मायावती के लिए नई चुनौती- चंद्रशेखर! - Naya India
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मायावती के लिए नई चुनौती- चंद्रशेखर!

पिछले दिनों बसपा प्रमुख मायावती ने एक बयान जारी करके भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पर बसपा को नुकसान पहुंचाने वाले दलों के हाथों में खेलने का आरोप लगाया। मालूम हो कि आजाद ने 12 दिसंबर को राजनीतिक दल बनाने का ऐलान किया जो कि दलित वोटों को अपना एकाधिकार समझने वाली मायावती के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। नागरिकता संशोधन कानून का जम कर विरोध करने के कारण वे फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश से होने के बावजूद वे चुनाव के पहले जामा मस्जिद पर प्रदर्शन करते हैं व उनके दल के नेता गरीब दलितों से पैसा एकत्र कर उनकी जमानत करवाते हैं।

जब 12 दिसंबर को बसपा ने नागरिकता बिल पर मतदान के दौरान राज्यसभा से वाकआउट किया था तो आजाद ने कहा था कि जब संविधान की हत्या की जा रही थी तब बसपा के दो राज्यसभा सांसद भाजपा की मदद करने के लि वाकआउट कर रहे हैं। मैं बहुजन समाज को नया नेतृत्व दूंगा। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा के साथ लड़ने के बावजूद हारने के कारण बसपा की हालत बहुत खराब है।

महज 33 साल के चंदशेखर आजाद उर्फ रावण का जन्म तीन दिसंबर 1986 को हुआ था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर के घड़कौली गांव के जन्मे इस युवक के पिता गोवर्धन वहां के एक सरकारी स्कूल के प्राध्यापक रहे थे। आजाद मूल रूप से उत्तराखंड के हैं। उन्होंने अपने साथी विनय रतन सिंह के साथ मिल कर 2014 में भीम आर्मी बनाई, जिसका उद्देश्य शिक्षा के जरिए दलितों का उत्थान करना था। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों को पढ़ाने के लिए स्कूल खोलने शुरू किए। इसकी वजह यह थी कि वे अपने पिता गोवर्धन दास के 2013 में हुए निधन के पहले लगभग दो साल तक उनके काफी करीब रहे। वे कैंसर से पीडि़त थे व वकालत पूरी कर चुके आजाद उन्हें लगभग हर रोज अस्पताल ले जाया करते थे। वे इस दौरान उसे बताते हैं कि किस तरह से समाज ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। उनके बार-बार तबादले किए गए व विरोध करने पर उनका वेतन रोक दिया गया। उनका उपहास उड़ाते हुए लोग कहते कि मास्टरजी चमार हैं।

इस तरह के किस्से सुन कर आजाद ने अपने साथियों सतीश कुमार व विनय रतन सिंह के साथ 2014 में भीम आर्मी गठित की जो कि भीम आर्मी भारत एकता मिशन के नाम से पंजीकृत कराई गई। विनय रतन सिंह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है। आज यह संगठन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, शामली व मुजफ्फरनगर इलाको में साढ़े तीन सौ स्कूल चलाता है, जिनमें दलितों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। इस इलाके में ठाकुरों द्वारा दलितों पर अत्याचार किए जाने की खबरे आती रहती हैं। जब उन लोगों ने एक दलित युवक द्वारा गांव के एक कुएं से पानी पीने पर ठाकुरों द्वारा उसकी मारपीट किए जाने का विरोध किया तो प्रशासन ने उल्टे उन पर ही दबाव बनाया। याद रहे कि कुछ साल पहले सहारनपुर में महाराणा प्रताप की जयंती पर लाउडस्पीकर बजाए जाने का विरोध जताए जाने पर दलितों व राजपूतों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। इस दंगे में एक ठाकुर युवक मारा गया था व दलितों के 24 घरों को आग लगा दी गई थी। उत्तर प्रदेश के चुनाव के दौरान उन्होंने अखिलेश यादव से कहा कि आपको यादवों और अहीर रेजीमेंट की तो याद रही मगर आप चमार रेजीमेंट को भूल गए। यहां याद दिला दिया जाए कि चंद्रशेखर बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के समानांतर राजनीति करते आए हैं क्योंकि दोनों ही अंबेडकर के सिद्धांतों के जरिए दलितों को आगे लाने का दावा करते आए हैं।

अनेक दलित विचारकों का मानना है कि दलितों के हित की जगह राजनीतिक हित को प्राथमिकता देने के कारण बड़ी तादाद में दलित मायावती से दूर होते जा रहे हैं व ऐसे में चंद्रशेखर उनका स्थान ले सकते हैं। कुछ समय पहले जब सपा, बसपा व रालोद साथ में थे तो आजाद के समर्थको ने नीले रंग के साफे पहन कर आजाद के पोस्टरों के साथ देवबंद में होने वाली उनकी रैली को अपना निशाना बनाया था। तब उन्होंने भीड़ में दावा किया था कि मायावती भीम आर्मी द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों का स्पष्टीकरण करने के लिए अपने भतीजे आकाश को सामने लाएं। यह घटना दलितों के नेतृत्व में चल रही लड़ाई को उजागर करती है।

वे भाजपा के सफाए का ऐलान कर चुके हैं व उनके बढ़ते प्रभाव सक्रियता के कारण सभी राजनीतिक दल परेशान हैं। उनके समर्थन में दलित ही नहीं मुसलमानों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। वे भाजपा को भगवा आतंक करार देते हैं उन पर अक्सर संघ व भाजपा का करीबी होने का आरोप लगाया जाता है क्योंकि वे मायावती के दलित वोट बैंक में सेंध लगा कर उसे कमजोर कर सकते हैं। उनकी सफाई है कि ‘मैं संघ से नफरत करता हूं क्योंकि वह ब्राह्मणवाद का संरक्षक है। मैं तो अंबेडकरवादी हूं। हमारे बीच कुछ भी समान नहीं है।‘ वे नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने के साथ ही निकट भविष्य में चुनावी राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर चुके हैं। उनका दावा है कि हमने पहले बहुजन समाज पार्टी के साथ मिल कर काम करने की कोशिश की थी पर उसके नेता इसके लिए तैयार नहीं हुए। वे महाराष्ट्र के आरपीआई को चुनौती देने की कोशिश करेंगे। ध्यान रहे कि मायावती ने लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने का ऐलान करने पर चंद्रशेखर पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे दलित वोटों को बांटने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उसके बाद चंद्रशेखर चुनाव मैदान से हट गए थे।

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