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Friday, May 7, 2021
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तमाम ब्रह्मास्त्रों के बावजूद

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भारतीय जनता पार्टी के तमाम ब्रह्मास्त्र थे। माहौल, पैसा, नेतृत्व, मीडिया समर्थन सब कुछ उसके पास थे। और उसके ऊपर थी ओपन डोर पॉलिसी। यानी दूसरी पार्टियों के प्रभावशाली नेताओं को बिना किसी संकोच के अपने में मिलाने की नीति। फिर सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र आया मतदान से एक दिन पहले पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में सैनिक कार्रवाई। इससे बने वातावरण के बीच महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव बिना किसी मुकाबले के महसूस होने लगे। इन चुनावों में लोगों की दिलचस्पी आम तौर पर इसीलिए बेहद कम रही क्योंकि माना गया कि भारतीय जनता पार्टी के सामने कोई मुकाबला नहीं है। एक एग्जिट पोल में तो 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में भाजपा को 83 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। इस पृष्ठभूमि में अगर दोनों राज्यों के चुनाव नतीजों को देखें तो ये भाजपा के लिए निराशाजनक जबकि विपक्ष के लिए ढाढस बंधाने वाले महसूस होते हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों जगहों पर भाजपा घटे ताकत के साथ विधानसभा में होगी। अगर पिछले 23 मई को आए लोकसभा नतीजों की रोशनी में ताजा परिणामों का विश्लेषण करें तो भाजपा के लिए खबर और भी ज्यादा मायूसी बढ़ाने वाली होगी।

और उनके साथ विभिन्न राज्यों की दो लोकसभा और 51 विधानसभा सीटों के उपचुनाव नतीजों पर भी गौर करें तो ये कहानी और पुष्ट होती है। तो प्रश्न है कि क्या सचमुच पांच महीनों में देश का सियासी माहौल बदल गया है? इस निष्कर्ष पर पहुंचना शायद जल्दबाजी होगी। लोकसभा चुनाव अलग मुद्दों और अलग चेहरे को सामने रखकर लड़ा गया था। बेशक विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि अलग होती है। इसके बावजूद भाजपा जिस एडवांडेज की स्थिति से मैदान में गई थी, ये नतीजे उससे मेल नहीं खाते। गौरतलब है कि कश्मीर में धारा 370 खत्म करने के बाद सारे देश में सुखबोध की लहर चली थी। इस मुद्दे पर भाजपा को मिले जन समर्थन के मद्देनजर यह माना गया था कि आने वाले चुनाव ये पार्टी सिर्फ इसी से जीत लेगी। इन सारे हालात को ध्यान में रखें तो यही कहा जाएगा कि भारतीय मतदाताओं को सुनिश्चित मान कर चलना जोखिम भरा होता है। बेशक इन चुनाव नतीजों से भारतीय राजनीति पर भाजपा के वर्चस्व पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। विपक्ष में नई जान फूंकेगी, ये आस जोड़ना भी फिलहाल यथार्थवादी नहीं है। इसके बावजूद यह कहा जा सकता है कि भाजपा यह मानकर नहीं चल सकती कि वह स्थायी रूप से सत्तासीन हो गई है।

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