बिहार पर देश की निगाहें - Naya India
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बिहार पर देश की निगाहें

बिहार में मतदान समाप्त हो चुका है और अब इंतजार नतीजों का है। इसका खास इंतजार इसलिए भी है कि लंबे समय बाद भारत में ऐसा कोई चुनाव हुआ, जिसमें रोजी रोटी के सवाल मुद्दा बनते दिखे। अब मंगलवार को ये देखने पर निगाहें होंगी कि क्या सचमुच इन्हीं मुद्दों पर मतदान हुआ। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव को इस बात का श्रेय देना होगा कि उन्होंने राजनीतिक विमर्श को जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं से निकाला। वे रोजगार के सवाल को चर्चा के केंद्र में ले आए। ये बात दीगर है कि दस लाख नौकरियां देने का वादा पूरा करना संभव है या नहीं। मगर ऐसे मुद्दों पर देश में चुनाव हो, इसकी याद भी एक या दो पीढ़ियों को नहीं है।

तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के अन्य घटक दलों की मौजदूगी में ‘प्रण हमारा, संकल्प बदलाव का’ नाम से उन्होंने 25 सूत्री घोषणा पत्र जारी किया तो उस वक्त उन्होंने कहा था कि महागठबंधन की सरकार बनते ही कैबिनेट की पहली बैठक में पहली कलम से दस लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उससे विधानसभा चुनाव में रोजगार मुद्दा बनने लगा। इससे सत्ताधारी एनडीए भी इस मुद्दे पर बोलने को मजबूर हुआ। खुद प्रधानमंत्री ने एक चुनाव सभा में कहा कि बिहार में नए उद्योग लगाए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार मिल सकेगा और उन्हें काम के लिए दूसरे राज्यों का रूख नहीं करना होगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणापत्र में 19 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजद को लेकर व्यंग्य बाण ही चलाते रहे। कहा कि पंद्रह साल (लालू- राबड़ी राज) में नब्बे हजार को नौकरी देने वाले दस लाख नौकरी देने की बात कह रहे हैं। चूंकि मुद्दा रोजमर्रा की जिंदगी के सवाल बने तो भाजपा ने एलान कर दिया कि राज्य में फिर एनडीए की सरकार बनने पर सभी प्रदेशवासियों को कोरोना की वैक्सीन मुफ्त दी जाएगी। जनता दल- यू ने ‘पूरे होते वादे, अब हैं नए इरादे’ के टैगलाइन से अपना निश्चय पत्र जारी किया। इसमें युवा शक्ति-बिहार की प्रगति, सशक्त महिला-सक्षम महिला, हर खेत को पानी, सुलभ संपर्कता, स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव, सबके लिए अतिरिक्त सुविधा और स्वच्छ शहर, विकसित शहर की बात कही गई। तो कुल मिलाकर इन सवालों पर जनता का फैसला वोटिंग मशीनों में बंद हो गया है। नतीजों से संकेत मिलेगा कि आखिर जनता की प्राथमिकता क्या है।

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