दलितों पर बदस्तूर अत्याचार - Naya India
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दलितों पर बदस्तूर अत्याचार

राजस्थान के नागौर में 16 फरवरी को कथित चोरी के आरोप में दो दलितों की अमानवीय तरीके से पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस सवाल पर फिर चर्चा शुरू हुई है कि आखिर दलितों पर अत्याचार थमते क्यों नहीं हैं। सवा साल पहले राजस्थान में सत्ता बदल गई थी। इस रूप में लगभग सभी राज्यों और केंद्र में भी सरकारें बदलती रही हैं। लगभग तमाम दल सत्ता में आते-जाते रहे हैं। इनके बीच जो एक बात स्थायी है, वो यह कि दलितों को कभी ज्यादती से मुक्ति नहीं मिलती। यह बात बहुजन समाज पार्टी के सत्ताकाल में भी बनी रही, जबकि इस पार्टी को दलितों की पार्टी माना जाता है। नागौर की घटना में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना में सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में दोनों युवकों की बेरहम पिटाई करते दिखा गया। आरोप है कि पिटाई करने वालों ने दो में से एक पीड़ित को चोट पहुंचाने के इरादे से पेचकस पर पेट्रोल से भरा कपड़ा लपेट उसके गुप्तांग में डाला। युवकों की पिटाई का मामला तब सामने आया जब वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

हालांकि आरोपियों ने भी पीड़ितों के खिलाफ कथित चोरी के आरोप में जवाबी मामला दर्ज कराया था। दरअसल दोनों पीड़ित नागौर में बाइक सर्विस कराने के लिए सर्विस सेंटर गए थे। वहीं पर एजेंसी कर्मचारियों ने दोनों पर पैसे चुराने के आरोप लगाए और उनकी भयावह तरीके से पिटाई कर दी। मगर सवाल यह उठा कि क्या अगर चोरी के आरोपी युवक दलित नहीं होते तब भी उनकी उतनी ही बेरहमी से पिटाई होती? ये मामला इतना चर्चित इसलिए हुआ क्योंकि ऐसी घटनाओं की एक परी पृष्ठभूमि मौजूद है। गौर करने की बात यह है कि देश आजाद होने के इतने साल बाद भी दलितों के साथ अत्याचार की घटनाएं बंद होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दिनों महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जब एक दलित महिला ने एक शख्स को अपने घर में घुसने से रोका, तो उस शख्स ने महिला को जिंदा जला दिया। पिछले दिनों गुजरात के बनासकांठा में एक दलित युवक को शादी के लिए घोड़ी चढ़ने नहीं दिया गया। काफी हंगामे के बाद पुलिस सुरक्षा में उसकी बारात निकल पाई। जाहिर है, हम सबको अपना संस्कार और सोच बदलने की जरूरत है। वरना, यह कलंक हमारे समाज से नहीं मिटेगा।

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