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Thursday, May 13, 2021
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बाइडेन का ‘अमेरिका फर्स्ट’!

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बतौर राष्ट्रपति जो बाइडेन के पहले 100 दिन में जिस एक बात के साफ संकेत मिले वह यह है कि इस दौर की विदेश नीति में भी अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अपनाई गई ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चल रहा है। गौरतलब है। चीन और ईरान के मामले में अमेरिका का सख्त रुख कायम है। चीन के खिलाफ वैश्विक गोलबंदी करने को बाइडेन प्रशासन अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा है। उधर ईरान के साथ परमाणु डील में तुरंत लौटने का वादा बाइडेन ने तोड़ दिया है। इसके विपरीत उसने इसके लिए नई शर्तें लगा दी हैं। शरणार्थियों को अमेरिका आने देने की नीति के मामले भी बाइडेन प्रशासन का रुख ट्रंप जैसा ही सख्त है। ट्रंप ने एक साल में सिर्फ 15 हजार शरणार्थियों को आने देने की नीति तय की थी। इसे बढ़ाने के अपने वादे को पलटे हुए अब बाइडेन ने कह दिया है कि ये सीमा जारी रहेगी। कोरोना वायरस की वैक्सीन दुनिया को उपलब्ध कराने में बाइडेन प्रशासन ने कोई रुचि नहीं ली है। इस मामले में भी उसकी नीति अमेरिका फर्स्ट है।

वैक्सीन के मामले में बाइडेन ने संदेश देने कोशिश की है कि उनके प्रशासन के लिए अमेरिकी नागरिकों के हित ही सर्वोच्च हैं। अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी फौजियों की वापसी के लिए ट्रंप प्रशासन ने तालिबान से समझौता किया था। बाइडेन को भी इस बात की चिंता नहीं है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद क्या होगा। क्या वहां तालिबान का शासन लौट नहीं आएगा? इसकी फिक्र ना करते हुए बाइडेन ने अगले 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी फौजियों की वापसी का एलान कर दिया गया है। बाइडेन के दौर में भी अमेरिका ने सीरिया पर बमबारी की। यह भी एक तरह से ट्रंप की नीति को जारी रखना ही है। सऊदी अरब के प्रति अमेरिका का नरम रुख बना हुआ है। ये बात पत्रकार अदनान खशोगी की हत्या के मामले में जाहिर हुई। बाइडेन प्रशासन ने ये माना कि इस हत्या में सऊदी युवराज सलमान का हाथ है। लेकिन बात जब सलमान पर प्रतिबंध लगाने की आई, तो बाइडेन प्रशासन ने सामरिक गणना को तरजीह दी। कोई पाबंदी नहीं लगाई गी। यानी अमेरिका फर्स्ट की नीति जारी रही। तो अमेरिका लौट आया है, जैसे शब्द बोले जरूर गए हैं। इनका कोई व्यावहारिक मतलब कम से कम अब तक सामने नहीं आया है।

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