सावरकरः निर्णायक भारत मोड़!

और यह मोड़ है गांधी की 150वीं जयंती के वर्ष में! क्या गजब बात है जो सावरकर के वीडियो फुटेज के साथ टीवी चैनल दिन भर सावरकर, सावरकर की गाथा बता रहे हैं। क्या गजब बात है जो महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव सावरकर को भारत रत्न के वादे पर लड़ा जा रहा है! यह मामूली बात नहीं है। जान लिया जाए कि देश के दो राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में कभी गांधीवादी टोपी पहने लोग सर्वाधिक दिखलाई देते थे। इन दोनों प्रदेशों में राजनीति पूरी तरह गांधी, गांधी टोपी, बापू के प्रतीक लिए हुए थी। यह भी ध्यान रहे कि नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय होने और संघ में महाराष्ट्र के चितपावनी ब्राह्मणों के वर्चस्व के बावजूद महाराष्ट्र की राजनीति में संघ अछूत हुआ करता था तो चितपावनी ब्राह्मण राजनीति से निर्वासित!

हां, आजाद भारत के इतिहास में यह बात विस्तार से नहीं लिखी हुई है कि जब गांधी की हत्या हुई तो संघ के लोगों, परिवारों के घरों पर हमले हुए थे। हिंदू महासभा, संघ और हिंदू राजनीति करने वाले एक्टिविस्टों की शक-साजिश की शंका में गिरफ्तारी हुई। संघ पर प्रतिबंध लगा तो महाराष्ट्र में हत्यारे का नाम गोडसे और गोडसे ‘चितपावनी ब्राह्मण’ है जान कर चितपावनी ब्राह्मणों के घरों पर हमले हुए! ब्राह्मण लिंच हुए!

हां, 30 जनवरी 1948 की शाम ज्योंहि खबर फैली कि गांधी की हत्या हुई है और हत्यारा चितपावनी ब्राह्मण है तो उसी रात मुंबई में वैसे ही प्रतिक्रिया स्वरूप ब्राह्मणों की लिंचिंग हुई थी, जैसे 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली आदि शहरों में सिखों के खिलाफ हुई थी। इसमें मरने वालों की संख्या और नुकसान का विस्तार से ब्योरा नहीं है। मगर मराठी भाषा, हिंदू संगठनों के प्रकाशनों में कुछ ब्योरा है। जैसे मराठी साहित्यकार और तरुण भारत के संपादक गजानंद त्र्यंबक माडखोलकर की किताब ‘एका निर्वासिताची कहाणी’ (एक शरणार्थी की कहानी) के मुताबिक गांधी भक्तों की इस हिंसा में करीब आठ हजार मराठी ब्राह्मण मारे गए। 31 जनवरी को माडखोलकर के घर पर भी हमला हुआ था। उन्हें महाराष्ट्र के बाहर शरण लेनी पड़ी थी और अपने इसी अनुभव पर उन्होंने यह किताब लिखी थी। एक रपट अनुसार सबसे पहले हिंसा, लिंचिंग मुंबई में शुरू हुई। उस रात 15 लोग मारे गए और पुणे में 50 लोग। मुंबई, पुणे, सांगली, नागपुर, नासिक, सतारा, कोल्हापुर, बेलगाम (कर्नाटक) में मराठी ब्राह्मणों के घरों पर हमले हुए। सतारा में एक हजार से ज्यादा मराठी ब्राह्मणों के घरों को जला दिया गया। एक परिवार के तीन पुरुषों को सिर्फ इसलिए जला दिया गया, क्योंकि उनका ‘सरनेम’ गोडसे था।स्वतंत्रता सेनानी डॉ. नारायण सावरकर के साथ बहुत बुरा हुआ, जो सावरकर के सबसे छोटे भाई थे। पहले भीड़ ने रात में सावरकर के घर पर हमला किया। जब वहां बहुत सफलता नहीं मिली तो शिवाजी पार्क में ही रहने वाले उनके छोटे भाई डॉ. नारायण सावरकर के घर पर भीड़ ने हमला बोला। उन्हें खींचकर बाहर निकाला और भीड़ ने पत्थरों से बुरी तरह लहूलुहान किया और कुछ महीनों बाद उनका निधन हुआ।

डीएनए अखबार में बुजुर्ग पत्रकार वसंत प्रधान (तब वे मराठी दैनिक में थे और समाजवादी पार्टी के एक्टिविस्ट भी थे) ने हत्या बाद के वक्त को याद करते हुए लिखा- अगले दिन दक्षिणपंथी संगठनो और ब्राह्मणों के घरों पर हमले होने लगे।…बतौर समाजवादी पार्टी सदस्य मैं भी एक रैली में शामिल हुआ और हमने सावरकर को फांसी दो के नारे लगाए।

सोचें, उस महाराष्ट्र में, उन सावरकर को भाजपा ने महाराष्ट्र के चुनाव में मुद्दा बनाया है और इस मुद्दे पर भाजपा यदि चुनाव जीतती है तो यह भारत राष्ट्र-राज्य के पूरी तरह बदलने का निर्णायक मोड़ क्या नहीं होगा? इसके बहुत गहरे अर्थ हैं! एक अर्थ है नरेंद्र मोदी और अमित शाह का दुस्साहस (या मन का गहरा विश्वास,आस्था) असीमित है। पांच साल पहले इन्होंने ब्राह्मण देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री बनाया। अब वेउन सावरकर के भारत रत्न का ठप्पा महाराष्ट्र की जनता से लगवा रहे हैं, जो महाराष्ट्र में ही बेगाने या खलनायक थे।टीवी चैनलों पर सावरकर का नैरेटिव बना डाला है। सावरकर महान की दंत कथाएं लोगों के दिल-दिमाग में वैसे ही उतारी जा रही हैं, जैसे एक वक्त पंडित नेहरू-कांग्रेस ने गांधी की बनवाई थी।

पर यह मोड़ आज इसलिए स्वभाविक है क्योंकि यदि राजनीति ने हिंदू पहचान पर वोट और सत्ता साध सकने का पुख्ता फार्मूला पा लिया है तो सावरकर तो हिंदू राजनीतिक दर्शन के, हिंदू राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के नंबर एक आधुनिक सेनानी, राष्ट्रवादी, बुद्धिवादी थे ही।

महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव में पते की बारीक बात यह भी है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह व भाजपा चुनाव को सिर्फ और सिर्फ हिंदू राष्ट्रवादी फार्मूलों से लड़ रही है। नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में बार-बार अनुच्छेद 370 खत्म करने के हवाले विपक्ष को चुनौती दी तो हरियाणा में उन्होने सीधे पाकिस्तान जाने वाला पानी को हरियाणा को दिलवाने की बात कह डाली। महाराष्ट्र में सावरकर और अनुच्छेद 370 तो हरियाणा में पाकिस्तान का पानी! जाहिर है अब दंगे, ओवैसी याकि हिंदू-मुस्लिम वाली राजनीति नहीं, बल्कि अघोषित हिंदू राष्ट्र में बहुसंख्यक वोटों को रंगते हुए सत्ता को पकाने का रोडमैप है। तभी यह मोड़ कांग्रेस और विपक्ष के लिए संकट ले आया है कि बोलें तो क्या बोलें!

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