• डाउनलोड ऐप
Thursday, May 13, 2021
No menu items!
spot_img

एक उम्मीद तो जगी

Must Read

म्यांमार की हालत के बारे में दुनिया में एक तरह का असहाय होने का भाव रहा है। म्यांमार के सैनिक शासक बेरहमी से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों की जान लेते रहे हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से वहां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ है। पश्चिमी देशों ने जो पहल की उसे चीन और रूस ने नाकाम कर दिया। म्यांमार के सैनिक शासकों को अलग लगता हो कि इन दो बड़ी ताकतों के हाथ उनकी पीठ पर हैं, तो यह गलत नहीं है। इसीलिए एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) की पहल से एक हलकी से उम्मीद जगती दिखी है। उसने म्यांमार के संकट को हल करने के लिए जो पहल की है, उस पर पश्चिमी देशों और चीन में सहमति बन सकने के शुरुआती संकेत दिखे हैं। आसियान की योजना को असल में बड़ा बल तब मिला, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आसियान के बयान की भाषा के अनुरूप अपील जारी की। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान की भाषा इस रूप में तैयार की गई, जिससे चीन और रूस को कोई आपत्ति ना हो। सुरक्षा परिषद ने आसियान से कहा कि वह अपने फैसले के मुताबिक म्यांमार के लिए अपना दूत तुरंत नियुक्त करे।

यानी एक तरह से परिषद ने आसियान की योजना का समर्थन किया है। गौरतलब है कि म्यांमार के संकट के हल का रास्ता ढूंढने के लिए आसियान देशों ने जकार्ता में 24 अप्रैल अपनी विशेष बैठक की थी। उसमें एक कार्ययोजना बनाई गई, जिसे तुरंत सार्वजनिक नहीं किया गया। बैठक के बाद एक बयान सिर्फ ये अपील की गई कि म्यांमार में हिंसा तुरंत रोकी जाए। फिर आसियान की तरफ से वियतनाम ने सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई। वहां जकार्ता में हुई चर्चा की जानकारी दी गई। खबर यह है कि म्यांमार की समस्या का हल निकालने के लिए आसियान ने अमेरिका और चीन के बीच सहमति बनाने की जरूरत महसूस की है। इसलिए आसियान ने अमेरिका और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात तय करने की पहल की है। वैसे म्यांमार के सैनिक शासकों को शांतिपूर्ण समाधान के लिए राजी करना आसान नहीं है। लेकिन आसियान की कोशिशों से इस मामले में एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय पहल होने का रास्ता तैयार होता दिख रहा है। यही उम्मीद जगाने वाली बात है। अब नतीजा चाहे जो हो, कहा जा सकता है कि आसियान ने एक व्यावहारिक कोशिश की है।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

सुशील मोदी की मंत्री बनने की बेचैनी

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को जब इस बार राज्य सरकार में जगह नहीं मिली और पार्टी...

More Articles Like This