री की पहचान की गई है। ट्विटर के मुताबिक उसे पता है कि अभद्रता के कारण लोग अपनी बात स्वतंत्रता के साथ नहीं कह पाते। यानी सच सबको पता है, लेकिन समाधान क्या है, इस पर अभी दुनिया माथापच्ची ही कर ही है।

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