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एक राज्य, तीन राजधानियां!

आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियां बनाने के मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी राज्य में तीन राजधानी बनाकर “विकास को विकेन्द्रीकृत” करना चाहते हैं। आंध्र प्रदेश में विधानसभा में तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें तीन राजधानियां बनाने की योजना को आकार देने संबंधी विधेयक पेश किया गया। लेकिन विपक्ष और कई सामाजिक संगठन सरकार के इस फॉर्मूले से सहमत नहीं हैं। पूरे आंध्र प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। आंध्र पुलिस का कहना है कि विजयवाड़ा, गुंटूर और अमरावती के अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 57 नेताओं को नजरबंद कर रखा गया है। वहीं विजयवाड़ा, अमरावती, गुंटुर में करीब आठ हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। आलोचकों का कहना है कि 2015 में प्रदेश की राजधानी के तौर पर विकसित करने के लिए उस वस की सरकार ने कई समझौते किए थे। अब तीन-तीन राजधानी बनाना सिर्फ ध्यान भटकाने वाला काम है। एक शिकायत यह भी है कि जो विकास संबंधी कार्य होने चाहिए थे वो नहीं हो रहे हैं। नई राजधानी के विकास के लिए लंबा वक्त और पैसे की जरूरत होगी। ऐसे में ये आरोप दमदार लगता है कि तीन-तीन राजधानी सिर्फ दिखावे के लिए बनाई जा रही हैं। इससे फायदा कुछ नहीं होने वाला है। अलग-अलग राजधानी और जिलों में काम बंटने से कुछ लाभ नहीं मिलने वाला है। यह नया प्रयोग होने जा रहा जिसके विफल होने की पूरी संभावना है। आंध्र प्रदेश विधानसभा में पेश आंध्र प्रदेश विकेन्द्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक- 2020 के मुताबिक अमरावती को विधायी, विशाखापट्टनम को कार्यकारी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाया जाएगा। टीडीपी राजधानी को स्थानांतरित करने के कदम का भारी विरोध कर रही है। कैबिनेट ने उस एपी कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी को भी रद्द करने का फैसला किया है, जिसे पिछली टीडीपी सरकार द्वारा नई राजधानी के रूप में अमरावती के विकास की देखरेख के लिए बनाया गया था। इसके बदले वाईएसआर सरकार ने अमरावती महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन का फैसला किया है। अमरावती के विकास के लिए चंद्रबाबू नायडू ने कई कंपनियों से समझौते किए थे, लेकिन तीन-तीन राजधानी बनने से इसका विपरीत असर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर मामला विवादास्पद है, लेकिन राज्य सरकार इसकी तरफ बढ़ने पर आमादा दिखती है।

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