Adityanath Yogi Hindu Vote हिंदू कोर वोट में योगी नंबर 1
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हिंदू कोर वोट में योगी नंबर 1

Yogi adityanath

Adityanath Yogi Hindu Vote हां, यदि यह मानें कि भारत के कुल मतदाताओं में बीस करोड़ कट्टर हिंदूवादी वोट हैं और ये सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति में पके हुए हैं तो इन वोटों में अब नंबर एक हीरो योगी आदित्यनाथ हैं। मैं यह बात मथुरा में कट्टर मोदी भक्त अपने रिश्तेदारों-परिचितों की बातों को सुन कर लिख रहा हूं। मोदी की जगह योगी के लिए हृदय परिवर्तन सा मामला है। इन कोर हिंदुओं में अब नरेंद्र मोदी नंबर दो पर हैं। क्यों? क्या दलील है? दरअसल मोदी सरकार ने प्रायोजित मीडिया में जो तालिबानी हल्ला बनवाया तो उसका मैसेज बना कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार तालिबान की लल्लोचप्पो कर रही है। अफगानों को शरण दे रही है। कतर में तालिबान से बात शुरू की है जबकि दूसरी तरफ योगी हैं, जिन्होंने तालिबान की खबर के तुरंत बाद देवबंद में एटीएस कमांडो सेंटर खोलने का निर्णय लिया। उनके मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्विट करके कहा कि तालिबान की बर्बरता के बीच यूपी की योगी सरकार ने देवबंद में एटीएस कमांडो सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। ध्यान रहे त्रिपाठी ने यह भी लिखा था कि देवबंद में यूपी एटीएस की यूनिट खुली भी नहीं कि इसी बीच आतंकियों के पैरोकारों और उनके मुकदमे वापस लेने वालों के पेट में भीषण दर्द शुरू हो गया है।

pm Narendra modi

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इस नैरेटिव को सपा नेताओं द्वारा यह कह कर फैलाना था कि देवबंद में इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र है, ऐसे में देवबंद में एटीएस सेंटर खोलकर यूपी सरकार सिर्फ मुसलमानों को डराने की कोशिश में है। जाहिर है योगी और उनके सलाहकारों ने तालिबानी मौके को लपका है। इसके बहाने सुरक्षा-व्यवस्था में सख्ती के साथ वे यह मैसेज बनवाने में कामयाब हैं कि आगे तालिबानी याकि मुस्लिम चुनौती होगी तो योगी हैं जो उसे हैंडल कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा तुरंत देवबंद में दो हजार वर्ग मीटर जमीन एटीएस को ट्रांसफर करना और टीवी चैनलों में लगातार तालिबानी बर्बरता और उसकी विचारधारा के देवबंदी लिंक की प्रायोजित खबरों ने भी योगी आदित्यनाथ का ग्राफ बढ़ाया है।

मानो यह कम हो जो जन्माष्टमी पर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचकर योगी ने भक्त हिंदुओं पर और जादू किया। मथुरा में मांस-शराब की बिक्री पर रोक लगाने का ऐलान कर द्वापर युग की याद दिलाते हुए योगी ने लोगों को दूध बेचने के लिए प्रोत्साहित करने का एजेंडा बनाया। अपने आप मथुरा में जन्मस्थान की मुक्ति का ख्याल बना। जाहिर है यह सब नरेंद्र मोदी या संघ परिवार की सलाह से नहीं है, बल्कि योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम की सोची-विचारी रणनीति में है। गौर करें योगी हाल के महीनों में कितनी बार अयोध्या, काशी, विंध्याचल जैसे धर्मस्थान गए हैं? मामूली बात नहीं है जो अयोध्या हो या काशी विश्वनाथ मंदिर सभी जगह दिल्ली के वीवीआईपी मतलब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हो या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबके साथ योगी के फोटो मिलेगी। पिछले ढाई सालों में वे बीस बार अयोध्या गए होंगे। यह चर्चा अपनी जगह है कि वे कहीं अयोध्या से चुनाव न लड़ें। फैजाबाद को अयोध्या जिला बनाना हो या इलाहाबाद को प्रयागराज से लेकर मंदिर कॉरिडोर जैसे निर्माण, साधु-संतों के जमावड़े आदि से योगी आदित्यनाथ ने संघ परिवार के औसत वोट और कट्टर हिंदू के दिल-दिमाग में अपनी वह छाप बना डाली है, जिसके बूते तय मानें कि वे आगे अपनी ताकत पर ही उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। मतलब योगी को यूपी में चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कतई जरूरत नहीं है।

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इसके आगे कई अर्थ हैं। मथुरा में योगी के दौरे के बाद जिन हिंदुओं से मुझे योगी के जादू का भान हुआ वे ब्राह्मण, बनिए और ओबीसी हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि योगी के कारण यूपी में ठाकुर बनाम ब्राह्मण राजनीति की वास्तविकता नहीं है। वह है। मगर भाजपा के जो कट्टर परंपरागत ब्राह्मण व हिंदू वोट हैं वे योगी को अपना योगीराज मान रहे हैं। उन्हीं से वे मुसलमानों से अपनी सुरक्षा समझते हैं। सो, आगे जितनी हिंदू-मुस्लिम राजनीति होगी उसके महानायक योगी होंगे न कि नरेंद्र मोदी। यूपी के कट्टर हिंदू वोटों में नरेंद्र मोदी महंगाई, महामारी, पेट्रोल-डीजल, विदेश नीति, बेरोजगारी के कारण फेल हैं, जबकि इन सब मोर्चों पर कट्टर हिंदुओं में योगी के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं है। सो, आश्चर्य नहीं होगा कि यूपी का अगला विधानसभा चुनाव योगी के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी का न हो, बल्कि योगी की छप्पन इंची छाती पर हो जो बुनियादी तौर पर मोदी सरकार की असफलताओं की ढाल भी बने।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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